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करो-ना लॉकडाउन / चीन ने कोरोना का पहला केस सामने आने के 24 दिन बाद और इटली ने 39 दिन बाद लॉकडाउन किया, भारत में 50 दिन बाद भी नहीं

तस्वीर इटली के मिलान की है। यहां लोगों को हटाने के लिए सेना तैनात की गई है। तस्वीर इटली के मिलान की है। यहां लोगों को हटाने के लिए सेना तैनात की गई है।
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तस्वीर इटली के मिलान की है। यहां लोगों को हटाने के लिए सेना तैनात की गई है।तस्वीर इटली के मिलान की है। यहां लोगों को हटाने के लिए सेना तैनात की गई है।

  • इटली में लॉकडाउन के बावजूद लोग पार्टी करते और घूमते रहे, इसलिए अब इस पॉलिसी का सख्ती से पालन कराने के लिए देश भर में आर्मी तैनात की गई
  • चीन ने लॉकडाउन लगाने के कुछ ही घंटे में सभी ट्रांसपोर्ट सेवाएं, स्कूल, दुकानें, ऑफिस पूरी तरह बंद कर दिए थे, लोगों को घरों से जबरदस्ती क्वारैंटाइन किया 

दैनिक भास्कर

Mar 22, 2020, 09:12 AM IST

मिलान/बीजिंग. कोरोनावायरस को हल्के में लेना इटली को भारी पड़ रहा है। पहले यहां सरकार ने देरी से 10 मार्च को लॉकडाउन घोषित किया। फिर इसका कड़ाई से पालन नहीं कराया गया। लॉकडाउन के बावूजद इटली के कई शहरों में लोग शॉपिंग करते रहे, रेस्टोरेंट्स में खाना खाते रहे, बार और क्लब में लेटनाइट पार्टी करते रहे, मार्केट में घूमते रहे। इसी के चलते इटली सरकार ने अब लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराने के लिए देश भर में आर्मी तैनात कर दी है, ताकि लोग घरों से बाहर न निकल सकें। 
इटली में कोरोना का पहला केस 31 जनवरी को रोम में सामने आया था। लेकिन देश में लॉकडाउन 10 मार्च को लागू किया गया। भारत में पहला मामला 31 जनवरी को केरल में आया था। इसके बाद से 50 दिन हो गए हैं, लेकिन लॉकडाउन नहीं लगाया गया है। 

चीन में रेड क्रास के वाइस प्रेसीडेंट सुन शुओपेंग इटली पहुंचे हुए हैं। उन्होंने मिलान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि यहां उसी तरह का माहौल है, जैसे दो महीने पहले कोरोनावायरस के केंद्र वुहान शहर में था। वुहान में एक महीने के लॉकडाउन के बाद हमने देखा था कि इससे कोरोना के केस में कमी आई। जबकि इटली का मिलान, जहां सबसे ज्यादा कोरोना फैला है, वहां लॉकडाउन बहुत ज्यादा कठोर नहीं है। यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस चल रही है, लोग लगातार एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। लोग होटलों में डिनर और पार्टी कर रहे हैं, वो भी बिना मास्क पहने हुए। मुझे नहीं पता कि यहां लोग क्या सोच रहे हैं। 

इटली के हालात: शुक्रवार को 24 घंटे में 627 लोगों की जान गई, यह एक दिन में सबसे ज्यादा

इटली में शुरुआती लापरवाहियों के नतीजे अब गंभीर हो चले हैं। शनिवार को 24 घंटे में 793 लोगों की कोरोना से मौतें हुईं। यह एक दिन में अब तक किसी भी देश में कोरोना से हुई सबसे ज्यादा मौतें हैं। इटली में अब तक 4,825 लोगों की जान जा चुकी है। देश में छह हजार नए केस आए हैं। देश में अब तक कोरोना के 53,578 केस आ चुके हैं। सबसे बुरी स्थिति इटली के उत्तरी क्षेत्र लोम्बार्डी की है, यहां पिछले महीने कोरोना का पहला मामला आया था। देखते ही देखते स्थिति खराब हो गई है। हजारों की संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए डॉक्टर कम पड़ गए हैं। ऐसे वक्त में चीन के मेडिकल एक्सपर्ट इटली पहुंचे हैं। वे कोरोना के इलाज और लॉकडाउन को सही तरीके से लागू करने में मदद करेंगे। 

तस्वीर 20 मार्च की है। मिलान में लॉकडाउन के बावजूद लोग सुपर मार्केट में खरीददारी कर रहे थे।

लोम्बार्डी में राज्य सरकार पहले लॉकडाउन में ढ़ील देने के पक्ष में थी, अब ज्यादा जवान मांग रही
इटली के लोम्बार्डी में भी लॉकडाउन का कड़ाई से पालन नहीं हुआ। यहां पहले राज्य सरकार ने खुद भी इसमें ढील बरतने को लेकर सहमत थी, लेकिन अब लोम्बार्डी क्षेत्र के प्रेसीडेंट ने कहा है कि आर्मी के इस्तेमाल से लोगों को जबरदस्ती घर में कैद करने में मदद मिलेगी। हालांकि यहां आर्मी के 114 जवान ही पूरे लोम्बार्डी क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। प्रेसीडेंट एट्टीलिओ फोनटाना ने कहा है कि यह संख्या बहुत कम है, लेकिन हम इसे लेकर पॉजिटिव हैं। पूरे क्षेत्र में सड़कों पर जवान गश्त करेंगे। 

लोगों को रोकने के लिए मिलान के डूओमो स्कॉवयर पर तैनात सेना का जवान।

लोम्बार्डी में स्थिति बहुत खराब है, आईसीयू में नहीं बची जगह, दूसरे शहर भेजे जा रहे मरीज
डैनिला कॉनफालोनिरी मिलान शहर में नर्स हैं। न्यूज एजेंसी रायटर्स से कहती हैं कि यहां स्थिति इतनी डरावनी है कि कोरोना से मरने वाले लोगों की गिनती नहीं हो पा रही है। हम तनाव और डर के बीच काम कर रहे हैं। दुर्भाग्यबस हम लोम्बार्डी में स्थिति को नियंत्रित करने में असफल हैं। यहां बहुत विकट स्थिति है और हम मृतकों की गिनती भी नहीं कर रहे हैं। इटली से बाहर रहने वाले इस खबर को देखें और ध्यान दें कि यहां स्थिति कितनी खराब है। यह अकल्पनीय है। 
लोम्बार्डी के बेरगामो स्थित एक हॉस्पिटल के डॉक्टर स्टेफानो मागंओनी सीएनएन से बातचीत में कहते हैं कि कोरोनावायरस ने इतनी भयानक तरीके से हिट किया है कि अब हमें आईसीयू मरीजों को देश के अन्य हिस्सों में भेजना पड़ रहा है, क्योंकि यहां अस्पतालों में जगह नहीं है। यहां पास स्थित ब्रेससीया शहर में भी सभी आईसीयू फुल हो चुके हैं। 

तस्वीर 20 मार्च की है। इटली में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित मिलान में लॉकडाउन के बावजूद सड़कों पर ट्रैफिक था।

इटली में कोरोनावायरस से मरने वालों में 96% लोग 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं
इटली में मरने वाले लोगों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग हैं। इटली के हेल्थ इंस्टीट्यूट की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना से 86% मौतें 70 से ज्यादा उम्र के लोगों की हुई हैं। 10% लोग 60 से 69 साल के बीच के हैं। इटली में जापान के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा बुजुर्ग आबादी है। 

मिलान में पुलिस पार्कों में बैठे लोगों को जबरदस्ती निकाल रही है।


चीन ने क्या किया: 23 जनवरी को पहली बार वुहान में लॉकडाउन किया, इसके बाद 20 राज्यों में 70 करोड़ लोगों को घरों में कैद कर दिया

चीन ने हुबेई प्रांत के वुहान में 23 जनवरी को लॉकडाउन लागू किया था। यहीं से कोरोनावायरस शुरू हुआ था। पहला मामला 31 दिसंबर को सामने आया था। वुहान की आबादी 1.1 करोड़ है। इसके साथ ही चीन ने दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा लॉकडाउन लगाया था। इसके बाद 20 राज्यों और 16 बड़े शहरों को एक साथ बंद कर दिया गया। करीब 70 करोड़ लोग घरों में कैद कर दिए गए।


विशेषज्ञों ने कहा था कि चीनी अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी
वुहान में जब चीन ने पहली बार लॉकडाउन किया तो दुनिया हतप्रभ थी। महामारी के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चीन को इस कदम की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इतने बड़े लॉकडाउन से लोगों के साथ चीन की इकोनॉमी को बहुत बड़ा नुकसान होगा। इससे पहले आधुनिक दुनिया ने कहीं भी क्वारैंटाइन का इतना बड़ा मामला नहीं देखा था।

तस्वीर वुहान की है। यहां लॉकडाउन के बाद लोगों को घरों के बाहर खाने-पीने की चीजें दी जाती थीं। 

जरूरी सेवाओं और मेडिकल इमरजेंसी को भी रोक दिया था
चीन ने स्कूल, ऑफिस, ट्रांसपोर्ट सर्विस, एयरपोर्ट, मेट्रो सेवा और लोगों के एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। इन प्रतिबंधों को घोषणा के कुछ ही घंटे के अंदर पूरे वुहान में लागू कर दिया गया। शहर से बाहर आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया गया, यहां तक जरूरी सेवाओं और मेडिकल इमरजेंसी को भी रोक दिया गया। सभी दुकानों को बंद कर दिया गया, इनमें फूड और मेडिसिन शॉप भी शामिल थीं। निजी वाहनों को बिना किसी परमीशन के जहां-तहां रोक दिया। लोगों को घरों से निकलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इसके लिए जगह-जगह पुलिस तैनात कर दी गई। 


लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कम्युनिटी सेवा शुरू की
सरकार ने लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कम्युनिटी सेवा शुरू की। केवल कुछ जगहों पर फूड और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए दुकानें खोली गईं। लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल शुरू किया। कुछ ही दिन बाद लॉकडाउन पॉलिसी को और कड़ाई के साथ लागू कर दी गई। हेल्थ वर्कर घर-घर जाकर हर एक व्यक्ति की जांच करने लगे, कोरोनावायरस का थोड़ा भी संदेह होने पर जबदरस्ती लोगों को क्वारैंटाइन किया जाने लगा। एक दिव्यांग बच्चे की घर में अकेले छोड़ दिए जाने से मौत हो गई, क्योंकि उसे खाना नहीं मिल पाया। उसके पिता और भाई को प्रशासन ने क्वारैंटाइन कर दिया था। 

23 जनवरी को लॉकडाउन के कुछ ही घंटे बाद वुहान की सड़कें खाली हो गई थीं।

तब दुनिया ने चीन के इस सख्त पॉलिसी पर सवाल उठाए थे, अब नतीजे सामने
चीन ने वुहान के बाद अन्य 20 राज्यों में भी इस लॉकडाउन पॉलिसी को लागू कर दिया। दुनिया के तमाम देशों ने भी चीन के इस सख्त पॉलिसी पर सवाल उठाए। लेकिन चीनी सरकार के इस कदम के नतीजे दो महीने के अंदर ही दुनिया के सामने हैं। इस गुरुवार को चीन में पहली बार कोरोनावायरस का कोई नया मामला नहीं आया।  


अब दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में लॉकडाउन, 120 करोड़ लोग घरों में बंद
चीन के बाद दुनिया के 20 से ज्यादा देश लॉकडाउन लगा चुके हैं। करीब 120 करोड़ लोग घरों में बंद हैं, लेकिन कहीं पर भी इसका चीन जितना कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। इसीलिए इन जगहों पर लॉकडाउन के बावजूद कोरोना के नए केसों में कमी नहीं आई है। डब्ल्यूएचओ ने भी माना है कि चीन ने लॉकडाउन के चलते कोरोनावायरस पर काबू पाने में कामयाबी पाई है। 

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