भारत में टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी बनाएंगे 40 सीईओ, 2 हजार करोड़ रु. जुटाने की योजना

4 वर्ष पहले
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  • कई बड़ी कंपनियों के सीईओ भारत में प्लाक्शा यूनिवर्सिटी बनाने के लिए फंड जुटा रहे हैं
  • महिंद्रा, एशिया पैसिफिक, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, जेनपैक्ट जैसी कंपनियों के सीईओ ने बनाई है यूनिवर्सिटी शुरू करने की योजना

चंडीगढ़. भारत की बड़ी कंपनियों के उद्यमी और कारोबारी देश में ही एक टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए संसाधन जुटा रहे हैं। इसके जरिए वे छात्रों को आधुनिक तकनीक, नवोन्मेष और उद्यमिता के लिए तैयार करना चाहते हैं। करीब 40 टॉप भारतीय कंपनियों के सीईओ इसे अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की तर्ज पर तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए 2000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

1) महिंद्रा और नौकरी डॉट कॉम के सीईओ शामिल

जिन बड़ी कंपनियों के सीईओ ने यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट को समर्थन दिया है उनमें महिंद्रा के सीईओ सीपी गुरनानी, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के एशिया पैसिफिक चेयरमैन नीरज अग्रवाल, हेलियॉन वेंचर्स के को-फाउंडर आशीष गुप्ता, जेनपैक्ट और क्लिक कैपिटल के चेयरमैन प्रमोद भसीन और इन्फोएज और नौकरी डॉट कॉम के मैनेजिंग डायरेक्टर हितेश ओबेराॅय शामिल हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी का नाम ‘प्लाक्शा’ रखा जाएगा। प्लाक्शा का मतलब है ‘ज्ञान का वृक्ष।’ इसे चंडीगढ़ में 50 एकड़ की जमीन पर बनाया जाएगा। पहले फेज में निवेशक 1000 छात्रों का कैम्पस बनाना चाहते हैं। इसके बाद अगले 10 सालों में इसे बढ़ाकर 8000 छात्रों का कर दिया जाएगा। फिलहाल यूनिवर्सिटी को 2021 तक लॉन्च करने की योजना है। उद्यमियों ने इसके लिए अब तक करीब 400 करोड़ रुपए जुटा भी लिए गए हैं। 

यूनिवर्सिटी से जुड़े एक निवेशक ने बताया कि उन्हें प्लाक्शा यूनिवर्सिटी बनाने का आइडिया आईआईटी से निकले कुछ अच्छे बिजनेस लीडर्स से आया, जो भारत के तकनीकी वातावरण को छात्रों के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे। इसी से प्रेरणा लेकर हमने भी एक विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी बनाने का फैसला किया। जहां शुरुआत में इस योजना से 5-6 उद्यमी ही जुड़े थे। वहीं अब इसके निर्माण के लिए करीब 40 लोगोें ने सहयोग दिया है।  

यूनिवर्सिटी की शिक्षा में टेक्नोलॉजी केंद्र में रहेगी। छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स के क्षेत्र में क्वालिटी एजुकेशन मुहैया कराई जाएगी। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के नीरज अग्रवाल के मुताबिक, यह यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए एक नया आयाम पैदा करेगी।

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