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कश्मीरी सेबों को लगी ईरान की नजर:अवैध तरीके से भारतीय बाजार में आ रहे ईरानी सेब, कश्मीरी सेबों के 3 करोड़ बक्से नहीं बिक पाए

श्रीनगर16 दिन पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू

कश्मीर इकोनॉमी की रीढ़ कही जाने वाली बागवानी इंडस्ट्री संकट में है। वजह है ईरानी सेबों का अवैध तरीके से भारतीय बाजार में आना। ईरानी सेबों के मार्केट में आने के चलते इस बार कश्मीरी सेबों के 3 करोड़ बक्सों की बिक्री नहीं हो पाई है। बागवानी करने वाले किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की मांग की है।

कश्मीर में बागवानी से 7 लाख परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं। कश्मीर की GDP का यह 7% है। घाटी में 3.38 लाख हेक्टेयर जमीन पर फलों की खेती होती है। इनमें से 1.62 लाख हेक्टेयर पर सेब उगाए जाते हैं। पिछले साल फल किसानों को तूफानों और तेज हवाओं के चलते नुकसान उठाना पड़ा था और अब नया खतरा ईरान से आ रहे सेब बन रहे हैं।

400 करोड़ के घाटे की आशंका
ईरान से आ रहे सेब सस्ते हैं और ये बहुत तेजी से मार्केट में आ रहे हैं, जिसकी वजह से कश्मीरी सेबों की डिमांड काफी कम हो गई है। सेब की खेती करने वाले अनंतनाग के नसरुल्लाह कहते हैं कि ईरानी सेबों के भारत में आने की वजह से कश्मीरी सेबों के 3 करोड़ बॉक्स नहीं बिक पाए। अगर तुरंत कदम नहीं उठाया गया तो सेब उगाने वालों और इसका व्यापार करने वालों को 400 करोड़ का घाटा होगा।

बारामूला के किसान मुकीत अहमद कहते हैं कि कश्मीर के उच्च गुणवत्ता वाले सेबों का बक्सा पिछले साल 1200 रुपए में बिका था। इस बार इन्हें बिक्री में गिरावट की वजह से 600 रुपए में बेचना पड़ रहा है। देश में कश्मीरी सेब की डिमांड काफी कम हो गई है। अनंतनाग के तजमुल अहमद कहते हैं कि वह सेबों की खेती से सालाना 8 लाख कमाते थे और इस साल ईरानी सेबों की वजह से डिमांड कम हो गई है। केवल डेढ़ लाख की कमाई हुई है।

संकट में छोटे और मझोले किसान
कश्मीर घाटी फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर यूनियन ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ईरानी सेब की अवैध बिक्री की वजह से काफी घाटा हो रहा है। कश्मीर दुनिया का सबसे बड़ा सेब उत्पादक है और जम्मू-कश्मीर की 70% आबादी इस पर निर्भर है। यह जम्मू-कश्मीर और हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

ईरानी सेब के इम्पोर्ट पर 100% ड्यूटी लगाई जाए
यूनियन ने कहा कि 1.50 करोड़ सेब के बक्से कोल्ड स्टोरेज में हैं। इनके अलावा छोटे और मझोले उत्पादकों के गोदामों में 1.5 करोड़ बक्से पड़े हैं। कुछ सेब व्यापारी हमारे मार्केट में ईरानी सेब ला रहे हैं। ये सेब दुबई और अफगानिस्तान के रास्ते आ रहे हैं और इससे फल बाजार में हमारी हिस्सेदारी घटती जा रही है। अवैध तरीके से ईरानी सेब लाए जा रहे हैं।

छोटे और मझोले किसानों के लिए यह बेहद खतरनाक है। इससे राजस्व को भी काफी नुकसान हो रहा है। भारतीय मार्केट में ईरानी सेब की अवैध एंट्री पर बैन लगाया जाए। ईरानी सेबों के भारतीय मार्केट में आने पर 100% इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई जाए।

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