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भास्कर 360° / जेएनयू में मारपीट, दीपिका का समर्थन; 1 करोड़ लोगाें ने रिएक्ट किया, सात दिन में 25 लाख ट्वीट

इलस्ट्रेशन 5 जनवरी को हुई घटना के आधार पर। इलस्ट्रेशन 5 जनवरी को हुई घटना के आधार पर।
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इलस्ट्रेशन 5 जनवरी को हुई घटना के आधार पर।इलस्ट्रेशन 5 जनवरी को हुई घटना के आधार पर।

  • बीते रविवार को जेएनयू में हुई मारपीट की घटना पूरे हफ्ते सबसे चर्चित खबर बनी रही
  • अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी जेएनयू पहुंची और छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया

दैनिक भास्कर

Jan 12, 2020, 10:24 AM IST

नई दिल्ली. बीते एक हफ्ते से देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी चर्चाओं में है। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 5 जनवरी की शाम छात्र-छात्राओं को नकाबपोश बदमाशों ने पीटा। विश्वविद्यालय से लहूलुहान छात्रों की तस्वीरें सामने आने लगीं। जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष भी इन घायलों में से एक थीं। इन छात्र-छात्राओं के समर्थन में पाकिस्तान में भी विरोध-प्रदर्शन किया गया। इतना ही नहीं, फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी जेएनयू पहुंची और छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया। दरअसल इस घटनाक्रम के लिहाज से यह पूरा हफ्ता ही चौंकाने वाला रहा। पहले मारपीट, फिर घायल छात्र-छात्राओं के खिलाफ एफआईआर। इस पूरे मामले में पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की है। एक अज्ञात लोगों के खिलाफ, बाकी दो आईशी समेत 20 लोगों के खिलाफ। भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की । जेएनयू से लेकर सोशल मीडिया तक...जाना किसके समर्थन में लोग क्या कह रहे हैं? पिछले सात दिनों से जेएनयू सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

पिछले सात दिनों में किए गए 25 लाख ट्वीट
जेएनयू की मारपीट, दीपिका के समर्थन से जुड़े 25 लाख ट्वीट पिछले सात दिनों में किए गए हैं। शटडाउन जेएनयू, स्टैंड विद जेएनयू, बाॅयकॉट छपाक...जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। एक वर्ग जहां जेएनयू छात्रों के साथ खड़ा है। वहीं दूसरा वर्ग छात्रों के समर्थन के लिए आईं दीपिका का विरोध कर रहा है। दस लाख से ज्यादा बार इन हैशटैगस पर लाइक, कमेंट किए गए हैं। भास्कर ने इस मुद्दे पर आरोपी बनाई गईं छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष से भी बात की। आईषी का आरोप है- जिन लोगों ने मारपीट की, उन्हें एफआईआर में अज्ञात बताया गया है, वहीं जो मारपीट का शिकार हुई है, उसी के खिलाफ नाम के साथ एफआईआर करा दी गई है। वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आईशी ने अन्य छात्रों के साथ मिलकर सर्वर रूम में तोड़फोड़ की है, ताकि विश्वविद्यालय से सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड नष्ट हो जाए।

आइए, जानते हैं जेएनयू में क्या हुआ था? कैसे हुआ था? और यह घटनाक्रम देश-दुनिया में कैसे ट्रेंड कर रहा है- सर्वर डाउन से तोड़फाेड़ तक

3 जनवरी : सर्वर रूम में झगड़ा
दोपहर 3 बजे लेफ्ट से जुड़े चार संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सर्वर रूम में स्टाफ से अभद्रता की। सर्वर डाउन कर दिया। जेएनयू ने शिकायत दर्ज कराई।

4 जनवरी : एफआईआर दर्ज
सुबह के समय सर्वर रूम में दोबारा घुसने की कोशिश। सिक्योरिटी गार्ड्स ने छात्रों को रोक दिया। दोपहर में छात्र  सर्वर रूम में घुसे और तोड़फोड़ की। जेएनयू ने एफआईआर दर्ज करवाई।

5 जनवरी : रजिस्ट्रेशन का विरोध
सुबह साढ़े 11 बजे स्कूल ऑफ सोशल साइंस के बाहर छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए बैठे थे। इसी दौरान लेफ्ट से जुड़े छात्र वहां पहुंचे और झगड़ा शुरू हो गया। दोपहर 3:45 बजे लेफ्ट से जुड़े छात्रों ने पेरियार हॉस्टल पर हमला किया। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष की पहचान इन्हीं हमलावरों में की गई है।

5 जनवरी : नकाबपोशों का हमला
शाम 5 बजे के ठीक बाद साबरमती टी पॉइंट पर मास्क लगाकर आए कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इन्होंने हॉस्टल्स में घुसकर छात्रों को पीटा। खासकर छात्रसंघ दफ्तर से जुड़े पदाधिकारियों को निशाना बनाया। साढ़े 5:30 बजे तक पुलिस को घटना की जानकारी मिल चुकी थी। लेकिन पुलिस को अंदर नहीं अाने दिया गया।  शाम 6:45 बजे जेएनयू प्रशासन से मंजूरी के बाद पुलिस कैंपस के अंदर आई। पूरे घटनाक्रम में 3 एफआईआर दर्ज कराई गई है। दो एफआईआर आईशी घोष के खिलाफ भी है। उन पर चार जनवरी को यूनिवर्सिटी के सर्वर रूम में तोड़फोड़ करने और सिक्योरिटी गार्डों पर हमले का आरोप है। - टाइमलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार।   

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष के आरोप

आईशी।

1. एफआईआर क्यों नहीं हुई?
- मैंने भी शिकायत दी थी लेकिन एफआईआर नहीं बनाई गई। मुझे पीटने वाले कौन हैं उन्हें जानती तो नहीं लेकिन यदि मेरे सामने आएंगे तो मैं उन्हें पहचान लूंगी।

2.  3 तारीख की घटना पर 5 को एफआईआर?
-पांच जनवरी को शाम 7.40 पर जब मैं ट्रामा सेंटर में अपनी जिंदगी के लिए जूझ रही थी तब अचानक रजिस्ट्रार को कैसे याद आया कि 3 जनवरी को सर्वर रूम वाली घटना को इससे जोड़ दो और पुलिस ने 8.05 पर एफआईआर दर्ज भी कर ली।

3. सर्वर रूम में एबीवीपी के कार्यकर्ता घुसे
-मेरे पास वीडियो क्लिप है जिस समय सर्वर रूम तहस नहस किया उसमें एबीवीपी कार्यकर्ता घुसते हुए दिख रहा है।

4. मारपीट हुई, फिर भी पुलिस क्यों नहीं आई?
-100 मीटर के दायरे में कोई भी धरना प्रदर्शन नहीं होना चाहिए-यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट का है। पेरियार हॉस्टल में मारपीट हुई, प्रशासन कहां था। पुलिस क्यों नहीं बुलाई।

5. संघ से जुड़े लोगों ने पीटा
-जब जेएनयू काउंसलर अपेक्षा प्रियदर्शनी से मारपीट हुई, तब एबीवीपी का शिवम वहां क्या कर रहा था। एसआईएस स्कूल में एक एमए स्टूडेंट को आरएसएस से जुड़े एक प्रोफेसर ने पीटा।

मैंने जो गलत किया, उसका सबूत दो
आईशी ने कहा कि 5 जनवरी की हिंसा अनजान लोगों के खिलाफ है जबकि जो एफआईआर प्रशासन ने मेरे खिलाफ लिखाई है उसमें कहा गया है कि मैंने सर्वर रूम में तोड़फोड़ की, तार खींच कर निकाल दिए, काट दिए।

जेएनयू के वीसी एम जगदीश कुमार के प्रत्यारोप

वीसी एम जगदीश कुमार।

1. सर्वर रूम में हमला क्यों किया गया?
- मुझे इस घटना के तार दो दिन पहले कम्युुनिकेशन एंड इंफोर्मेशन सिस्टम ऑफिस में हुई घटना से जुड़े नजर आते हैं। यह कैंपस का डेटा सेंटर है, कैंपस मेें होने वाली हर गतिविधि-स्टाफ की छुट्‌टी से लेकर मेडिकल सुविधा, एडमिशन के रजिस्ट्रेशन से लेकर सीसीटीवी फुटेज तक यहां लगे सर्वर-नेटवर्क में रिकॉर्ड होते रहते हैं। तीन तारीख को 10 से 12 छात्र जिन्होंने चेहरे ढके हुए थे, सर्वर रूम (डेटा सेंटर) को अपने कब्जे में ले लिया था।

2. सीसीटीवी रिकॉर्ड नष्ट करने की कोशिश
- सर्वर रूप में सैकड़ों तार हैं जिन्हें निकाल दिया गया, उन्हें दोबारा से जोड़ पाना अब बहुत कठिन है, सीसीटीवी डेटा इसी सेंटर से जुड़ा है। जो लोग डेटा सेंटर को तहस नहस करने के लिए जिम्मेदार हैं उन्होंने जानबूझकर डेटा सेंटर की वह हालत इसलिए की ताकि भविष्य में कोई घटना हो तो सीसीटीवी उसे रिकॉर्ड न रख पाए।

3. फीस पर बेवजह हंगामा कर रहे छात्र
- विवि की ट्यूशन फीस 300 रुपए प्रति वर्ष ही है। जहां तक हॉस्टल के यूटिलिटी व सर्विस चार्ज की बात है तो उसे भी वापस ले लिया गया है। केवल रूम रेंट को 10 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए महीने किया गया है। हजारों छात्र रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं जिन्हें उसे लेकर कोई आपत्ति नहीं है।

पहली बार है जब चेहरा छिपाकर विरोध हो रहा
वीसी ने कहा कि ये जेएनयू इतिहास की पहली  घटना है जब विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने अपने चेहरे पूरी तरह ढके हुए थे। मुझे आश्चर्य है कि यदि वे एक अच्छे कारण के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें अपने चेहरे ढंकने की क्या जरूरत है।

अकेले #JNU पर ही दस लाख लोगों ने किए लाइक, कमेंट

जेएनयू के मुद्दे पर पिछले सात दिन में इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफार्म्स (गूगल को छोड़कर) पर 25 लाख से अधिक लोगों ने बातचीत की । खास बात यह है कि  अकेले #जेएनयू पर ही 10 लाख लोगों ने रिएक्ट किया। इसमें महत्वपूर्ण यह है कि 7 प्रतिशत लोग इसके पक्ष में थे, लेकिन 53 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने कहीं न कहीं इस मुद्दे की या तो आलोचना की या फिर विवि प्रशासन, सरकार  अथवा इससे जुड़े लोगों पर सवाल खड़े किए।
 

सबसे ज्यादा सर्च किए गए  हैशटैग 


# जेएनयू : 10 लाख लोगाें ने इस पर बात की। सात फीसदी ने इसके पक्ष में बात की। वहीं 53 फीसदी लोगों ने इस घटना को लेकर या तो सरकार पर सवाल उठाए या छात्रों की आलोचना की।
# बॉयकॉट छपाक : 6.62 लाख लोगाें ने इस पर बात की। 8 फीसदी लोगों ने इसके पक्ष में बात की। वहीं 60 फीसदी लोगों ने दीपिका के जेएनयू जाने पर सवाल उठाए।
# शटडाउन जेएनयू : 1.41 लाख लोगाें ने इस पर बात की। 11 फीसदी लोगों ने इसके पक्ष में बात की। वहीं 44 फीसदी लोगों ने इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

अमेरिका में सर्वाधिक चर्चा
पड़ताल में एक बात और सामने आई है कि भारत के बाद सबसे ज्यादा इन मुद्दों पर अमेरिका में चर्चा हुई। 10 जनवरी को निकाले गए डेटा के अनुसार हैशटैग स्टैंड विद जेएनयू पर कुल 1.44 लाख लोगों ने बात की। इसमें 1,13,406 लोग भारत के थे जबकि 20,661 लोगों ने अमेरिका में इस पर चर्चा की। ऐसे ही हैशटैग बॉयकॉट छपाक के मुद्दे पर 542,645 भारतीयों ने चर्चा कि वहीं 91271 लोगों ने अमेरिका में बातचीत की। 

( नोट : इसमें ट्विटर, यूट्यूब का डेटा शामिल है। फेसबुक का डेटा शामिल नहीं है। )

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