• Hindi News
  • National
  • VG Siddhartha Net Worth | VG Siddhartha: How Coffee Chain Cafe Coffee Day Founder VG Siddhartha Rose and fell

कैफे कॉफी डे / सिद्धार्थ ने 26 साल में रेवेन्यू 300 गुना बढ़ाया, लेकिन अभी कंपनी पर 8000 करोड़ का कर्ज



वीजी सिद्धार्थ (फाइल)। वीजी सिद्धार्थ (फाइल)।
X
वीजी सिद्धार्थ (फाइल)।वीजी सिद्धार्थ (फाइल)।

  • सिद्धार्थ नकदी संकट से जूझ रहे थे, आयकर विभाग ने 2017 में 20 ठिकानों पर छापे मारे थे
  • बीते वित्त वर्ष में कॉफी डे ग्लोबल का रेवेन्यू 1814 करोड़ रुपए रहा, 1993 में 6 करोड़ रुपए था

Dainik Bhaskar

Jul 31, 2019, 02:30 PM IST

मेंगलुरु (कर्नाटक). कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ (60) का शव बुधवार सुबह मेंगलुरु की नेत्रावती नदी से मिला। वे सोमवार से लापता थे। सिद्धार्थ का 27 जुलाई का कथित पत्र सामने आया था, जिसमें इक्विटी पार्टनर और कर्जदाताओं के दबाव का जिक्र है।

 

सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में हुआ था। उनका परिवार 140 साल से कॉफी प्लांटेशन से जुड़ा हुआ है। 1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल (अमलगेमेटेड बीन कॉफी ट्रेडिंग कंपनी) की शुरुआत की थी। उस वक्त रेवेन्यू सिर्फ 6 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2017-18 में कैफे कॉफी-डे ग्लोबल का रेवेन्यू 1,777 करोड़ रुपए और 2018-19 में 1,814 करोड़ रुपए पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर कंपनी को 2,250 करोड़ रुपए के रेवेन्यू की उम्मीद है। लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी बिजनेस समेत अन्य कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे। 2 साल पहले उनके ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे भी पड़े थे।

सिद्धार्थ ने आईटी कंपनी माइंडट्री के शेयर 3000 करोड़ में बेचे, फिर भी कर्ज का दबाव था

  1. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉफी-डे ग्लोबल की होल्डिंग फर्म कॉफी-डे पर 8,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। सिद्धार्थ ने पिछले दिनों आईटी कंपनी माइंडट्री में अपनी पूरी 20.4% हिस्सेदारी 3000 करोड़ रुपए में लार्सन एंड टूब्रो को बेच दी थी।

  2. पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी समेत दूसरे कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे। आयकर विभाग ने 2017 में सिद्धार्थ के 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी। तब से मुश्किलें और बढ़ती गईं। यह सिलसिला इस साल भी जारी रहा। आयकर विभाग ने बकाया टैक्स की मांग करते हुए उनके शेयर अटैच कर दिए थे।

  3. 1996 में पहला कैफे खोला था, 23 साल में 200 शहरों में 1752 कैफे

    इस साल मार्च तक देश के 200 शहरों में कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के 1,752 कैफे थे। पहला कैफे 1996 में बेंगलुरु में ब्रिगेड रोड पर खोला था। भारत के बाहर पहला कैफे 2005 में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में खोला था। ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक और मलेशिया में भी कंपनी का बिजनेस है।

  4. सिद्धार्थ की कंपनी हर साल 28 हजार टन कॉफी एक्सपोर्ट करती है। 2 हजार टन देश में बेचती है। देशभर में कंपनी में करीब 30 हजार कर्मचारी हैं। सिद्धार्थ ने सीसीडी के अलावा हॉस्पिटेलिटी चेन भी शुरू की थी, जिसके तहत 7-स्टार रिसॉर्ट का संचालन किया जाता है।

  5. ग्लोबल कॉफी मार्केट में देश को नई पहचान दिलाई

    कर्नाटक में मुलयनगिरी पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे चिकमंगलूर की पहचान जायकेदार कॉफी के लिए है। कहा जाता है मशहूर सूफी संत बाबा बुदन यमन से कॉफी के 7 बीज लेकर आए थे और उनमें से एक चिकमंगलूर में फला-फूला। ‘कॉफी लैंड‘ चिकमंगलुर की कॉफी को नए प्रयोगों के साथ बतौर एक ब्रांड स्थापित करने का श्रेय वीजी सिद्धार्थ को जाता है। कर्नाटक पूर्व मुख्यमंत्री एमएस कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ ने दो दशक की मेहनत के बाद भारत को दुनिया के मशहूर कॉफी दिग्गजों से टक्कर लेने में सक्षम बना दिया।

  6. 10 साल फाइनेंस, शेयर मार्केट में लगाए, लेकिन कॉफी के बिजनेस से पहचान मिली

    सिद्धार्थ ने कॉफी बिजनेस में करिअर बनाने के बारे कभी नहीं सोचा था। मेंगलुरु यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद उन्होंने अपने पिता से कहा कि कुछ नया करना चाहते हैं। उनका मन फाइनेंस सेक्टर में था। पिता ने जबरदस्ती नहीं की और सालाना दस लाख की आय का आधा हिस्सा सिद्धार्थ को देते हुए कहा कि तुम्हारे पास दो साल हैं। कुछ बनकर आओ नहीं तो अपने कारोबार से जुड़ना अंतिम फैसला होगा। सिद्धार्थ ने पैसा लिया लेकिन खर्च करने की बजाय निवेश करने का फैसला किया।

  7. 1982 में उन्होंने मेंगलुरु से मुम्बई की बस पकड़ी। उनके दिमाग में शेयर मार्केट में उस वक्त के दिग्गज महेंद्र कम्पानी का नाम था। कम्पानी के बारे में सिद्धार्थ ने बहुत पढ़-सुन रखा था। पहली बार बिना किसी जान-पहचान के मुम्बई के फोर्ट इलाके में पहुंचे सिद्धार्थ ने 120 रुपए का कमरा किराए पर लिया। एक दिन कम्पानी के जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के ऑफिस पहुंच गए। सिद्धार्थ ने इंटरव्यू में कहा, ‘मैं बिना किसी अपॉइंटमेंट के आया था, पहली बार लिफ्ट में चढ़ा था और पहली बार इतना बड़ा ऑफिस देखा था।‘ कम्पानी ने उन्हें मैनजमेंट इंटर्न के रूप में काम करने का मौका दिया। सिद्धार्थ ने वहां दो साल तक काम किया।

  8. 1984 में सिद्धार्थ ने पिता की सीख को याद करते हुए चिकमंगलूर लौटना सही समझा। यही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट भी रहा। पिता के दिए पांच लाख में से उन्होंने 30,000 रुपए में सिवान सिक्योरिटीज नाम की एक छोटी सी कम्पनी पर दांव लगाया। अपनी समझ से उन्होंने इसे सफल निवेश और ब्रोकिंग फर्म बना दिया था। इसके बाद करीब दस साल तक उन्होंने फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और शेयर मार्केट में लगाने के बाद यही पाया कि असली सोना तो उनकी पुश्‍तैनी विरासत कॉफी है। 1993 में उन्होंने अमलगेटेड बीन कंपनी (एबीसी) की स्थापना की।

  9. उन्होंने 5 साल पहले एक इंटरव्यू में सफलता का मंत्र बताया था कि- कुछ कर गुजरना है तो संकल्प के साथ करो और आसानी से हार मत मानो। लेकिन, 3 दिन पहले स्टाफ के लिखे कथित पत्र में उन्होंने लिखा कि- बेहतर से बेहतर प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में नाकाम रहा। मैंने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन अब और दबाव नहीं झेल सकता।

     

    DBApp

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना