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मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी:पति-पत्नी महसूस करें कि ‘अहंकार’ और ‘असहिष्णुता’ जूते की तरह, ये घर में प्रवेश करते हैं तो उनका जीवन नारकीय होता है

चेन्नई2 महीने पहले
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हाईकोर्ट : दुर्भाग्य से पति के पास पत्नी पर कार्रवाई के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम जैसा कानून नहीं - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट : दुर्भाग्य से पति के पास पत्नी पर कार्रवाई के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम जैसा कानून नहीं

‘दुर्भाग्य से पति के पास पत्नी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम जैसा कानून नहीं है। इस मामले में साफ है कि सिर्फ पति को परेशान करने के लिए पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है।’ मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एस. वैद्यनाथन ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में मंगलवार को यह टिप्पणी की।

जस्टिस वैद्यनाथन ने आगे नसीहत देते हुए कहा, ‘वर्तमान पीढ़ी को समझना होगा कि शादी एक संस्कार है। यह कोई अनुबंध नहीं। बेशक, घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 लागू होने के बाद ‘संस्कार’ का अस्तित्व नहीं बचा है। यह कानून लिव-इन संबंधों (बिना शादी साथ रहना) को मंजूरी देता है। फिर भी पति और पत्नी को यह महसूस करना चाहिए कि ‘अहंकार’ और ‘असहिष्णुता’ जूते की तरह हैं। इसलिए इन्हें घर से बाहर ही छोड़ देना चाहिए।

अगर ये घर में प्रवेश करते हैं तो न सिर्फ उनका जीवन नारकीय होता है, बल्कि बच्चों को भी ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।’ इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ित पति के पक्ष में फैसला दे दिया। हाईकोर्ट ने याची पति को न सिर्फ 15 दिन में नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया। बल्कि सरकार को निलंबन की समयावधि के लिए उसका पूरा पैसा देने का भी निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के मुताबिक पीड़ित व्यक्ति के निलंबन का आदेश गलत: जस्टिस वैद्यनाथन ने कहा कि ऐसा लगता है, प्रतिवादी (शिकायतकर्ता की पत्नी) ने वादी (पति) को बेवजह परेशान करने के उद्देश्य से शिकायत की है। दोनों के तलाक का मामला कुटुंब न्यायालय में चल रहा था। उसमें पति के पक्ष में फैसला होने की संभावना थी।

कुटुंब न्यायालय तलाक मंजूर करने वाला था। लेकिन इसके चार दिन पहले ही पत्नी ने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगा दिया। इस बीच, कुटुंब न्यायालय ने तलाक का आदेश देकर मामला खत्म कर दिया। लेकिन उसके विभाग ने पत्नी के घरेलू हिंसा के आरोपों को सही मानकर पति को निलंबित कर दिया। विभाग द्वारा ऐसा किए जाने की कोई वजह नहीं थी। वह आदेश गलत था।

पति ने तलाक मांगा था, इस बीच पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत कर दी

दरअसल, पत्नी की प्रताड़ना से परेशान पति ने कुटुंब न्यायालय में तलाक की अर्जी लगाई थी। वहां से उसके पक्ष में फैसला हुआ। इसी बीच पत्नी ने पति पर घरेलू हिंसा के आरोप लगा दिए। इस आधार पर पति को नौकरी से निलंबित कर दिया गया। इस निलंबन आदेश के खिलाफ संबंधित व्यक्ति ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की थी।

इस मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की पत्नी को भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का आदेश दिया। लेकिन हाईकोर्ट के नोटिस के बावजूद वह कोर्ट में पेश नहीं हुई। इससे भी हाईकोर्ट को पति के पक्ष में आदेश जारी करने का आधार मिला। पत्नी के आरोपों के सिलसिले में हाईकोर्ट ने कहा कि इनकी सत्यता की परख उचित फोरम पर की जाएगी।

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