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गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स से हटीं भारत-चीन सेनाएं:16वीं कोर कमांडर बैठक में बनी थी सहमति, पूर्वी लद्दाख में 2020 की झड़प के बाद बढ़ा था तनाव

नई दिल्ली3 महीने पहले

उज्बेकिस्तान में 15-16 सितंबर को होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के सालाना शिखर सम्मेलन के 3 दिन पहले मंगलवार को भारत-चीन सीमा से अच्छी खबर आई। पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स- 15 क्षेत्र से भारत और चीन की सेनाएं पूरी तरह से हट गईं।

सूत्रों के अनुसार, यहां अस्थाई निर्माण और बंकर तोड़ दिए गए हैं। इस बात की पुष्टि दोनो देशों के लोकल कमांडरों ने जमीनी स्तर पर जायजा लेने के बाद की। दोनों देशों की सेनाओं ने चरणबद्ध तरीके से इस क्षेत्र से हटने का काम पूरा कर लिया है। दोनों देशों की सेनाएं अब अप्रैल 2020 वाली जगह पर पहुंच गई हैं। हालांकि, सीमा पर करीब 2 साल पहले हुए तनाव के बाद अभी भी दोनों देशों के 50 हजार से ज्यादा सैनिकों का जमावड़ा बना हुआ है।

कोर कमांडर बैठक में बनी थी सहमति
सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया 8 सितंबर को कोर कमांडर स्तर के 16वें दौर के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के बाद शुरू हुई थी। इस दौरान दोनों देश गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र से सेनाओं की वापसी पर सहमत हुए थे। इसके साथ ही डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने की कोशिश जारी है। मई 2020 में जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ा था, तब से भारत-चीन ने अपने-अपने सैनिकों को पैट्रोलिंग पॉइंट-15 के पास तैनात किया था।

6 दिन की प्रोसेस और 5 फेज
कोर कमांडर स्तर की बैठक में यह तय हुआ था कि सीमा से पीछे हटने की प्रोसेस 8 सितंबर को सुबह 8:30 बजे शुरू होगी। 12 सितंबर तक पूरी हो जाएगी, लेकिन यह प्रोसेस पूरी तरह 13 सितंबर को खत्म हुई।
यह 6 दिनों की प्रोसेस पांच चरणों में पूरी होनी थी। इसमें चीन को आगे की तैयारी से रोकना, सेनाओं की वापसी, सीमा पर बने अस्थाई बंकर नष्ट करना, इलाके में किसी भी तरह की अन्य तैनाती को रोकना और जमीनी स्तर पर जायजा लेने के बाद घोषणा करना शामिल था।

सरकार के टॉप सोर्स के हवाले से बताया कि लोकल आर्मी कमांडर और अफसरों को निर्देश दिए गए थे कि वे हर मूवमेंट को वेरिफाई करें। साथ में यह भी कहा गया था कि यह प्रोसेस बेहद शांतिपूर्वक हो। किसी तरह का तनाव न बने।

अजीत डोभाल बनाए थे नजर
जब 8 सितंबर को दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हुई तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत-जापान 2+2 डायलॉग में शामिल होने टोक्यो गए थे। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कमान संभाली। वे नई दिल्ली से स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। साथ ही वे रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को हर जानकारी दे रहे थे।

उज्बेकिस्तान में जिनपिंग और मोदी की मुलाकात संभव
शंघाई सहयोग संगठन का सालाना शिखर सम्मेलन 15 से 16 सितंबर तक उज्बेकिस्तान में होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं।

क्या हुआ था गलवान घाटी में
अप्रैल-मई 2020 में चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में एक्सरसाइज के बहाने सैनिकों को जमा किया था। इसके बाद कई जगह पर घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं। भारत सरकार ने भी इस इलाके में चीन के बराबर संख्या में सैनिक तैनात कर दिए थे। हालात इतने खराब हो गए कि 4 दशक से ज्यादा वक्त बाद LAC पर गोलियां चलीं। इसी दौरान 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।