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गलवान झड़प के बाद ले. जनरल लेवल की बैठक / भारत ने चीन से कहा- पैंगोंग त्सो से सैनिकों को हटाएं, चीन ने माना- झड़प में उसके कमांडिंग ऑफिसर समेत 2 सैनिक मारे गए

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  • दोनों देशों के बीच मॉल्डो में लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की दूसरी बैठक सोमवार को 11 घंटे तक चली
  • सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे आज लेह का दौरा करेंगे, सीमा सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा करेंगे
  • 15 जून की रात गलवान में भारत-चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई, भारत के 20 जवान शहीद हुए थे

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 04:33 AM IST

नई दिल्ली. गलवान में हिंसक झड़प के बाद सोमवार को भारत और चीन के बीच मॉल्डो में लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की दूसरी मीटिंग 11 घंटे तक चली। यह बैठक सुबह 11.30 बजे शुरू होकर देर रात को खत्म हुई। भारत की ओर से मीटिंग में 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस बैठक में पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो इलाके से चीनी सैनिकों को हटाने की मांग की।

भारतीय अफसरों ने गलवान में हुई हिंसक झड़प पर नाराजगी जाहिर की। झड़प को चीन की सुनियोजित साजिश और क्रूर कृत्य बताया। भारत की मांग है कि चीन लद्दाख में अपने सैनिकों की पोजिशन अप्रैल की यथास्थिति पर लाए।

इसबीच, चीन की सेना ने पहली बार माना कि 15 जून को गलवान में हुई झड़प में उसके कमांडिंग ऑफिसर समेत 2 सैनिक मारे गए। हालांकि, रिपोर्ट्स में पहले चीन के 40 से ज्यादा जवानों की मौत का दावा किया जा चुका है। गलवान में चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर कंटीले तारों से हमला किया था, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए थे। 

आर्मी चीफ जनरल नरवणे लेह जाएंगे

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे मंगलवार को लेह का दौरा करेंगे। इस दौरान वे अफसरों से चीन के कमांडरों के साथ हुई बैठक की जानकारी लेंगे और इलाके की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करेंगे। इससे पहले आर्मी चीफ ने दिल्ली में सेना के टॉप कमांडर्स के साथ सीमा सुरक्षा को लेकर बैठक की।

त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस.जयशंकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ होने वाली त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक उस वक्त होने जा रही है, जब भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इस बीच खबर है कि दोनों ही देशों के बीच डिप्लोमेटिक लेवल पर भी इस मामले में बातचीत होने के प्रयास शुरू किए जा सकते हैं।

झड़प के पहले 3 मीटिंग हुईं
पहली
 : 6 जून
कहां हुई थी: चुशूल सेक्टर में चीन की सीमा में नियंत्रण रेखा से 20 किमी दूर स्थित मॉल्डो में हुई।
किस स्तर की बातचीत थी: लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की।
उसमें क्या चर्चा हुई: शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाकर रिश्ते आगे बढ़ाए जाएं।

दूसरी : 10 जून
कहां हुई: पूर्वी लद्दाख के पास भारतीय सीमा के अंदर।
किस स्तर की बातचीत हुई: मेजर जनरल स्तर की।
क्या चर्चा हुई: सीमा विवाद कैसे सुलझाया जाए और सैनिकों की संख्या कैसे कम की जाए।

तीसरी: 12 जून
कहां हुई: लोकेशन पता नहीं चल पाई।
किस स्तर की बातचीत हुई: मेजर जनरल स्तर की।
क्या चर्चा हुई: गालवान इलाके में 3 जगहों पर विवाद कैसे सुलझाया जाए।

15 जून के बाद भी चर्चाओं का दौर चला

भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच 3 बार मेजर जनरल स्तर बातचीत हुई। इसमें किस मुद्दे पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई। 

झड़प के बाद चीन का 5 बार दावा- गलवान घाटी हमारी

  • 19 जून को देर रात कहा- गलवान घाटी चीन का हिस्सा है और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएससी) से हमारी तरफ है। भारतीय सैनिक यहां पर जबरन रोड-ब्रिज बना रहे हैं।
  • 19 जून को ही कहा- सही क्या है और गलत क्या, यह एकदम साफ है। जो कुछ हुआ, उसकी पूरी जिम्मेदारी भारत की है।
  • 18 जून को कहा था- भारत के फ्रंटलाइन सैनिकों ने समझौता तोड़ा। एलएसी पार कर उकसाया और अफसरों-सैनिकों पर हमला किया। इसके बाद ही झड़प हुई और जानें गई।
  • 17 जून को कहा- गलवान घाटी की संप्रभुता हमेशा से चीन के हिस्से ही रही है। भारतीय सेना ने बॉर्डर प्रोटोकॉल तोड़ा।
  • 16 जून को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच रजामंदी बनी थी, लेकिन भारतीय जवानों ने इसे तोड़ दिया और बॉर्डर क्रॉस किया।

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