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नागपुर में क्यों बढ़ा कोरोना:दिसंबर-जनवरी में लोगों ने खूब पार्टियां कीं, जिनके घरों में पॉजिटिव मरीज वे बाहर घूम रहे; पहली लहर से प्रशासन ने नहीं लिया सबक

नागपुर2 महीने पहलेलेखक: विनोद यादव

देश में कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद बुधवार को पहली बार 24 घंटे में 1 लाख 85 हजार नए मरीज मिले। महाराष्ट्र में भी दूसरी बार एक दिन में 60 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हुए। covid19india के मुताबिक, महाराष्ट्र में 10 लाख लोगों पर 4854 एक्टिव मरीज हैं, जबकि मौतों का आंकड़ा 479 है। वहीं राज्य की उप राजधानी नागपुर में 10 लाख लोगों पर एक्टिव मरीज दोगुने से भी ज्यादा हैं। मौतों का आंकड़ा भी दोगुने के करीब है।

हालांकि नागपुर में मरीजों के डबलिंग रेट में कमी आई है। दैनिक भास्कर की टीम पिछले चार दिनों से महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा संक्रमित शहरों की रिपोर्ट आप तक पहुंचा रही है। अब तक हम आपको पुणे, नासिक और औरंगाबाद की जमीनी हकीकत से वाकिफ करा चुके हैं। आज पढ़ें नागपुर की ग्राउंड रिपोर्ट...

नागपुर को मध्य भारत का मेडिकल हब भी कहा जाता है। यहां मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी मरीज अपना इलाज करवाने आते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण ने यहां के अस्पतालों की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। अस्पतालों में बेड नहीं है। मरीज उनके गेट पर या फुटपाथ पर पड़े हुए हैं। वे इंतजार में हैं, कब बेड खाली हो तो उन्हें इलाज मिले।

पहले लोग इंसानों को बचाने की दुआ करते थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि बेड और इलाज के लिए लोग दुआएं मांग रहे हैं। नागपुर के अस्पतालों की हकीकत बयां करते ऐसे ही 3 मंजर जिसे देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए..

पहला दृश्य: सरकारी कोविड अस्पताल (नागपुर)
समय: सुबह 7 बजे

मां 3 घंटे से एंबुलेंस में सांसे गिन रही, बेटा बेड के लिए मिन्नतें करता रहा
नागपुर के दिघोरी नाका इलाके में रहने वाले रोशन चौधरी की बुजुर्ग मां कोरोना पॉजिटिव हैं। दैनिक भास्कर की टीम को रोशन नागपुर सरकारी अस्पताल के बाहर मिला। उसने कहा, मैं तीन-चार दिन से अस्पतालों का चक्कर लगा रहा हूं। कहीं भी बेड नहीं मिल रहा है।
अभी करीब तीन घंटे से मैं सरकारी कोविड अस्पताल के बाहर खड़ा हूं। कोरोना पॉजिटिव मेरी मां वहां एंबुलेंस में है। इस अस्पताल में भी बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। यह कहते हुए रोशन अपनी मां की सेहत को लेकर रुआंसा हो जाता है।
उसका गला भारी हो जाता है, लेकिन उसके दर्द को समझने वाला और आंसुओं को पोछने वाला वहां कोई नहीं है, क्योंकि नागपुर के सरकारी कोविड अस्पताल के बाहर मिलने वाले सभी लोगों का दर्द कमोबेश एक जैसा है।

दूसरा दृश्य: नागपुर मेडिकल कॉलेज (NGC)
समय: सुबह 9 बजे
हालत बिगड़ी तो अस्पताल ने जबरदस्ती मरीज को बाहर निकाल दिया, कहा-सरकारी अस्पताल ले जाओ
वर्ना इनकी मौत हो जाएगी। इतना ही नहीं, उस अस्पताल ने हमसे जबरन डिक्लेरेशन फॉर्म पर साइन भी कराया।

तीसमय- सुबह 10 बजे
मां को ऑक्सीजन की कमी थी, रिपोर्ट निगेटिव थी, पर डॉक्टरों ने कोरोना वार्ड में डाल दिया
रही है।

दूसरी वेव में प्रशासन ने व्यवस्था में ढिलाई बरती, लोग भी बेफिक्र हो गए
वी-सेवन केयर फाउंडेशन की संस्थापक नीरजा पठानिया बताती हैं कि जब एक बार शहर भुगत चुका है कि लोग ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की कमी के कारण मर रहे हैं, तो हमें कोविड के इलाज की व्यवस्था और क्षमता को दो-तीन गुना तक बढ़ा देना चाहिए था।
यह समझा जा सकता है कि पहली वेव में अधिकारियों व लोगों को सही ढंग से पता ही नहीं था कि कोरोना वायरस से बचाव कैसे किया जाए। तब जानकारी और जागरूकता दोनों की कमी थी, लेकिन दूसरे वेव में जहां प्रशासन ने व्यवस्था में ढिलाई बरती, वहीं लोग भी बेफिक्र हो गए।

'आ बैल मुझे मार' वाली स्थिति
नीरजा बताती हैं, इस बार नागपुर में यदि कोई पॉजिटिव मिल रहा है तो उसके संपर्क में आए कितने लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हो रही है? इसका कोई अता-पता नहीं चल रहा है। मैं नागपुर की जिस कॉलोनी में रहती हूं। वह बहुत बड़ी कॉलोनी है।
पहले कोई पॉजिटिव पाया जाता था तो संपर्क में आए कुछ लोगों की ट्रेसिंग होती थी, लेकिन अब यदि कोई पॉजिटिव व्यक्ति होम क्वारैंटाइन पाया जाता है तो उसके परिवार के लोग आइसोलेशन वार्ड में जाने के बदले बाजार में सब्जी खरीदते या फिर सार्वजनिक स्थानों पर देखे जाते हैं।
इसलिए मेरा कहना है कि नागपुर में केस बढ़ने के पीछे ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति है। पॉश इलाकों में केस अधिक होने की मुख्य वजह दिसंबर व जनवरी में घरों में हुई पार्टियां हैं। लोगों ने चोरी छुपे खूब पार्टियां की हैं।

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नागपुर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अविनाश गावंडे ने बताया कि नागपुर मेडिकल हब है। यहां मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से सटे जिलों से रोज करीब 50 हजार से 1 लाख लोग आते-जाते हैं। ये भी यहीं टेस्ट करवा लेते हैं, इसलिए पॉजिटिव रेट में इजाफा हो रहा है।

नागपुर में आखिर क्यों बढ़ रहा संक्रमण, जानिए 3 वजह..
पहली वजह: नए स्ट्रेन के अनुसार इलाज का प्रोटोकॉल नहीं बना
नागपुर में कोरोना के नए स्ट्रेन की वजह से संक्रमण तेजी से फैला। जिले के प्रभारी मंत्री नितिन राउत का दावा है कि इस स्ट्रेन के इलाज के लिए जो मेडिकल प्रोटोकॉल बनने चाहिए थे, वे समय रहते बने ही नहीं।
राज्य सरकार ने नए स्ट्रेन के सैंपल केंद्र सरकार की संस्था ICMR के पास भेजे थे, लेकिन नए स्ट्रेन की संक्रमण क्षमता सहित अन्य जानकारी देने में केंद्रीय एजेंसी ने डेढ़ महीना ले लिया। मंत्री का दावा है कि नागपुर सहित विदर्भ के राज्यों में कोरोना बढ़ने के पीछे की यह पहली व प्रमुख वजह है।

दूसरी वजह: मरीज क्वारैंटाइन न होकर बाहर घूमते रहे
मेडिकल एक्सपर्ट्स का दावा है कि अधिकांश एसिम्टोमैटिक कोरोना मरीजों को होम क्वारैंटाइन किया गया था। ऐसे लोगों को एहतियात बरतनी चाहिए थी, लेकिन ऐसे पेशेंट क्वारैंटाइन रहने के बजाय बाहर निकलते थे और घर के भीतर भी घूमते थे। इस तरह इन एसिम्टोमैटिक कोरोना मरीजों ने जाने-अनजाने में बहुतों को संक्रमित किया है।

तीसरी वजह: पहली लहर में पूरी व्यवस्था झोंकी, दूसरी लहर में चरमरा गई
कोरोना की पहली लहर में पूरा स्वास्थ्य महकमा इलाज और व्यवस्थाओं में लगा रहा। तब की व्यवस्था मसलन ऑक्सीजन-वेंटिलेटर बेड्स, जरूरी दवाइयां और मैन पावर को झोंक दिया गया। बीच में संक्रमण कम होने के बाद जब दूसरी लहर आई तो दोबारा इन व्यवस्थाओं को पुख्ता करने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा।
पहली लहर में ऑक्सीजन बेड्स हड़बड़ी में बनाए गए थे, बीच के दिनों में ऐसे बेड के ऑक्सीजन लाइन की मरम्मत तक नहीं हो पाई। और अब अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। मेडिकल फैकल्टी के टेक्निकल लोग पहले ही एग्जॉस्ट हो चुके हैं।
कई स्टाफ मेंबर कोरोना संक्रमित तक हो गए थे। जिसकी वजह से ये कर्मचारी कमजोरी महसूस कर रहे हैं। इस वजह से जितने मैनपॉवर का सपोर्ट चाहिए था, वह वक्त पर नहीं मिल पाया। अभी सप्ताह भर से सरकार की ओर से होम्योपैथ, आयुर्वेद सभी फील्ड के लोगों को एक साथ लाकर मदद लेने की कोशिश शुरू की गई है। बेड्स, दवाई और अन्य जरूरी चीजों को भी बढ़ाया जा रहा है।

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