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गिलानी की लाश दफनाने को लेकर विवाद:बेटों का आरोप- आखिरी रस्में पूरी नहीं करने दी गईं, पुलिस ने कहा- पाकिस्तानी एजेंडा चला रहे गिलानी के बेटे

श्रीनगर5 महीने पहले
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अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद उनके परिवार ने शव दफनाने को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस पर आरोप लगाए थे। परिवार के लोगों का आरोप था कि उन्हें दफनाने से पहले गुस्ल और दूसरी रस्में नहीं करने दी गईं। पुलिस ने शव छीनकर परिवार के लोगों की गैर-मौजूदगी में दफना दिया। इस मामले में पुलिस ने आज बयान जारी कर आरोपों का खंडन किया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है, गिलानी के दोनों बेटों ने अपने पिता को दफनाने के लिए कब्रिस्तान जाने से इनकार कर दिया था। इससे साफ जाहिर है कि अपने पिता के लिए प्रेम और सम्मान की बजाए वे पाकिस्तान के एजेंडे के प्रति अधिक वफादार हैं।

अपनी बात से मुकर गए गिलानी के बेटे
पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि गिलानी की मौत के तुरंत बाद कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) के विजय कुमार, पुलिस अधीक्षक (SP) और सहायक पुलिस अधीक्षक ने गिलानी के दोनों बेटों से मुलाकात की।

यह मुलाकात उनके हैदरपोरा स्थित आवास पर देर रात करीब 11 बजे हुई। पुलिस अधिकारियों ने उनके पिता के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए रात में ही शव दफनाने की अपील की।

गिलानी के दोनों बेटे पुलिस अधिकारियों की बात से सहमत हो गए और रिश्तेदारों के आने तक 2 घंटे इंतजार करने को कहा। IGP कश्मीर ने व्यक्तिगत रूप से कुछ रिश्तेदारों से बात की और यह सुनिश्चित किया वे गिलानी के घर तक सुरक्षित पहुंच सकें।

हालांकि, 3 घंटे बाद संभवत: पाकिस्तान और उपद्रवियों के दबाव में गिलानी के बेटे अपनी बात से पलट गए। पुलिस ने गिलानी के गुस्ल से लेकर उन्हें हैदरपोरा कब्रिस्तान में दफनाये जाने तक का वीडियो भी जारी किया है।

लगाए गए देश विरोधी नारे
गिलानी के शव को पाकिस्तान के झंडे में लपेटा गया और पाकिस्तान के पक्ष में जोरदार नारे लगाए। गिलानी के बेटों ने पड़ोसियों को बाहर आने के लिए उकसाया और देश विरोधी नारे लगाने लगे। पुलिस के बहुत समझाने के बाद परिजन शव को सुबह जल्दी कब्रिस्तान ले गए। इंतिजामिया कमेटी के सदस्यों और स्थानीय इमाम की मौजूदगी में सम्मान के साथ गिलानी को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

पुलिस ने शव को पाकिस्तानी झंडे में लपेटने और देश विरोधी नारे लगाने को लेकर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम (यूएपीए) कानून के तहत मामला दर्ज किया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धड़े और कई नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की थी।

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