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IIM-A लगातार 60 वर्ष से नंबर-1 कैसे?:आईआईएम-ए के निदेशक प्रो. एरोल डिसूजा ने भास्कर को बताए संस्थान के हमेशा शीर्ष पर रहने के जमीनी सूत्र

अहमदाबादएक वर्ष पहलेलेखक: धारा राठौड़
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प्रो. डिसूजा ने बताया कि प्रोफेसर्स को साल में 4 माह छुट्टी, स्टूडेंट्स को बतौर सीईओ और एमडी विचार करने के टास्क और रियल टाइम केस स्टडी से उपलब्धि मिली है। - Dainik Bhaskar
प्रो. डिसूजा ने बताया कि प्रोफेसर्स को साल में 4 माह छुट्टी, स्टूडेंट्स को बतौर सीईओ और एमडी विचार करने के टास्क और रियल टाइम केस स्टडी से उपलब्धि मिली है।

भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएम-ए) स्थापना के सफल और गौरवशाली 60 साल पूरे होने का उत्सव मना रहा है। ये जश्न इसलिए कि 6 दशक लंबी यात्रा में संस्थान ने खुद को वक्त से आगे रखने में कामयाब रखते हुए देश की शीर्ष प्रबंध संस्था होने की अपनी पहचान को भी बरकरार रखा है। आईआईएम-ए के निदेशक प्रो. एरोल डिसूजा ने संस्थान की खास संस्कृति और दूरदृष्टिपूर्ण कार्यशैली के गुर भास्कर से विशेष बातचीत में साझा किए। पेश है उन्हीं के शब्दों में इस उपलब्धि के मायने...

आईआईएम-ए की स्थापना मुंबई में होनी थी, लेकिन सृजनशील दूरदृष्टा विक्रम साराभाई ने भारत सरकार को यह संस्थान अहमदाबाद में स्थापित करने के लिए मनाया। उद्यमी होने के चलते वे प्रबंधन में भी बहुत अच्छे थे। पहले निदेशक (अंशकालिक) के रूप में उनके नेतृत्व से संस्थान को नई दिशा मिली। आश्चर्य की बात है कि विक्रम साराभाई ने कार्यकाल पूरा होते ही प्रबंधन पत्र लिख कहा- ‘अब मुझे यह पद त्याग देना चाहिए क्योंकि आईआईएम-ए को नए विचार और ऑइडिया के साथ आगे बढ़ाने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है।’

विक्रमभाई के बाद रवि मथाई का नेतृत्व संस्थान को मिला। मथाई 36 वर्ष के थे, जब निदेशक बने। उन्होंने नई तकनीक और आइडिया के साथ आईआईएम-ए को आगे बढ़ाया। मैं मानता हूं कि विक्रम साराभाई ने स्वयं का दृष्टांत देकर आईआईएम-ए को जो गौरवशाली प्रथा दी, वह आज भी बरकरार है। समय से आगे का विचार और व्यवहारिक आचरण। इन्हीं मूल्यों की दम पर आईआईएम-ए 60 वर्ष से लगातार नंबर-1 है। वजह, हम देश की टॉप कंपनियों के एमडी, सीईओ और मैनेजर्स के साथ बातचीत करते हैं।

उनकी जरूरतों को समझते हैं और उसी अनुरूप ही अपने विद्यार्थियों को तैयार करते हैं। कोरोना संकट उद्योग सहित जीवन के हर क्षेत्र में बहुआयामी बदलाव का प्रतीक बना। इसे ध्यान में रखकर हमने 16 से 20 नए कोर्स शुरू किए हैं। आईआईएम-ए हमेशा ही अपने विद्यार्थियों और प्रोफेसर्स को समय से आगे रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां विद्यार्थियों को रियल टाइम केस स्टडी से समझाने-पढ़ाने की संस्कृति है। इस क्रम में रियल टाइम केस स्टडी देकर समाधान तलाशने को कहा जाता है।

विद्यार्थी समाधान के अपने निष्कर्ष के साथ संबंधित कंपनी के सीआईओ-एमडी के साथ भी संपर्क में रहते हैं ताकि विद्यार्थी को रियल टाइम में होने वाली चीजों का अहसास रहे। हमारी केस स्टडी की यह प्रणाली इतनी पुरानी है कि अब तो संस्थान के पास भारत की सबसे बड़ी केस स्टडी लायब्रेरी बन गई है। इनमें से हम कई केस स्टडी हाॅवर्ड बिजनेस स्कूल संग साझा करते हैं। संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स भी इंडस्ट्री से संपर्क-संवाद रखते हैं और खुद भी केस स्टडी लिखते हैं।

देश में आईआईएम-ए ही इकलौता प्रबंधन संस्थान है, जिसमें फैकल्टी मेंबर्स को कौशल विकास-विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए उनकी पसंद के अनुसार हर तीन वर्ष के अंतराल पर एक बार अथवा हर वर्ष चार महीने का अवकाश दिया जाता है। इस अवधि में फैकल्टी विदेश जा कर अथवा इंडस्ट्री में काम कर नॉलेज को अपडेट कर नए आइडिया के साथ वापसी करते हैं। सीखने-सिखाने को प्रेरित करने, अवसर देने की हमारी इसी संस्कृति का परिणाम है कि विद्यार्थी के साथ फैकल्टी भी समय से आगे विचार करने की प्रथा को मजबूत बनाते हैं।

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