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महिलाओं को कमांड पोस्ट का मुद्दा / सेना ने कहा- महिलाओं को उचित भूमिका दी जाएगी, सेवा की शर्तें पूरी करने पर पेंशन के भी पक्षधर

-फाइल फोटो -फाइल फोटो
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  • नौसेना में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन दिए जाने के फैसले के खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई
  • सेना में महिलाओं को उचित भूमिका दिए जाने पर तर्क दिया था- सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं
  • नौसेना और वायुसेना में भी महिलाओं को कमांड पोस्ट दिए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को विचार करेगा

दैनिक भास्कर

Feb 10, 2020, 04:52 PM IST

नई दिल्ली. महिलाओं को कमांड पोस्ट दिए जाने के मुद्दे पर सोमवार को सेना ने स्पष्टीकरण िदया। सेना के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि महिला अफसरों को वह सभी उचित भूमिकाएं दी जाएंगी, जो संस्थान के नजरिए से सही होंगी। पिछले हफ्ते कमांड पोस्ट दिए जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि केंद्र को इस मामले को एकदम अलग नजरिए से देखना चाहिए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं को स्थाई कमीशन दिए जाने के मुद्दे पर 5 फरवरी को सुनवाई हुई थी। रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के मार्च 2010 के उस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने नौसेना को अपनी सभी महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया था। इस मामले में कुछ महिला अफसरों ने भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम ने कहा था कि हम नौसेना और वायुसेना में महिलाओं को कमांड पोस्ट दिए जाने के मुद्दे पर भी विचार करेंगे।

जो भी फैसले लिए, वह संस्थान के हित में लिए गए- सेना
आर्मी सूत्रों ने बताया कि आर्मी उन महिला अफसरों को पेंशन देने की भी पक्षधर है, जिन्होंने अपनी सेवा की शर्तों को पूरा किया है। आर्मी में विभिन्न भूमिकाओं में महिलाओं को शामिल किए जाने के लिए जो भी फैसले लिए गए हैं, वह संस्थान और कर्मचारियों के बेहतर हित में लिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- केंद्र को नजरिया बदलने की जरूरत

इस मामले पर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि केंद्र को प्रशासनिक इच्छा और नजरिया बदलने की जरूरत है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अजय रस्तोगी महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन दिए जाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इससे पहले केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि भारतीय सेना में यूनिट पूरी तरह पुरुषों की हैं और पुरुष सिपाही महिला अधिकारियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

केंद्र ने कहा- रिपोर्ट में चीजों को अलग नजरिए से पेश किया गया
तुषार मेहता ने बेंच के सामने यह स्पष्ट किया था कि हम किसी भी तरह से लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं कर रहे हैं। और, रिपोर्ट में चीजों को अलग नजरिए से पेश किया गया है। इस पर बेंच ने भी कहा कि रिपोर्ट में जिन मुद्दों का जिक्र किया गया है, वह बहस का हिस्सा नहीं हैं। इस पर तुषार मेहता ने कहा था कि सरकार ने कभी ऐसा नहीं जाहिर किया कि पुरुष अफसर महिला अफसरों से आदेश नहीं ले सकते हैं। महिलाएं न केवल पुरुषों की बराबरी कर सकती हैं, बल्कि वे उनसे बहुत आगे भी जा सकती हैं।

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