एनालिसिस / जीएसपी से बाहर होने पर भारत को सिर्फ 19 करोड़ डॉलर का नुकसान लेकिन ट्रेड वॉर का खतरा



india loss of only usd19 million if out of gsp but fear of trade war
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india loss of only usd19 million if out of gsp but fear of trade war

  • अमेरिका ने भारत और तुर्की को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज से बाहर करने का फैसला किया
  • अमेरिका ने कहा- भारत में अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा आयात शुल्क, लेकिन जीएसपी की वजह से अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर छूट
  • एक्सपर्ट ने कहा- अमेरिका का फैसला ज्यादा बड़ा नहीं, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता

Dainik Bhaskar

Mar 06, 2019, 05:07 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि वो भारत और तुर्की को अमेरिका के जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) कार्यक्रम से बाहर करेंगे। भारत के वाणिज्य सचिव अनूप धवन का कहना है कि इस फैसले से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पिछले साल भारत ने जीएसपी के तहत अमेरिका को 560 करोड़ डॉलर के सामान का निर्यात किया। इस पर सिर्फ 19 करोड़ डॉलर के आयात शुल्क की बचत हुई।

जीएसपी के तहत भारत 1900 वस्तुएं करता है निर्यात

  1. जीएसपी में शामिल देशों को 3,700 उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क नहीं देना पड़ता। इसके तहत भारत अमेरिका को 1,900 वस्तुओं का निर्यात करता है। अमेरिका ने विकासशील देशों की मदद के लिए 1976 में जीएसपी की व्यवस्था शुरू की थी। आर्थिक रूप से मजबूत होने पर अमेरिका किसी देश को इस श्रेणी से बाहर कर सकता है।

  2. अमेरिका ने क्यों लिया फैसला?

    • दरअसल, अमेरिका-भारत के बीच पिछले साल से ही व्यापारिक रिश्ते खराब होने शुरू हो गए थे।
    • अमेरिका की दलील थी कि भारत अपने कई सामान अमेरिका में बिना किसी आयात शुल्क के बेचता है, लेकिन भारत में अमेरिका को सामान बेचने के लिए आयात शुल्क चुकाना होता है।
    • फरवरी 2018 में जब भारत सरकार ने महंगी और लग्जरी बाइक्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 75% से घटाकर 50% कर दिया था, उसके बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पर आपत्ति जताई थी।
    • उस वक्त ट्रम्प का कहना था कि भारत जैसे देश अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों का दुरुपयोग करते हैं।

  3. अमेरिका-भारत के बीच व्यापार

      2016 2017
    निर्यात 42.3 49.4
    आयात 71.8 76.7
    अमेरिका का घाटा 29.6 27.3

    (आंकड़े अरब डॉलर में, सोर्स- ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव)

     

    *किसी दूसरे देश से किसी उत्पाद या सेवा खरीदने को आयात कहते हैं, वहीं किसी दूसरे देश को कोई उत्पाद या सेवा बेचने को निर्यात कहते हैं। दोनों के फर्क के व्यापार घाटा कहा जाता है। 2017 में अमेरिका ने भारत से 76.7 अरब डॉलर का सामान खरीदा, लेकिन भारत ने इसी दौरान अमेरिका से 49.4 अरब डॉलर का सामान लिया। इस तरह से अमेरिका को 27.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।

  4. एक्सपर्ट व्यू : अमेरिका के फैसले से भारत को कितना नफा-नुकसान

    भारत के लिए जीएसपी में बने रहना कितना जरूरी है?
    विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह बताते हैं कि अमेरिका के इस फैसले से भारत का 5.6 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित होगा। क्योंकि, अभी तक इतने व्यापार पर अमेरिका में कोई आयात शुल्क नहीं लगता था। कई देशों के साथ हमारा व्यापारा घाटा चल रहा है तो ऐसे में अमेरिका से हमें थोड़ी राहत मिल जाती थी। अभी तक दुनिया के देशों से जो हमें व्यापार घाटा होता था, उसकी रिकवरी हम अमेरिका से कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। इससे हमारा करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) बढ़ेगा और हमारी राजकोषीय स्थिति प्रभावित होगी।

  5. अमेरिका के इस फैसले को कैसे देखा जा सकता है?
    रहीस सिंह बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले से पता चलता है कि हमारे और अमेरिका के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। भारत, जीएसपी में बना रहता तो इससे भारत को तो कोई नुकसान नहीं है लेकिन इसके हटने से यह संदेश गया कि अमेरिका, भारत की टैरिफ पॉलिसी से नाराज है। इससे पता चलता है कि भारत की वाणिज्यिक कूटनीति पर भी असर होगा।

  6. भारत अब क्या कर सकता है, क्या इससे भारत को कोई फायदा भी है?
    सिंह के मुताबिक, भारत को अमेरिका के इस फैसले से कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि भारत का ही निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका के जवाब में भारत उनके उत्पादों पर और ड्यूटी बढ़ा सकता है। इससे जो ट्रेड वॉर अमेरिका और चीन के बीच चल रहा था, वही भारत और अमेरिका के बीच भी शुरू हो जाएगा।

  7. क्या अमेरिका के फैसले से भारत के आम चुनावों पर भी असर होगा?

    रहीस सिंह इस बात से इनकार करते हैं। उनका मानना है कि ऐसा तभी हो सकता है जब विपक्ष अमेरिका के इस फैसले को मोदी सरकार की असफल नीति के तौर पर प्रसारित करे। उनका मानना है कि इस तरह के फैसलों से आम जनता को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, हालांकि विपक्ष इस फैसले पर सरकार को घेरती है तो ही चुनाव पर थोड़ा-बहुत असर पड़ सकता है।

  8. क्या इससे भारत-अमेरिका की दोस्ती पर भी असर पड़ेगा?
    सिंह का कहना है, इससे दोनों देशों की दोस्ती पर तो असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ये इतना ज्यादा बड़ा फैसला नहीं है। हालांकि, पश्चिमी देश अमेरिका को फॉलो करते हैं और जैसा अमेरिका करता है, वैसा ही करते हैं। इसलिए हो सकता है कि दूसरे पश्चिमी देश भी अमेरिका की तर्ज पर भारत के साथ होने वाले व्यापार को लेकर इस तरह के फैसले लें। सिंह का मानना है कि, अभी दुनिया में इकोनॉमिक रेसेशन (आर्थिक मंदी) का दौर चल रहा है, इसलिए देश अपना सामान तो बेचना चाहते हैं लेकिन खरीदना नहीं चाहते। हालांकि, अमेरिका के इस फैसले को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और वाणिज्यिक कूटनीति को बढ़ाना चाहिए।

  9. जीएसपी कार्यक्रम क्या है?
    जीएसपी यानी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज कार्यक्रम को 1 जनवरी 1976 को अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 के तहत शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दुनियाभर के विकासशील देशों के बाजारों को सहारा देना था। इस कार्यक्रम में शामिल देशों को अमेरिका में अपने उत्पाद बेचने पर किसी तरह का आयात शुल्क नहीं देना होता है। इस कार्यक्रम में भारत समेत 121 देशों को शामिल किया गया है।  इसके तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के आयात पर छूट मिलती है, लेकिन इससे हटने के बाद भारत को इसका फायदा नहीं मिलेगा।

  10. जीएसपी की क्या शर्तें हैं? 
    मुकदमा होने पर अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को तरजीह, सामान बनाने में बाल श्रम का इस्तेमाल नहीं हुआ हो, कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना, पेंटेंट नियमों को मानना, अमेरिकी कंपनियों को अपने देश में बराबर के मौके देना।

  11. भारत किन वस्तुओं का निर्यात करता है? 
    प्रोसेस्ड फूड, लेदर और प्लास्टिक प्रोडक्ट, बिल्डिंग मैटेरियल, हैंड टूल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, तकिया-कुशन कवर, महिलाओं के बुने हुए कपड़े, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, ऑर्गेनिक केमिकल्स, कृषि, समुद्री और हैंडीक्राफ्ट।

  12. अमेरिकी कंपनियों के लिए भी चीजें महंगी होंगी 
    जीएसपी के तहत भारत मुख्य रूप से सेमी-मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं का निर्यात करता है। इससे अमेरिकी कंपनियों को अपने प्रोडक्ट की लागत कम रखने में मदद मिलती है। भारत को जीएसपी से बाहर करने से केमिकल प्रोडक्ट्स के दाम करीब 5% बढ़ेंगे। इससे अमेरिकी कंपनियां और उपभोक्ता दोनों प्रभावित होंगे।

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