इरडा का प्रस्ताव / बीमा कंपनियां मानसिक और पॉलिसी लेने के बाद की बीमारियों को भी कवर करें



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  • कहा- डिप्रेशन की दवाएं डॉक्टर ने लिखी हैं तो इंश्योरेंस कवर से बाहर नहीं किया जा सकता
  • मेनोपॉज, आयु संबंधी विकार भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के दायरे में शामिल होने चाहिए

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 12:41 PM IST

नई दिल्ली. बीमा नियामक इरडा ने मानसिक समस्याओं, आनुवांशिक बीमारियों, मस्तिष्क और मनोवैज्ञानिक विकारों को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से बाहर नहीं रखने का प्रस्ताव दिया है। इरडा का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को इस मामले में एकरूपता रखनी चाहिए। स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और इससे जुड़े उत्पादों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए इरडा ने यह प्रस्ताव दिया है।

इरडा ने संबंधित पक्षों से 31 मई तक टिप्पणी मांगी

  1. इरडा का कहना है उत्तेजक या डिप्रेशन की दवाएं जो कि डॉक्टर ने लिखी हों उन्हें भी बीमा कवर के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता।

  2. यौवन और मेनोपॉज संबंधी विकार, आयु और व्यवहारिक संबंधी विकारों को भी पॉलिसी से बाहर नहीं रखा जा सकता। इरडा ने इस संबंध में ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर संबंधित पक्षों से 31 मई तक टिप्पणी मांगी है।

  3. इरडा का कहना है कि प्रस्तावित गाइडलाइंस का मकसद हेल्थ इंश्योरेंस के एक्सक्लूजंस (दायरे से बाहर) को तर्कसंगत और मानकीकृत बनाना है। इरडा ने इसके लिए वर्किंग ग्रुप बनाया था। ग्रुप की सिफारिशें जांचने के बाद गाइडलाइंस जारी करने का प्रस्ताव दिया है।

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