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प्रतिक्रिया / भारत ने कश्मीर पर पाक-चीन के बयान का विरोध किया, कहा- पीओके में वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट बंद करें



विदेश मंत्री एस जयशंकर। विदेश मंत्री एस जयशंकर।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर।विदेश मंत्री एस जयशंकर।

  • चीन के विदेश मंत्री ने कश्मीर को लेकर भारत की कार्रवाई को एकतरफा बताया था
  • इससे पहले भी कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए चीन ने संयुक्त राष्ट्र में गुप्त बैठक बुलाई थी

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2019, 03:34 PM IST

नई दिल्ली. भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान और चीन के साझा बयान की निंदा की है। दरअसल, एक दिन पहले ही चीन के विदेश मंत्री वांग यी पाक दौरे पर थे। उन्होंने कश्मीर पर भारत की कार्रवाई को एकतरफा बताया। साथ ही इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। इस पर मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम कश्मीर पर दोनों देशों के बयान को नकारते हैं। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पाक और चीन पीओके में चल रहे वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को बंद करें।

 

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत लगातार चीन और पाक द्वारा पीओके में चलाए जा रहे ‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (सीपैक) का विरोध करता रहा है। क्योंकि यह प्रोजेक्ट भारत के उस इलाके में चलाया जा रहा है जिस पर पाक ने 1947 से ही अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। भारत पाक के कब्जे वाले कश्मीर की यथास्थिति बदलने की किसी भी अन्य देश की कोशिशों का विरोध करता है। हम इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी पक्षों से तुरंत कार्रवाई बंद करने की मांग करते हैं।

 

चीन ने पाक के समर्थन में यूएन में उठाया था कश्मीर मुद्दा
जम्मू-कश्मीर में विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के बाद चीन ने पाक के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले को उठाया था। हालांकि, यूएन में सिर्फ एक गुप्त बैठक हुई थी, जो कि बेनतीजा रही थी। चीन परिषद का स्थायी सदस्य है। अब तक रूस, अमेरिका और यूएई समेत ज्यादातर देश कश्मीर मसले पर भारत के साथ रहे हैं।

 

किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन नहीं किया: भारत
पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की लगातार कोशिश करता रहा है और वह इस मामले में विश्व समुदाय को शामिल करने का प्रयास करता रहा है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के कदम से न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय शांति को खतरा उत्पन्न हुआ है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया था कि यह उसका आंतरिक मामला है और उसने किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया है।

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