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एविएशन / जेट एयरवेज के सीनियर पायलट्स के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो सकता है

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  • बोइंग 777 और एयरबस 330 के करीब 600 पायलट्स को ज्यादा परेशानी के आसार
  • एक्सपर्ट की राय- जेट के कर्मचारियों को छोटे शहरों में विकल्प तलाशने चाहिए

Apr 22, 2019, 09:10 AM IST

नई दिल्ली. जेट एयरवेज की उड़ानें बंद होने के बाद नई नौकरी तलाशने में सबसे अधिक परेशानी बोइंग 777 और एयरबस 330 के करीब 600 सीनियर पायलटों को हो सकती है। अगर एअर इंडिया इन विमानों को लीज पर नहीं लेती है या जेट की नीलामी में समय लगता है, तो इन पायलटों को नौकरी के लिए दूसरे देश भी जाना पड़ सकता है। हालांकि नागरिक उड्‌डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के अनुसार इंडस्ट्री में पायलटों की सख्त जरूरत है। इन्हें जॉब जरूर मिल जाएगी।

बोइंग 777, एयरबस 330 के पायलट्स की सैलरी 25-30% ज्यादा होती है

जेट के पास 10 बोइंग 777 और 8 एयरबस 330 विमान हैं। 280 से 350 सीटर ये विमान मुख्यत: इंटरनेशनल फ्लाइट में इस्तेमाल होते हैं। भारत में बोइंग 777 जेट के अलावा केवल एअर इंडिया के पास हैं, जबकि एयरबस 330 केवल जेट के पास हैं। इन्हें उड़ाने वाले सीनियर पायलट्स होते हैं, जो केवल बड़े विमान उड़ाते हैं। इनकी सैलरी 25-30% ज्यादा होती है।

सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट के सेक्रेटरी और जेट के सीनियर पायलट अश्वनी त्यागी ने कहा, अगर एअर इंडिया इन्हें लीज पर नहीं लेती है तो पालयटों के सामने दो ही विकल्प होंगे। पहला, कोरियन एयरलाइंस और गल्फ देशों की अमीरात और कतर जैसी एयरलाइंस में नौकरी तलाशें। दूसरा, कम सैलरी में छोटे विमान उड़ाएं। दूसरे विकल्प में एक तकनीकी समस्या है। पायलट्स को नई कंपनी में ट्रेनिंग कराई जाती है। पायलट अगर वही मॉडल का विमान उड़ाता है तो एक माह की ट्रेनिंग होती है। विमान दूसरे मॉडल का है तो 6 माह की ट्रेनिंग होती है।

कंपनियों के लिए भर्तियां करने वाली फर्म टीमलीज सर्विसेज की सह-संस्थापक ऋतुपर्ण चक्रवर्ती ने कहा, ग्राउंड स्टाफ, क्रू और पायलट्स की सप्लाई, डिमांड की तुलना में कम है। इसलिए दूसरी एयरलाइंस जेट के कर्मचारियों को आसानी रख सकती हैं। छोटे शहरों में एयर कनेक्टिविटी शुरू होने से वहां कर्मचारियों की काफी डिमांड है। जेट के कर्मचारियों को वहां विकल्प तलाशना चाहिए। जेट में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों समेत कुल 23,000 कर्मचारी हैं।

एअर इंडिया की सब्सिडियरी एअर इंडिया एक्सप्रेस भी जेट के कुछ बोइंग 737 विमान लीज पर लेना चाहती है। एयरलाइन के सीईओ श्याम सुंदर ने बताया कि विमानों के साथ जेट के 50 पायलट भी लेने का विचार है। इनमें से अब तक 20 को रखा जा चुका है। बाकी पर फैसला जल्द लिया जाएगा।

जेट एयरवेज की नीलामी अगर सफल नहीं होती है तो बैंक 8,500 करोड़ रुपए की वसूली के लिए दिवालिया कोर्ट जाने के पक्ष में नहीं हैं। वहां केस निपटाने की समयबद्ध प्रक्रिया होती है। इसमें एक साल से ज्यादा लग सकता है। जेट के पास अपने 16 विमान और दूसरे एसेट हैं। बैंकों को लगता है कि इनकी उन्हें अच्छी कीमत मिल सकती है। बैंकों ने जेट के 75% शेयर बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। एतिहाद एयरवेज, टीपीजी कैपिटल, इंडिगो पार्टनर्स और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड ने रुचि दिखाई है।

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