बंटवारा / एक महीने पहले तय हो गया था 15 अगस्त को भारत दो भागों में बंटेगा



It was decided a month ago, on 15 August, India will divide into two.
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It was decided a month ago, on 15 August, India will divide into two.

  • 18 जुलाई 1947 को इंग्लैंड की रानी ने इंडिपेंडेंस अधिनियम पर हस्ताक्षर किए थे, कागजों में तभी आजाद हो गया था भारत
  • फरवरी से जुलाई के 6 महीने में पूरा हुआ आजादी का सफर

Dainik Bhaskar

Aug 24, 2019, 04:35 PM IST

18 जुलाई 1947 को भारतीय आजादी के बिल पर इंग्लैंड के राजा ने हस्ताक्षर किए थे। यानी भारत आधिकारिक तौर पर 18 जुलाई 1947 को आजाद हो गया था। इसके पहले 4 जुलाई को इंडियन इंडिपेंडेंस बिल ब्रिटेन की संसद में पेश किया गया था। बिल की प्रस्तावना से साफ था कि उद्देश्य भारत की आजादी नहीं, बल्कि उसे बांटना है। 


इंडिपेंडेंस अधिनियम के अनुसार, 15 अगस्त तक भारत को दो स्वतंत्र हिस्सों में बांट देना था। यह तारीख लॉर्ड माउंटबेटन ने इसलिए तय की थी, क्योंकि दो साल पहले इसी दिन जापान के राजा हीरोहितो ने रेडियो पर जापान के समर्पण की घोषणा की थी। इस समर्पण की घोषणा के बाद दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया था। डॉ डीडी बासू अपनी किताब-इंट्रोडक्शन टू द कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में लिखते हैं कि 18 जुलाई की तारीख भारत की आजादी के अलावा इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह बर्तानिया ताकत के उदय और अस्त का दिन है।

 

18 जुलाई 1536 को रोमन चर्च के पोप के प्रभुत्व को ब्रिटेन के राजा हेनरी VIII की संसद ने इंग्लैंड में समाप्त कर दिया था। इसके बाद से ब्रिटेन प्रत्यक्ष तौर पर यूरोपीय ताकतों का प्रतिद्वंद्वी बन गया। धीरे-धीरे वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन गया। लेकिन 411 साल बाद 18 जुलाई को ही ब्रिटेन की संसद ने इंग्लैंड इंडियन इंडिपेंडेंस बिल पारित किया। इस बिल के पास होते ही इंग्लैंड वैश्विक ताकतों की प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया। 


भारत की पराधीनता और स्वतंत्रता की कहानी इंग्लैंड की संसद द्वारा पारित किए गए दो अधिनियमों की कहानी है। पहला 1858 में गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित किया गया था। इसके माध्यम से संपूर्ण भारत की बागडोर ईस्ट इंडिया कंपनी से हटकर ब्रिटेन की रानी के हाथ में आ गई थी। दूसरा, 4 जुलाई को ब्रिटेन की संसद में पेश इंडियन इंडिपेंडेंस बिल था। बिल की प्रस्तावना से साफ था कि उद्देश्य भारत की आजादी नहीं, बल्कि उसे बांटना है।

 

छह महीने में पूरा हुआ आजादी मिलने का सफर

  • 20 फरवरी 1947 को बर्तानिया सरकार ने घोषणा की कि 1948 के जून के अंत तक अंग्रेजी हुकूमत का अंत हो जाएगा।
  • 3 जून 1947 को माउंटबेटन प्लान की घोषणा कर दी गई। इसके अनुसार, बंगाल और पंजाब के चुने हुए नेता दो हिस्सों (हिंदू और मुसलमान) में वोट करेंगे कि इन दो सूबों का बंटवारा हो या न हो। मुसलमान बाहुल्य क्षेत्रों के नेताओं ने बंटवारा चुना।
  • 4 जुलाई को आनन-फानन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लिमेंट एेटली ने हाउस ऑफ कॉमंस में भारत की आजादी का बिल पेश कर दिया। 10 जुलाई 1947 को पार्लियामेंट में बहस हुई और 16 जुलाई को पास बिल कर दिया गया। 18 जुलाई को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज VI ने बिल पर साइन कर दिया।  

17 अगस्त को तय हुआ था कहां तक भारत, कहां से पाकिस्तान
14 अगस्त की मध्यरात्रि को वायसराय हाउस (मौजूदा राष्ट्रपति भवन) से जवाहर लाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ दिया था। तब नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे। देश के प्रधानमंत्री वे अगले दिन यानी 15 अगस्त को बने थे। उस दिन पूरा भारत जश्न के मूड में था। लोग एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे थे। 15 अगस्त, 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने ऑफिस में काम किया। दोपहर में नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और बाद में इंडिया गेट के पास प्रिसेंज गार्डन में एक सभा को संबोधित किया। लेकिन लाल किले से झंडा उस दिन नहीं फहराया।

 

15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। लोकसभा सचिवालय के एक शोधपत्र के मुताबिक, नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था। 15 अगस्त तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण भी नहीं हुआ था। इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ। भारत 15  अगस्त को आज़ाद जरूर हो गया, लेकिन उसका अपना कोई राष्ट्रगान नहीं था। रवींद्रनाथ टैगोर जन-गण-मन 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया।

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