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एनालिसिस /घरेलू कॉम्पीटिशन ने जेट एयरवेज का खर्च बढ़ाया और कंपनी दूसरी बार आर्थिक संकट में आ गई



Jet Airways's expenditure rise due to competition airline fall in financial crisis second time
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Jet Airways's expenditure rise due to competition airline fall in financial crisis second time

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेट एयरवेज किंगफिशर एयरलाइन्स के बंद होने का फायदा नहीं उठा पाई
  • कॉम्पीटिशन के दबाव में 10 साल में उसके विमान 81 से बढ़कर 119 हो गए, रुपया कमजोर होने से रखरखाव महंगा हुआ
  • 4 साल में इंडिगो का मार्केट शेयर 27.4% से बढ़कर 43.4% हुआ, लेकिन जेट का 19.9% से घटकर 10% रह गया
     

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2019, 07:54 AM IST

मुंबई. 26 साल पुरानी जेट एयरवेज को दूसरी बार आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। इस बार फाउंडर और चेयरमैन नरेश गोयल और पत्नी अनीता गोयल को एयरलाइन के बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा है। इससे पहले 2013 में आर्थिक संकट के वक्त जेट को अबू धाबी की एतिहाद एयरवेज को 24% शेयर बेचने पड़े थे। भास्कर प्लस ऐप ने एविएशन एक्सपर्ट हर्षवर्धन और एविएशन डिपार्टमेंट के पूर्व सचिव सनत कौल से बातचीत कर जेट के मौजूदा संकट की वजह जानने की कोशिश की।

  • जेट के मौजूदा संकट की 3 वजह

    • पहली और सबसे बड़ी वजह है घरेलू कॉम्पीटिशन। बीते कुछ साल में जेट एयरवेज ने सस्ते किराए की योजनाएं शुरू करने की कोशिश की, लेकिन इससे उसकी आमदनी नहीं बढ़ पाई। किंगफिशर एयरलाइन्स के बंद होने का भी जेट एयरवेज फायदा नहीं उठा पाई। इंडिगो ने यह मौका भुना लिया। घरेलू कॉम्पीटिशन के दबाव में 10 साल में जेट एयरवेज ने अपने बेड़े में विमानों की संख्या 81 से बढ़ाकर 119 कर दी। 
    • पिछले साल ब्रेंट क्रूड महंगा होने की वजह से एयरलाइन का हवाई ईंधन खर्च बढ़कर 6,953.25 करोड़ रुपए पहुंच गया। 2017 में यह 5,935.93 करोड़ रुपए था। 
    • 2018 में डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था। इससे जेट एयरवेज का विदेशी मुद्रा खर्च भी बढ़ा। दरअसल, हवाई ईंधन खरीदने के लिए और विदेशी लीजदाताओं को रकम चुकाने के लिए कंपनियों को डॉलर में भुगतान करना होता है।

  • जेट एयरवेज 2013 में भी प्रतिस्पर्धा की वजह से संकट में फंसी थी

    2009 से 2012 के बीच जेट एयरवेज घरेलू की बजाय अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर ज्यादा फोकस कर रही थी। इस बीच सस्ती हवाई सेवा वाली इंडिगो जेट की सबसे बड़ी कॉम्पीटिटर बन गई। 31 दिसंबर 2012 तक जेट एयरवेज पर 11,200 करोड़ रुपए का कर्ज था। मई 2013 में इसने 2,058 करोड़ रुपए में एतिहाद को 24% शेयर बेच दिए। इस रकम से जेट को कर्ज कम करने में मदद मिली।

  • किंगफिशर बंद होने का फायदा नहीं उठा पाई जेट एयरवेज

    2012 में किंगफिशर बंद हुई तो जेट ने घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ाकर फायदा नहीं उठाया, बल्कि इंडिगो ने इस मौके को भुना लिया। 2014 में इंडिगो का मार्केट शेयर 27.4% था, जो अब 43.4% हो गया है। इस दौरान जेट एयरवेज 2014 में 19.9% मार्केट शेयर से फिसलकर अभी 10% पर आ गई है।

  • एक साल में जेट का मार्केट शेयर 5% घटा

    एयरलाइन फरवरी 2018 में मार्केट शेयर फरवरी 2019 में मार्केट शेयर
    इंडिगो 39.9% 43.4%
    स्पाइसजेट 12.4% 13.7%
    एयर इंडिया 13.2% 12.8%
    जेट एयरवेज 14.6% 10.0%
    गो एयर 9.5% 9.0%
    एयर एशिया 4.2% 5.1%
    विस्तारा 3.5% 4.0%
    ट्रूजेट 0.3% 0.5%

    (सोर्स- डीजीसीए)

  • जेट एयरवेज पिछले 12 साल में सिर्फ 5 बार फायदे में रही

    साल यात्री संख्या घाटा/मुनाफा (रुपए)
    2007-08 1.14 करोड़ -221.18 करोड़
    2008-09 1.10 करोड़ +52.99 करोड़
    2009-10 1.19 करोड़ +58.58 करोड़
    2010-11 1.46 करोड़ +9.69 करोड़
    2011-12 1.72 करोड़ -298.12 करोड़
    2012-13 1.68 करोड़ -495.53 करोड़
    2013-14 1.71 करोड़ -2153.57 करोड़
    2014-15 1.94 करोड़ -1728.99 करोड़
    2015-16 2.33 करोड़ +397.16 करोड़
    2016-17 2.43 करोड़ +36.8 करोड़
    2017-18 2.70 करोड़ -1036 करोड़

    सोर्स - डीजीसीए

  • जेट एयरवेज के संकट पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

    • एविएशन एक्सपर्ट सनत कौल कहते हैं एयरलाइन कंपनियों का सबसे ज्यादा खर्च फ्यूल पर होता है। विमानों की लीज, मेंटेनेंस, लोन, कर्मचारियों की सैलरी, पायलट की सैलरी वगैरह पर भी खर्चा होता है। कॉम्पीटिशन की वजह से कंपनियां किराया नहीं बढ़ा सकतीं। कंपनियों के पास जरूरत से ज्यादा विमान हैं। इनकी कॉस्ट निकालने के लिए कंपनियां किराया बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन किराया बढ़ने पर यात्रियों की संख्या भी कम हो जाती है। इसलिए कॉम्पीटिशन के दबाव में कंपनियां किराया नहीं बढ़ा पातीं। 
    • 30 साल से एविएशन इंडस्ट्री में काम कर रहे हर्षवर्धन भी यही बताते हैं कि जेट एयरवेज ने कॉम्पीटिशन के दबाव में आकर मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए जरूरत से ज्यादा विमान लिए। इससे उसका खर्च बढ़ गया। भारत में ज्यादातर यात्री कम पैसों में हवाई सफर करना पसंद करते हैं, लिहाजा प्राइस वॉर की वजह से कंपनी ने किराए में बढ़ोतरी नहीं की। इससे कंपनी का नुकसान बढ़ता चला गया और घाटे में चली गई। कुछ साल में तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। एयरलाइन कंपनियां लीज पर लिए गए विमानों का पैसा, मेंटेनेंस का पैसा डॉलर के जरिए चुकाती हैं, इससे उनकी कॉस्ट बढ़ती है।

  • जेट एयरवेज के संकट से किसे फायदा और किसे नुकसान?

    सनत कौल कहते हैं कि जेट एयरवेज के संकट से प्रतिद्वंदी कंपनियों को फायदा है। उनका कहना है कि अगर जेट एयरवेज बंद होती है या उसके ज्यादा से ज्यादा विमान ग्राउंडेड हो जाते हैं तो इससे प्रतिद्वंदी कंपनियों को फायदा होगा क्योंकि, इसके ग्राहक दूसरी एयरलाइंस में शिफ्ट हो जाएंगे। लेकिन, यात्रियों को सबसे बड़ा नुकसान होगा क्योंकि विमानों की कमी आएगी जिससे दूसरी कंपनियां किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं।

  • किंगफिशर और जेट एयरवेज का मामला कितना अलग है?

    हर्षवर्धन बताते हैं कि दोनों का मामला एक जैसा है, लेकिन किंगफिशर 2005 में शुरू हुई और उसने जरूरत से ज्यादा खर्चा किया, जिसकी वजह से उसका पतन जल्दी हो गया। हालांकि, जेट एयरवेज इस मामले में अच्छी है, क्योंकि यह 26 साल पुरानी कंपनी है और उसने काफी हद तक खुद को बंद होने से बचाए रखा। 2012 से 2016 तक तेल की कीमतें थोड़ी कम रहीं और इस बीच रुपया भी मजबूत रहा, जिससे कंपनी को इकोनॉमिक सपोर्ट मिल गया। लेकिन, जब दोबारा तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ तो हालत खराब हो गई।

  • अब आगे क्या होगा?

    हर्षवर्धन का कहना है कि नरेश गोयल के इस्तीफे के बाद बैंक थोड़ी राहत दे सकते हैं, लेकिन बिना निवेशक मिले जेट एयरवेज ज्यादा समय तक नहीं चल सकती। गोयल के इस्तीफे के बाद अब जेट एयरवेज सरकार और बैंकों की जिम्मेदारी हो गई है।

  • नरेश गोयल की हिस्सेदारी 51% से घटकर 25% होगी

    एसबीआई के नेतृत्व वाला कर्जदाताओं का कंसोर्शियम जेट एयरवेज की 51% हिस्सेदारी लेकर एयरलाइन को 1,500 करोड़ रुपए की फंडिंग तुरंत मुहैया करवाने के लिए सहमत हो गया है। इसके बाद गोयल की हिस्सेदारी 51% से घटकर 25% और एतिहाद की 24% से घटकर 12% रह जाएगी।

  • गोयल को फिर से शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का मौका मिलेगा

    एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार का कहना है कि बैंक अगले महीने जेट का नया निवेशक तलाशने के लिए बोलियां आमंत्रित करेगा और मई के आखिर तक निवेशक चुन लिया जाएगा। बोली में कोई वित्तीय निवेशक, एयरलाइन, नरेश गोयल खुद और एतिहाद एयरवेज भी हिस्सा ले सकते हैं।

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