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कार्रवाई / पाक में एयर स्ट्राइक के दौरान भारत-म्यांमार बॉर्डर पर भी उग्रवादियों के कैंप तबाह किए गए

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2019, 10:13 PM IST


सिम्बॉलिक फोटो। सिम्बॉलिक फोटो।
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सिम्बॉलिक फोटो।सिम्बॉलिक फोटो।
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  • भारत और म्यांमार की सेनाओं ने मिलकर ऑपरेशन को अंजाम दिया
  • आराकान आर्मी के सदस्यों ने कालादान ट्रांजिट प्रोजेक्ट को निशाना बनाया था
  • इससे पहले भारतीय सेना ने जून 2015 में म्यांमार में घुसकर उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की थी

नई दिल्ली. पुलवामा हमले के बाद जिस दौरान भारत ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया, उसी दौरान भारत-म्यांमार सीमा पर भी उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया जा रहा था। सेना के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि 17 फरवरी से 2 मार्च के बीच भारत और म्यांमार की सेनाओं ने मिलकर यह ऑपरेशन चलाया। इसमें उग्रवादियों के दर्जनों कैम्प तबाह किए गए।

भारतीय सेना ने ऑपरेशन के दौरान सीमा पार नहीं की

  1. सूत्र के मुताबिक, भारत-म्यांमार की आर्मी ने अराकान आर्मी के सदस्यों के खिलाफ यह अभियान चलाया। इन उग्रवादियों से कालादान मल्टी ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट को खतरा था। इस प्रोजेक्ट को भारत के दक्षिण-पूर्व एशिया में गेटवे के तौर पर देखा जा रहा है।

  2. हालांकि, भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान सीमा पार नहीं की थी। ऑपरेशन का मकसद अराकान आर्मी के सदस्यों को नेस्तनाबूद करना था। अधिकारी ने बताया कि अराकान आर्मी के सदस्य मिजोरम सीमा से सटे इंटरनेशनल बॉर्डर के काफी करीब आ गए थे। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने नगालैंड और मणिपुर से सटी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी थी, ताकि उग्रवादी भारतीय सीमा में प्रवेश ना कर सकें।

  3. भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना भी बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन द्वारा म्यामांर में कैंप बनाए जाने को दोनों ही देश बड़ी समस्या के तौर पर देख रहे थे। भारतीय आर्मी ने ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी ऑपरेशन को अंजाम दिया।

  4. दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद सम्मिलित ऑपरेशन करने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल सीमा के पास भेजे गए और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। असम राइफल के पास म्यांमार से सटे इंटरनेशनल बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

  5. कालादान प्रोजेक्ट के लिए भारत में भी काम जारी

    2008 में कालादान प्रोजेक्ट में भारत ने म्यांमार को सहयोग देने पर सहमति दी थी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रेखाइन राज्य के सिट्वे पोर्ट से जुड़ जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भारत में एजवाल-साइहा नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।

  6. सेना ने जून 2015 में म्यांमार में उग्रवादियों के खिलाफ की थी कार्रवाई

    जून 2015 में आतंकियों ने मणिपुर में सेना के वाहन पर हमला किया था। इसमें 18 जवान शहीद हुए थे। जवाब में सेना ने दो दिन बाद ही म्यांमार बॉर्डर के अंदर घुसकर वहां स्थित उग्रवादियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसमें कई आतंकी मारे गए थे।

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