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प्रोफेसर की इस फेसबुक पोस्ट को लेकर मचा हंगामा, लड़कों को समझा रहे थे वर्जिन वाइफ की अहमियत, विवाद बढ़ने पर डिलीट करनी पड़ी पोस्ट / प्रोफेसर की इस फेसबुक पोस्ट को लेकर मचा हंगामा, लड़कों को समझा रहे थे वर्जिन वाइफ की अहमियत, विवाद बढ़ने पर डिलीट करनी पड़ी पोस्ट

dainikbhaskar.com

Jan 14, 2019, 01:04 PM IST

प्रोफेसर ने वर्जिन लड़कियों की इस चीज से की तुलना, हंगामा मचा तो दी ये सफाई

Jadavpur University professor posts about Virgin girl on Facebook and deletes it

कोलकाता. Jadavpur University Professor Posts about Virgin girl on Facebook:पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की फेसबुक पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उनकी ये पोस्ट लड़कों को वर्जिन वाइफ की अहमियत बताते हुए की है, जिसे लेकर प्रोफेसर को काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हंगामा मचने के बाद प्रोफेसर ने पोस्ट तो डिलीट कर दी है, लेकिन वो इस बात पर अड़े हुए हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी उनका अधिकारी है और उन्होंने सिर्फ अपने विचार ही रखे थे।

FB पोस्ट में क्या लिखा ?
- जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कनक सरकार यहां इंटरनेशनल रिलेशंस पढ़ाते हैं। उनकी फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
- उन्होंने पढ़े-लिखे युवाओं की सोशल काउंसिलिंग का हवाला देते हुए वर्जिन दुल्हन की अहमियत समझाई। उन्होंने पोस्ट में लड़की की तुलना सीलबंद बोतल से की है।
- प्रोफेसर ने लिखा, ''वर्जिन लड़की सीलबंद बोतल या सीलबंद पैकेट की तरह होती है। क्या आप कोल्ड ड्रिंक की बोतल या बिस्किट का पैकेट सील टूटी होने पर भी खरीद लेते हैं?''
- उन्होंने आगे लिखा, ''एक लड़की जन्म से ही बॉयोलॉजिकली सील होती है, जब तक कि उसे खोला न जाए। वर्जिन लड़की में वैल्यूज, कल्चर और सेशुअल हाइजीन होता है।''

पोस्ट डिलीट कर दी ये सफाई
- इस पोस्ट को लेकर हंगामा मचने के बाद सरकार ने अपनी पोस्ट डिलीट कर दी। हालांकि, लोगों ने इसके स्क्रीनशॉट्स पहले से ले लिए थे और इन्हें तेजी से शेयर किया जाने लगा।
- हालांकि, इस बात पर वो अब भी अड़े हैं कि उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी बताते हुए अपना अधिकार बताया। सरकार ने कहा कि उन्होंने सिर्फ अपने विचार रखे थे।
- आलोचना होने पर उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ''मैंने पोस्ट में अपने निजी विचार लिखे। सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट के सेक्शन 66ए को वापस ले लिया है और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार दे दिया है।''
- उन्होंने लिखा, ''मैंने किसी व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी सबूत के नहीं लिखा है। मैं सोशल रिसर्चर हूं और समाज की भलाई के लिए लिख रहा हूं। मैंने महिलाओं के समर्थन में कई पोस्ट लिखे हैं।''

बयान को लेकर सबने घेरा
- प्रोफेसर सरकार के साथियों इस मामले से खुद को अलग कर लिया है। वहीं, टीचर्स एसोसिएशन ने उनके कमेंट्स को सेक्सिस्ट बताते हुए आलोचना की है।
- एजुकेशनिस्ट अमल मुखोपाध्याय ने कहा कि जब तक हम महिलाओं का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक हम अपनी वैल्यूज को आगे कैसे बढ़ाएंगे।
- वहीं राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन लीना गंगोपाध्याय ने कहा कि ऐसे मामलों से पता चलता है कि कुछ लोगों की मानसिकता में कितना कम बदलाव हुआ है।
- उन्होंने कहा कुछ लोग महिलाओं को इसी तरह से देखते हैं और ऐसे बयानों से बार-बार ये बात साफ हो जाती है। तकलीफ की बात ये है कि ये एक एजुकेटेड सख्स ने दिया है।

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