BSNL और एयर इंडिया के बाद सरकार की तीसरी कंपनी में घाटे में, एक साल में गंवा दिए 15 हजार करोड़ रु

घाटे में नंबर वन हो गई है ये सरकारी कंपनी, बताई गई इसके पीछे की ये वजह

DainikBhaskar.com

Apr 16, 2019, 04:33 PM IST
India Post losses touch Rs 15,000 crore in FY19

नेशनल डेस्क, नई दिल्लीबीसीएनएल और एयर इंडिया के बाद अब सरकार की एक और कंपनी इंडिया पोस्ट घाटे में चल रही है। बल्कि इस इंडिया पोस्ट घाटे में बाकी दोनों कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। बीते तीन वित्त वर्ष में इंडिया पोस्ट का घाटा बढ़कर 150% बढ़ गया है। यानी 2018-19 में इस घाटा 15000 करोड़ रुपए। अब यह सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनी हो गई है।


- इस घाटे की वजह कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्ते देने के लिए होने वाले खर्च को बताया जा रहा है। इस मद पर इंडिया पोस्ट को अपने सालाना राजस्व का 90 फीसदी तक खर्च करना पड़ता है। घाटे के लिए बदनाम दूसरी सरकारी कंपनी बीएसएनएल को वित्त वर्ष 2018-19 में 7,500 करोड़ रु और एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2017-18 में 5,337 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है।
- इंडिया पोस्ट को वित्त वर्ष 2018-19 में 18,000 करोड़ रु का राजस्व हासिल हुआ था, जबकि उसे वेतन और भत्तों में 16,620 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इसके अलावा बीएसएनल को पेंशन पर करीब 9,782 करोड़ रु खर्च करने पड़े थे, यानी उसका कुल कर्मचारी लागत 26,400 करोड़ रु तक पहुंच गया था।
- कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020 में वेतन/भत्तों पर खर्च 17,451 करोड़ रु और पेंशन पर खर्च 10,271 करोड़ रु रहेगा। वहीं, इस दौरान आय सिर्फ 19,203 करोड़ रु रहने का अनुमान है। इससे साफ है कि आगे चलकर कंपनी की हालत और खराब होगी।
- उत्पाद लागत और कीमत एवं पारंपरिक डाक सेवाओं की तुलना में अधिक सस्ते और तेज विकल्प मौजूद होने की वजह से इंडिया पोस्ट की परफॉर्मेंस सुधारने और इसकी आय बढ़ाने के प्रयास सफल नहीं हो रहे।
- इसके अलावा उत्पादों की कीमत बढ़ाने के अलावा कंपनी अपने 4.33 लाख कामगारों और 1.56 लाख पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क के दम पर ई-कॉमर्स और अन्य वैल्यू एडेड सर्विसेस में संभावनाएं खंगाल सकती है।
- इंडिया पोस्ट अपने हर पोस्ट कार्ड पर 12.15 रु खर्च करता है, लेकिन उसे सिर्फ 50 पैसे यानी लागत का चार फीसदी ही मिलता है। औसतन पार्सल सेवा की लागत 89.23 रुपये है लेकिन कंपनी को इसका सिर्फ आधा ही मिलता है। बुक पोस्ट, स्पीड पोस्ट और रजिस्ट्रेशन आदि के साथ भी ऐसा ही होता है।

ईमेल-फोन कॉल की इस्तेमाल करने लगे हैं लोग
- व्यय सचिव की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति ने हाल ही में डाक विभाग से कहा था कि यूजर्स से शुल्क वसूलने के लिए कंपनी को आत्मनिर्भर होना चाहिए क्योंकि केंद्र के बजट में इस तरह के रेकरिंग वार्षिक घाटा शामिल नहीं होता। लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन आय घट रही है क्योंकि इसके विकल्प मौजूद है। लोग डाक के बजाए अब ईमेल, फोन कॉल आदि का इस्तेमाल करने लगे हैं।

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