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भास्कर एक्सप्लेनर:अस्तित्व में आने से पहले से चल रहा है इजराइल का फिलिस्तीन से संघर्ष, पहले विश्वयुद्ध से अब तक कब-क्या हुआ? तस्वीरों में जानें पूरी कहानी

3 महीने पहलेलेखक: आबिद खान
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फिलिस्तीन और इजराइल के बीच सोमवार से शुरू हुआ संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसमें अब तक 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। गाजा की हेल्थ मिनिस्ट्री ने बताया कि मरने वाले 65 लोगों में 16 बच्चे और 5 महिलाएं शामिल हैं। हमास की ओर से किए गए रॉकेट हमले में इजराइल के भी 7 लोगों की मौत हुई है। इनमें एक भारतीय महिला भी शामिल है। इस बीच अमेरिका ने दोनों देशों से बात कर संघर्ष को खत्म करने की अपील की है।

इजराइल-फिलिस्तीन के बीच चला आ रहा ये विवाद जितना पुराना है, उतना जटिल भी है। फोटोज के जरिए समझते हैं इस विवाद की वजह और साल दर साल ये विवाद कैसे बढ़ता रहा…

ये मैप प्रथम विश्वयुद्ध के पहले का है। इसमें दिख रहे ओटोमान साम्राज्य में उस वक्त फिलहाल इजराइल, फिलिस्तीन, मिस्र, तुर्की समेत आसपास के कई देश आते थे।
ये मैप प्रथम विश्वयुद्ध के पहले का है। इसमें दिख रहे ओटोमान साम्राज्य में उस वक्त फिलहाल इजराइल, फिलिस्तीन, मिस्र, तुर्की समेत आसपास के कई देश आते थे।

पहले विश्वयुद्ध में ब्रिटेन ने ओटोमान को जीत लिया। 1917 में ब्रिटेन ने एक घोषणा की जिसमें कहा गया कि ब्रिटेन फिलिस्तीन को यहूदियों की मातृभूमि बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसे बाल्फोर डिक्लेरेशन कहा जाता है।

1917 में कनाडा में बाल्फोर डिक्लेरेशन के समर्थन में मार्च करते लोग।
1917 में कनाडा में बाल्फोर डिक्लेरेशन के समर्थन में मार्च करते लोग।

साल 1945 तक ये इलाका ब्रिटेन के कब्जे में रहा। इस दौरान यूरोप के अलग-अलग देशों से यहूदी यहां आकर बसते रहे। इस दौरान फिलिस्तीनियों और यहूदियों में कई संघर्ष होते रहे। ब्रिटेन के ऊपर यहूदियों के पुनर्वास का दबाव बढ़ने लगा। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने ये मामला यूनाइटेड नेशन को सौंप दिया।

फिलिस्तीन में यूरोप से आए यहूदी लोग।
फिलिस्तीन में यूरोप से आए यहूदी लोग।

1947 में यूनाइटेड नेशन ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांट दिया। एक अरब राज्य और दूसरा हिस्सा बना इजराइल। यरुशलम को अंतरराष्ट्रीय सरकार के कब्जे में रखा गया। विवाद की एक बड़ी वजह यरुशलम शहर भी है।

1949 में इजराइल UN का हिस्सा बना।
1949 में इजराइल UN का हिस्सा बना।

1948 में इजराइल ने खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। अगले ही दिन अरब देशों ने इजराइल पर हमला कर दिया। ये युद्ध करीब 15 महीनों तक चला। 1949 में एक संधि के साथ युद्ध खत्म हुआ। इजराइल ने युद्ध जीत लिया। 7 लाख के करीब फिलिस्तीनी शरणार्थी बन गए।

युद्ध के दौरान फिलिस्तीन से पलायन करते लोग।
युद्ध के दौरान फिलिस्तीन से पलायन करते लोग।

1954 में मिस्र ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर इजराइल के जहाजों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी। इस वजह से 1956 में अरब सेना और इजराइल के बीच दूसरा युद्ध हुआ। इजराइल ने गाजा पट्टी और मिस्र के सिनाई इलाके पर कब्जा कर लिया।

1956 युद्ध के दौरान की तस्वीर
1956 युद्ध के दौरान की तस्वीर

1964 में फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन बना। इस बीच अरब देशों और इजराइल के बीच कई बातों को लेकर संघर्ष होता रहा। इस संघर्ष ने 1967 में युद्ध का रूप ले लिया। 6 दिन तक चले इस युद्ध में अरब देशों को जान-माल और जमीन का नुकसान हुआ। इजराइल ने वेस्ट बैंक, गोलन हाइट्स और पूर्वी यरुशलम को अपने कब्जे में ले लिया।

1967 के युद्ध के दौरान गोलन हाइट्स की तरफ बढ़ते इजराइली टैंक
1967 के युद्ध के दौरान गोलन हाइट्स की तरफ बढ़ते इजराइली टैंक

1972 में म्यूनिख ओलिंपिक में इजराइली खिलाड़ियों के ऊपर पीएलओ के 8 आतंकियों ने हमला कर दिया। 11 इजराइली खिलाड़ियों को बंधक बनाकर उनकी हत्या कर दी।

म्यूनिख ओलिंपिक के दौरान हुए आतंकी हमले का एक हमलावर
म्यूनिख ओलिंपिक के दौरान हुए आतंकी हमले का एक हमलावर

1987 में फिलिस्तीन की ओर से पहला इंतिफादा (विरोध प्रदर्शन और छोटे संघर्ष) शुरू किया गया। इस दौरान फिलिस्तीन और इजराइल के बीच भयंकर हिंसक झड़पें हुईं। 1993 में ओस्लो में समझौते के साथ ये संघर्ष थोड़ा कम हुआ।

मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए इजराइली प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन, विदेश मंत्री शिमोन पेरेज और फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात को 1994 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।
मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए इजराइली प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन, विदेश मंत्री शिमोन पेरेज और फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात को 1994 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।

2002 में एक आत्मघाती हमले के साथ दूसरे इंतिफादा की शुरुआत हुई। माना जाता है कि ये 2005 तक चला। इसी साल इजराइल ने गाजा पर से सेना के नियंत्रण को खत्म किया। हालांकि हवाई मार्ग, जल मार्ग और बॉर्डर पर इजराइली सेना का नियंत्रण जारी रहा।

इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते लोग।
इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते लोग।

2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात का समर्थन नहीं करता।

जनवरी 2020 में एक मुलाकात के दौरान इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
जनवरी 2020 में एक मुलाकात के दौरान इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
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