क्योंकि हर एक वोट कीमती / गिर के जंगल में अकेला शख्स, उसके लिए भी पोलिंग बूथ



महंत भारतदास गुरु दर्शन महंत भारतदास गुरु दर्शन
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महंत भारतदास गुरु दर्शनमहंत भारतदास गुरु दर्शन

  • चुनाव आयोग के कर्मचारियों से जुड़े वो किस्से जो हर एक वोट का महत्व दिखाते हैं

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 05:25 AM IST

एक वोट सरकार बना भी सकता है, गिरा भी सकता है। लेकिन इसी एक वोट को पाने के लिए चुनाव आयोग कितनी मशक्कत करता है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि गिर के जंगल में रहने वाले सिर्फ एक शख्स का वोट पाने के लिए हर चुनाव में वहां पोलिंग बूथ बनाया जाता है। जैसी तैयारियां हजारों मतदाताओं वाले बूथ के लिए होती हैं, उसी स्तर पर तैयारियां उस एक वोटर वाले बूथ के लिए भी होती है। जानिए ऐसे ही रोचक किस्से, जब चुनाव कर्मचारियों ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जंगल, पहाड़, नदियों को भी हरा दिया।

 

यहां एशियाई शेरों के अलावा सिर्फ यही एक शख्स :

गुजरात के बानेज गांव में स्थित गिर का जंगल। यह दो वजहों से मशहूर है। पहली- यह एशियाई शेरों का अकेला जंगल है। दूसरी वजह हैं- महंत भारतदास गुरु दर्शन। जो बानेज गांव के अकेले वोटर हैं। चूंकि महंत बनेश्वर महादेव मंदिर में पुजारी हैं। इसलिए वहीं रहते हैं। इनका वोट लेने के लिए हर पांच साल में चुनाव आयोग गिर के जंगल में पहुंचता है।  चुनाव आयोग 2002 से यहां पोलिंग बूथ बनाता आ रहा है। इस पोलिंग बूथ की अहमियत इसलिए भी है, क्योंकि अगर यहां बूथ न बनाया जाए तो भारतदास को वोट डालने के लिए कम से कम 20 किमी दूर जाना पड़ेगा।

 

हिमाचल प्रदेश का हिक्किम पोलिंग बूथ। देश ही नहीं, दुनिया का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित पोलिंग बूथ है। 15,500 फीट की ऊंचाई वाले इस बूथ पर तीन गांवों के करीब साढ़े तीन सौ वोटर वोट डालने आते हैं।

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अरुणाचल में 46 किमी तक पैदल चलते हैं कर्मचारी :

  • अरुणाचल का डोपोवा पोलिंग बूथ। 2014 में यहां पहुंचने के लिए पोलिंग टीम को तीन दिन में 46 किमी का पैदल सफर करना पड़ा।
  • इसी तरह अरुणाचल का हुकानी पोलिंग बूथ, जहां 22 वोटर थे वहां तक पहुंचने के लिए पोलिंग टीम को 22 किमी का पैदल सफर करना पड़ा।
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