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दिल्ली / डोरेमॉन से मिला आइडिया 19 की उम्र में करोड़पति



Idea Found from Dormone, millionaire at the age of 19
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Idea Found from Dormone, millionaire at the age of 19

  • फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल जुड़वां भाइयों की कहानी
  • भारद्वाज ब्रदर्स ने 8वीं क्लास से ही शुरू कर दी थी रिसर्च प्रोजेक्ट कंपनी

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 05:38 AM IST

अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली. यशराज और युवराज भारद्वाज। उम्र केवल 19 साल। इन जुड़वां भाइयों को फोर्ब्स मैगजीन ने ‘30 अंडर 30-एशिया’ लिस्ट में शामिल किया है। भारद्वाज ब्रदर्स के नाम से पहचाने जाने वाले इन भाइयों की कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है। ये पद्मश्री सम्मान 2018 के लिए भी नॉमिनेट हैं। इनकी उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त में से ये चंद उपलब्धियां हैं। भारद्वाज ब्रदर्स ने करीब पांच साल पहले जेनिथ वाइपर्स नाम से स्टार्टअप शुरू किया था। 

 

 

साइंस रिसर्च पर अाधारित इन कंपनियों ने सिर्फ पांच साल में करोड़ों का टर्नओवर कर लिया। खास बात यह है कि इन्हें इस कंपनी का आइडिया डोरेमॉन और डिस्कवरी चैनल देखकर आया था। डोरेमॉन में दिखाए जाने वाले भविष्य के गैजेट ने इनोवेशन और डिस्कवरी चैनल पर दिखाए जाने वाले रिसर्च प्रोग्राम्स ने इन्हें प्रेरणा दी। भारद्वाज ब्रदर्स की रुचि बचपन में खेल में थी, विशेषतौर पर क्रिकेट में। दोनों का अंडर 14 भारतीय क्रिकेट टीम में चयन भी हो गया था।

 

लेकिन आर्थिक तंगी के चलते, पिता के कहने पर दोनों ने क्रिकेट छोड़ दिया। बिजनेस आइडिया आने पर रिसर्च प्रोजेक्टस के काम में लग गए। पिछले साल ही दोनों भाइयों ने 12वीं पास की है और वर्तमान में बीटेक फर्स्ट ईयर के छात्र हैं। यशराज दिल्ली में और युवराज दुबई में कंपनी का काम संभालते हैं। कम उम्र में शोध में करियर बनाने के कारण उन्होंने अपनी कंपनी की टैग लाइन 

 

रिसर्च विदआउट डिग्री रखी है। इनकी टीम के 450 सदस्यों में 15 से 22 साल उम्र के करीब सौ शोधार्थी हैं। इतनी कम उम्र में भारद्वाज ब्रदर्स 20 देशों के दौरे कर चुके हैं। भारत सरकार ने 2016 में इन्हें विज्ञान क्षेत्र के सर्वोच्च पुरस्कार करमवीर चक्र से सम्मानित किया। इन्हें आधा दर्जन से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय अवार्ड भी मिल चुके हैं।

 

ये वर्तमान में जल संसाधन मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार, कोच्चि प्रशासन के कई रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मानव संसाधन मंत्रालय की इनोवेशन सेल इनके साथ कई इनोवेशन संबधित वर्कशॉप की योजना बना रही है। साथ ही देश-विदेश में इन्होंने करोड़ों के एएमओयू भी साइन किए हैं। दोनों भाइयों के नाम विश्व स्तरीय 15 पेटेंट हैं।


इस सफलता के पहले दोनों भाइयों ने काफी संघर्ष भरे दिन देखे हैं। भारद्वाज ब्रदर्स के पिता राजेश डीडीए में कॉन्ट्रेक्टर थे। 2011 में जब ये दोनों पांचवीं क्लास में थे तब पिता को व्यापार में बहुत नुकसान हुआ। पैसों की तंगी के चलते पिता ने दोनों को क्रिकेट खेलने से मना कर दिया और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। यशराज ने कहा कि परिस्थितियों के चलते उस समय हमारे पिता का फैसला सही था। दाेनों भाइयों ने कक्षा छठवीं में ठान लिया था कि हम अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद निकालेंगे। 


2013 में जब हम कक्षा सातवीं में पहुंचे तब हमने स्कूलों में बनने वाले दूसरे बच्चों के साइंस प्रोजेक्ट बनाने शुरू किए। शुरू में यूट्यूब देखकर ये प्रोजेक्ट बनाए। पैसे कम होने के चलते हम लोग दिल्ली की नई सड़क से किताबें लाते थे, जहां किलो के भाव सेकंड हैंड किताबें मिलती हैं। बालिग न होने के चलते कक्षा आठवीं में भारद्वाज बंधुओं ने अपने पिता के नाम पर जेनिथ वाइपर्स कंपनी खाेली। ये लोग सातवीं कक्षा में हर माह नौ से दस हजार रुपए कमाने लगे थे। उसके बाद स्कूल की तरफ से कई प्रोजेक्ट मिले। जिनसे अच्छी कमाई होने लगी। बालिग होने पर कंपनी इनके नाम पर हो गई। साथ ही इन्होंने आईडेक्स सॉल्यूशन्स नाम की कंपनी भी शुरू की।


युवराज यश से सिर्फ पांच मिनट बड़े हैं। शुरू से ही दाेनों की विज्ञान और इनोवेशन में गहरी रुचि थी। यशराज बताते हैं कि रिसर्च पर काम करने के कारण हमारी जिज्ञासा बहुत बढ़ गई थी। हम अपनी कक्षा से आगे के सवाल पूछने लगे थे, इसलिए अध्यापक हमें पागल कहते थे और पूरी क्लास हमें जोकर कहती थी। कमाई के लिए हम आठ घंटे पढ़ते थे और आठ घंटे साइंस प्रोजेक्ट बनाते थे। खेलने का वक्त नहीं मिला इसलिए हमारे ज्यादा दोस्त नहीं बन पाए।
 

 

 

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