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अंडर 19 / कंडक्टर, ड्राइवर, शिक्षक, फौजी, किसान के बच्चे दिलाएंगे विश्वकप, सभी ने संघर्ष के बल पर बनाई टीम में जगह

अंडर 19 भारतीय क्रिकेट टीम की फाइल फोटो। अंडर 19 भारतीय क्रिकेट टीम की फाइल फोटो।
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अंडर 19 भारतीय क्रिकेट टीम की फाइल फोटो।अंडर 19 भारतीय क्रिकेट टीम की फाइल फोटो।

  • अगले महीने दक्षिण अफ्रीका में होगा मुकाबला, टीम में यूपी, राजस्थान और झारखंड के खिलाड़ी
  • इनमें एक खिलाड़ी सचिन को और एक सुरेश रैना को अभ्यास मैच में कर चुका बोल्ड

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 07:50 PM IST
डेस्क. अगले महीने दक्षिण अफ्रीका में होने वाले अंडर 19 क्रिकेट विश्वकप के लिए भारतीय टीम की घोषणा हो चुकी है। इसमें चुने गए 8 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो संघर्ष के रास्ते टीम में अपनी जगह बनाने में सफल हुए हैं। टीम में शामिल इन खिलाड़ियों में 7 बच्चों में से किसी के पिता किसान, तो किसी के फौजी, दूधिए, शिक्षक, ड्राइवर हैं। एक खिलाड़ी के पिता नहीं हैं, उनकी मां मुंबई में बस कंडक्टर हैं। एक खिलाड़ी के पिता सेलटेक्स विभाग में अफसर हैं। दो खिलाड़ी तो ऐसे हैं जो अभ्यास मैच में सचिन और रैना को बोल्ड कर चुके हैं।
  • पिता साइकल से दूध बेचकर करते थे पैसों का इंतजाम, प्रियम को अंडर 19 की कमान

    पिता साइकल से दूध बेचकर करते थे पैसों का इंतजाम, प्रियम को अंडर 19 की कमान

    अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान प्रियम गर्ग।

    मेरठ. अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान बने प्रियम गर्ग दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। उनके पिता नरेश साइकिल से दूध बेचकर बेटे के खेल के लिए पैसों की व्यवस्था करते थे। अब वह स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर हैं। प्रियम के नाम पर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दोहरा शतक और लिस्ट-ए में शतक दर्ज है। गर्ग भारत-सी टीम का भी हिस्सा थे, जो पिछले महीने देवधर ट्रॉफी में उपविजेता रही। उन्होंने फाइनल में भारत-बी के खिलाफ 74 रन की पारी खेली। रणजी ट्रॉफी सत्र 2018-19 में गर्ग उत्तर प्रदेश के दूसरे शीर्ष स्कोरर रहे। उन्होंने 67.83 के औसत से 814 रन बनाए जिसमें करियर की सर्वश्रेष्ठ 206 रन की पारी सहित दो शतक शामिल रहे। प्रियम गर्ग मेरठ के रहने वाले हैं। गरीबी की वजह से उनके पिता ने क्रिकेट खेलने से मना किया। इसके बाद उनके मामा ने उन्हें मेरठ के भामाशाह पार्क क्रिकेट अकादमी में कोचिंग दिलाई।

  • गोल गप्पे बेचे, टेंट में सोना पड़ा था यशस्वी को

    गोल गप्पे बेचे, टेंट में सोना पड़ा था यशस्वी को

    अपने पिता के साथ यशस्वी गोल गप्पे के स्टॉल पर (फाइल फोटो)

    भदोही. सुरयावां गांव में जन्मे यशस्वी जायसवाल का चयन अंडर 19 विश्व कप टीम के लिए हुआ है। यशस्वी का बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा है। पिता भूपेंद्र ने कहा- बेटे ने किराने की दुकान पर काम किया और गोलगप्पे भी बेचे हैं। जो लोग मुझे पागल कहते थे वो आज साथ में फोटो खिंचवाते हैं। जो कहते थे कि बेटे के पीछे बर्बाद हो जाओगे, आज वही लोग पेपर हाथों में लेकर आते हैं। फक्र से कहते हैं, मोंटी (यशस्वी का घर का नाम) हमारा बच्चा है। 

  • किसान के बेटे आकाश ने जंक फूड कभी नहीं छुआ

    किसान के बेटे आकाश ने जंक फूड कभी नहीं छुआ

    आकाश सिंह

    भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले के नगला रामरतन गांव के रहने वाले किसान के बेटे आकाश सिंह (17) का अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में चयन हुआ है। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश बेंगलुरु में ट्रेनिंग कर रहे हैं। आकाश की मुलाकात राहुल द्रविड़ से हुई थी। उन्होंने खेल देखकर कहा था- प्रैक्टिस करते रहना। आकाश ने कभी प्रैक्टिस से समझौता नहीं किया। वह जहीर खान और आशीष नेहरा को अपनी प्रेरणा मानते हैं। आकाश बताते हैं कि तेज गेंदबाजी के लिए फिटनेस बहुत अहम है। मैं उसका पूरा ध्यान रखता हूं। मैंने कभी जंक फूड नहीं खाया।

  • फौजी का बेटा ध्रुव खड़ा होगा विकेट के पीछे
     

    फौजी का बेटा ध्रुव खड़ा होगा विकेट के पीछे<br />
 

    अंडर 19 टीम के विकेट कीपर ध्रुव चंद जुरेल।

    आगरा. अंडर 19 टीम के विकेट कीपर ध्रुव चंद जुरेल के पिता नेम सिंह 1999 में करगिल युद्ध में लड़े थे। सेना में हवलदार पद से सेवानिवृत नेम सिंह अपने बेटे ध्रुव को फौजी बनाना चाहते थे। ध्रुव तारे की तरह अपने लक्ष्य पर अटल ध्रुव क्रिकेटर बनाने  लिए जुटे रहे। उन्होंने इसी साल इंग्लैंड दौरे पर त्रिकोणीय सीरीज में टीम इंडिया को जिताने में अहम रोल निभाया था। साथ ही अंडर-19 एशिया कप के लिए उन्हें कप्तानी दी गई थी। अपनी तैयारियों को पुख्ता करने के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ध्रुव ने इस वर्ष 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा भी छोड़ दी थी।

  • पढ़ाई में नहीं लगा शिक्षक के बेटे रवि का मन

    पढ़ाई में नहीं लगा शिक्षक के बेटे रवि का मन

    रवि विश्नोई

    जोधपुर. अंडर 19 टीम में बतौर लेग स्पिनर चुने गए रवि विश्नोई के पिता मांगीलाल शिक्षक हैं। लेकिन, रवि का मनाई पढ़ाई में नहीं क्रिकेट में लगा। 12वीं पास रवि 8 साल पहले जोधपुर में स्पार्टन क्रिकेट अकादमी में तेज गेंदबाज बनने पहुंचे थे। वहां के कोच प्रत्युश और शाहरुख ने उन्हें स्पिनर बनने के लिए प्रेरित किया। पूरा दिन क्रिकेट मैदान पर ही गुजारने वाले रवि से पिता नाराज रहते, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे। जिस समय टीम का एलान हुआ उस समय रवि फिटनेस शिविर में ट्रेनिंग ले रहे थे।

  • रैना ने पहली गेंद पर मारा छक्का तो मिश्रा ने दूसरी पर किया था बोल्ड

    रैना ने पहली गेंद पर मारा छक्का तो मिश्रा ने दूसरी पर किया था बोल्ड

    सुशांत मिश्रा का फाइल फोटो

    रांची. रांची के पुंदाग में रहने वाले सुशांत मिश्रा के पिता समीर मूल रूप से बिहार के दरभंगा से हैं। वह सेल्स का काम करते हैं। एक बार आईपीएल खेलने रांची के जेएससीए क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे चेन्नई सुपर किंग्स के ने सुशांत से पूछा था कि क्या करते हो तो उसने कहा कि वह बॉलर है। इसके बाद वह ग्राउंड में बॉलिंग करने के लिए पहुंचे। सामने टीम इंडिया के बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना थे। रैना ने पहली गेंद पर छक्का लगा दिया, लेकिन सुशांत ने दूसरी गेंद पर उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया था। सुशांत डीएवी पुंदाग में 12वीं के स्टूडेंट हैं। क्रिकेट और पढ़ाई के बीच पिछले साल उन्होंने ड्रॉप भी किया था।

  • रैना ने पहली गेंद पर मारा छक्का तो मिश्रा ने दूसरी पर किया था बोल्ड

    रैना ने पहली गेंद पर मारा छक्का तो मिश्रा ने दूसरी पर किया था बोल्ड

    सुशांत मिश्रा का फाइल फोटो

    रांची. रांची के पुंदाग में रहने वाले सुशांत मिश्रा के पिता समीर मूल रूप से बिहार के दरभंगा से हैं। वह सेल्स का काम करते हैं। एक बार आईपीएल खेलने रांची के जेएससीए क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे चेन्नई सुपर किंग्स के ने सुशांत से पूछा था कि क्या करते हो तो उसने कहा कि वह बॉलर है। इसके बाद वह ग्राउंड में बॉलिंग करने के लिए पहुंचे। सामने टीम इंडिया के बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना थे। रैना ने पहली गेंद पर छक्का लगा दिया, लेकिन सुशांत ने दूसरी गेंद पर उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया था। सुशांत डीएवी पुंदाग में 12वीं के स्टूडेंट हैं। क्रिकेट और पढ़ाई के बीच पिछले साल उन्होंने ड्रॉप भी किया था।

  • वाणिज्य विभाग में अफसर हैं कुशाग्र के पिता

    वाणिज्य विभाग में अफसर हैं कुशाग्र के पिता

    कुमार कुशाग्र।

    रांची. जमशेदपुर के रहने वाले कुमार कुशाग्र विकेटकीपर और दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। कुशाग्र के पिता शशिकांत जमशेदपुर में अन्वेषण ब्यूरो में वाणिज्य विभाग में सहायक आयुक्त हैं। उन्होंने बताया कि वे रांची के चुटिया के रहने वाले हैं। फिलहाल, उनका परिवार जमशेदपुर में रहता है। कुशाग्र के अलावा उनके घर में दो बहनें हैं। कुशाग्र ने 10 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। फिलहाल, वे जमशेदपुर लोयला स्कूल में इंटर के स्टूडेंट हैं। कुशाग्र ने 2015-16 के बीच अंडर 14 बोकारो से खेला था। इसी वक्त उनका सिलेक्शन अंडर-16 टीम में हुआ।

  • ग्रुप ए में है भारत

    अगले महीने से दक्षिण अफ्रीका में शुरू हो रहे 13 वें अंडर-19 विश्व कप में 16 टीमें हिस्सा लेंगी। इन टीमों को चार ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप में शीर्ष दो टीमें सुपर लीग स्टेज के लिए क्वालीफाई करेंगे। भारतीय टीम को ग्रुप-ए में न्यूजीलैंड, श्रीलंका और जापान के साथ रखा गया है।

    भारत के ग्रुप मुकाबले
    19 जनवरी को श्रीलंका से
    21 जनवरी को जापान से
    24 जनवरी को न्यूजीलैंड से नॉकआउट मुकाबले
    28 जनवरी : पहला क्वार्टर फाइनल
    29 जनवरी : दूसरा क्वार्टर फाइनल
    30 जनवरी : तीसरा क्वार्टर फाइनल
    31 जनवरी : चौथा क्वार्टर फाइनल
    4 फरवरी : पहला सेमीफाइनल
    6 फरवरी : दूसरा सेमीफाइनल
    9 फरवरी : फाइनल

    भारतीय अंडर-19 टीम
    प्रियम गर्ग (कप्तान), ध्रुव चंद जुरेल (उप-कप्तान/विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल, तिलक वर्मा, दिव्यांश सक्सेना,  शाश्वत रावत, दिव्यांश जोशी, शुभांग हेगडे़, रवि विश्नोई, आकाश सिंह, कार्तिक त्यागी, अर्थव अंकोलेकर, सुशांत मिश्रा, विद्याधर पाटिल।

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