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  • In Kalaiyur village in Tamil Nadu, every male expert is a cook, VIP and film star is in his hands

मंडे पॉजिटिव / तमिलनाडु के कलईयुर गांव में हर पुरुष एक्सपर्ट कुक, फिल्म स्टार इनके हाथ के बने खाने के मुरीद

आसपास के गांवों में कलईयुर सबसे स्वच्छ है। प्रवेश द्वार पर देवताआें की मूर्तियां लगी हैं। आसपास के गांवों में कलईयुर सबसे स्वच्छ है। प्रवेश द्वार पर देवताआें की मूर्तियां लगी हैं।
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आसपास के गांवों में कलईयुर सबसे स्वच्छ है। प्रवेश द्वार पर देवताआें की मूर्तियां लगी हैं।आसपास के गांवों में कलईयुर सबसे स्वच्छ है। प्रवेश द्वार पर देवताआें की मूर्तियां लगी हैं।

  • एक हुनर ने मछली पकड़ने वाले समुदाय को दी दुनिया में पहचान, लाखों की कमाई कर रहे
  • कुक खाना बनाने में किसी यंत्र का इस्तेमाल नहीं करते, सबकुछ हाथ से बनाते हैं

दैनिक भास्कर

Nov 25, 2019, 03:19 PM IST

मदुरै (मनीषा भल्ला). मदुरै से 125 किमी दूर रामेश्वरम के रास्ते में गांव है- कलईयुर। तमिल में कलई के मायने हैं ‘कला’ और युर यानी ‘गांव’। अपने नाम को सार्थक करता रामनाथपुरम् जिले का यह गांव पाक कला के लिए दुनियाभर में मशहूर है। गांव का हर पुरुष एक्सपर्ट कुक है।

दो हजार की आबादी वाले गांव के 300 से अधिक कुक देश ही नहीं दुनियाभर के बड़े होटलों और रेस्त्रां में काम कर रहे हैं। बाकी पुरुष शादियों-पार्टियों में लाेगों को अपने भोजन का मुरीद बना रहे हैं। इनकी आय 40 हजार से शुरू होकर लाखों रु. तक जाती है। गांव के सबसे बुजुर्ग कुक 73 वर्षीय मुरुवेल बताते हैं कि इस काम को पहचान 500 साल पहले मिलना शुरू हुई थी।

इस कला ने मछलियां पकड़ने वाले हमारे वानियार समाज को ऊंची जाति के लोगों की रसाेई में जगह दिलवाई है। सबसे पहले संपन्न वर्ग रेडियार ने हमें कुक रखना शुरू किया था। तब से पीढ़ी-दर-पीढ़ी गांव में हर बच्चा यह काम सीख रहा है। बुजुर्गों की देखरेख में 12 साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू हो जाती है, जो 10 साल तक चलती है।

24 घंटे में 617 डिश बनाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके सेलिब्रिटी शेफ डॉ. दामू बताते हैं कि कलईयुर के शेफ सी फूड और अपने सीक्रेट मसालों के लिए मशहूर हैं। इनके जैसा करुवर टुकु (सूखी मछली) और चनाकुन्नी (मछली-चावल), प्याज और हरी मिर्च की चटनी दुनिया में कोई नहीं बना सकता। खाना बनाने में ये किसी यंत्र का उपयोग नहीं करते। हर काम हाथ से। वीआईपी और फिल्म एक्टर, फिर भले वो रजनीकांत हो या कमल हसन, कलईयुर के शेफ के हाथों का बना खाना जरूर चखना चाहता है।

 यहां के शेफ ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर, लंदन, और दुबई तक के रेस्त्रां में नौकरियां कर रहे हैं। अगर आप कलईयुर के शेफ हैं तो अच्छे वेतन पर नौकरी मिलना तय है। हिस्ट्री चैनल भी गांव के बारे में शो कर चुका है। खाने के शौकीन, ऑफबीट ट्रैवलर और रेसिपी पर शोध करने वालों का इस गांव में आना-जाना लगा रहता है।

गांव के हर युवा के पास रोजगार, साक्षरता में भी आगे 

एआईएडीएमके नेता और पूर्व मंत्री अनवर राजा बताते हैं कि 55 देशों में 2.5 करोड़ तमिल रहते हैं और जहां तमिल हैं, वहां पर कलईयुर के शेफ भी हैं। इस हुनर के ही कारण कलईयुर गांव में हायर सेकंडरी तक स्कूल है। साक्षरता में गांव जिले में दूसरे नंबर पर है। गांव के हर युवा के पास रोजगार है। 

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