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जिनपिंग को दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए, 2 घंटे तक चले डिनर के दौरान मोदी ने चीन के राष्ट्रपति से बात की

10 महीने पहले
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पंच रथ स्थल पर चर्चा के दौरान मोदी और जिनपिंग
  • तमिल वेशभूषा पहन जिनपिंग के स्वागत के लिए पहुंचे मोदी, पंच रथ स्थल पर नारियल पानी पिया
  • तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम में जिनपिंग-मोदी के बीच यह दूसरी अनौपचारिक मुलाकात
  • शी जिनपिंग ने ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं के मुद्दे पर मोदी के साथ चर्चा की इच्छा जताई
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चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को महाबलीपुरम पहुंचे। मोदी यहां चीन के राष्ट्रपति के स्वागत के लिए पारंपरिक तमिल वेशभूषा में पहुंचे। उन्होंने मामल्लपुरम में जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन कराए और इन स्थलों का महत्व समझाया। इसके बाद दोनों ने पंच रथ स्थल पर नारियल पानी पिया और अनौपचारिक बातचीत की शुरुआत की। महाबलीपुरम में सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद मोदी जिनपिंग को रात्रिभोज दिया।
 
जिनपिंग को रात्रिभोज में पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए। इनमें अर्चु विट्टा सांभर, थक्काली रसम, कडालाई कोरमा और हलवा शामिल थे। 2 घंटे तक चले इस डिनर में दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की।
 

मोदी-जिनपिंग ने आतंकवाद और कट्‌टरपंथ पर चिंता जताई
देर रात विदेश सचिव विजय गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिनभर की गतिविधियों की जानकारी दी। इसमें बताया गया कि शी जिनपिंग ने ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं के मुद्दे पर मोदी के साथ चर्चा की इच्छा जताई। मोदी-जिनपिंग ने आतंकवाद और कट्‌टरपंथ पर चिंता जताते हुए इस चुनौती से मिलकर लड़ने की जरूरत पर जोर दिया है। 
 

तीन भाषाओं में ट्वीट कर मोदी ने जिनपिंग का स्वागत किया
इससे पहले जिनपिंग का चेन्नई एयरपोर्ट पर भी स्वागत किया गया। मोदी और जिनपिंग की मुलाकात का कार्यक्रम करीब 6 घंटे तक चलेगा। इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति के बीच 40 मिनट तक वन टू वन मीटिंग होगी। जिनपिंग के चेन्नई पहुंचने पर मोदी ने अंग्रेजी, तमिल और मेंडेरिन में ट्वीट किया- भारत में आपका स्वागत है राष्ट्रपति जिनपिंग।
 

मोदी ने कहा- भारत-चीन के रिश्ते मजबूत होंगे
मोदी पहले ही चेन्नई पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात से भारत और चीन के रिश्तों को मजबूती मिलेगी। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में शुक्रवार और शनिवार को दोनों नेताओं की मुलाकात होगी। साथ ही चेन्नई के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। चेन्नई से महाबलीपुरम तक 5 हजार जवान तैनात किए गए हैं। रास्तों और कार्यक्रम स्थल पर 800 सीसीटीवी कैमरे लगे लगाए गए हैं। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने समुद्र तट से कुछ दूरी पर युद्धपोत तैनात किए हैं।
 

आतंकवाद, टेरर फंडिंग पर चर्चा संभव
जिनपिंग के साथ चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य भी भारत आएंगे। इस बैठक के लिए कोई एजेंडा तय नहीं है, लेकिन भारत-प्रशांत क्षेत्र, सीमा विवाद, आतंकवाद, कारोबारी असंतुलन, टेरर फंडिंग के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। इस दौरान कोई समझौता और एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन मोदी-जिनपिंग की ओर से साझा बयान जारी हो सकता है। मोदी पिछले साल अप्रैल में पहली अनौपचारिक बैठक के लिए चीन के वुहान गए थे। दोनों नेता बैंकॉक में 31 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच होने जा रहे आसियान समिट में भी मिलेंगे।
 

एयरपोर्ट को फूलों से सजाया

  • जिनपिंग के स्वागत की विशेष तैयारियां की गई थीं। चेन्नई एयरपोर्ट को पारंपरिक रूप से केले के पत्तों, फल-फूल मालाओं के साथ सजाया गया था। 2000 स्कूली छात्र जिनपिंग का मुखौटा पहनकर अंग्रेजी के शब्द वेलकम की मुद्रा में पहुंचे।
  • एयरपोर्ट से जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री मोदी होटल जाएंगे। वहां खाना खाने के बाद शाम करीब 5 बजे जिनिपंग 60 किमी दूर महाबलीपुरम पहुंचेंगे। वहां वह विश्व विरासत स्थल में शामिल शोर मंदिर, 7वीं सदी का अर्जुन का तपस्या स्मारक, पल्लव वंश द्वारा बनाए गए पंच रथ मंदिर देखेंगे। वहां से दोनों नेता डिनर के लिए जाएंगे। शनिवार सुबह प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद मोदी और जिनपिंग भोजन करेंगे। दोपहर में जिनपिंग चीन लौट जाएंगे।

 

चीन का महाबलीपुरम से ऐतिहासिक संबंध
तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी किनारे स्थित महाबलीपुरम शहर चेन्नई से करीब 60 किमी दूर है। पुरातत्त्वविद् एस राजावेलु के मुताबिक, इसकी स्थापना धार्मिक उद्देश्यों से 7वीं सदी में पल्लव वंश के राजा नरसिंह वर्मन ने कराई थी। नरसिंह ने मामल्ल की उपाधि धारण की थी, इसलिए इसे मामल्लपुरम के नाम से भी जाना जाता है। यहां शोध के दौरान चीन, फारस और रोम के प्राचीन सिक्के बड़ी संख्या में मिले हैं। प्राचीन बंदरगाह वाले महाबलीपुरम का करीब 2000 साल पहले चीन के साथ खास संबंध था। पुरातत्वविद राजावेलू बताते हैं कि कि यहां बरामद हुए पहली और दूसरी सदी के मिट्टी के बर्तन हमें चीन के समुद्री व्यापार की जानकारी देते हैं। पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेनसांग कांचीपुरम आए थे। पल्लव शासकों ने चीन में अपने दूत भेजे थे।
 

यात्रा से पहले चीन ने कश्मीर मुद्दे पर अपना रुख बदला
जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने मंगलवार को कश्मीर मसले पर अपना रुख बदल लिया था। मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि इस मसले को द्विपक्षीय तरीके से हल किया जाना चाहिए। इससे पहले चीन ने कश्मीर मुद्दे पर में संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के मुताबिक हल निकाले जाने की बात कही थी। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दौरे के दौरान चीन ने कहा था कि कश्मीर के हालात पर उसकी नजर है।
 

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