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भास्कर एक्सप्लेनर:जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट पर भी प्रभावी, देश में यह 84% असरदार

10 महीने पहले
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अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिल गई है। - Dainik Bhaskar
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिल गई है।

अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिल गई है। इसे बेल्जियम स्थित जेनसन फार्मा इकाई ने बेथ इजरायल डीकोनेस मेडिकल सेंटर के साथ विकसित किया है। इसके पहले कोविशील्ड, कोवैक्सीन, रूस की स्पुतनिक-वी और अमेरिका की मॉडर्ना समेत चार वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। यहां जॉनसन एंड जॉनसन को लेकर सवाल और उनके जवाब...

ये वैक्सीन कैसे बनी है?
जॉनसन एंड जॉनसन ने इसे जेनसन (Ad26.COV2.S) नाम दिया है। कोरोनावायरस के जीन को एडीनोवायरस में मिलाकर बनाया गया है। सेल तक एंटीजन पहुंचाने के लिए वायरस का इस्तेमाल किया जाता है। ये सेल हमारे शरीर में स्पाइक प्रोटीन्स बनाते हैं। यही बाद में वायरस से लड़ने में इम्यून सिस्टम की मदद करती है।

यह कैसे काम करती है?
शरीर में पहुंचने पर यह बीमारी के खिलाफ एंटीबॉडीज तैयार करने का निर्देश देती है। नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन होने से जेनेटिक मटेरियल शरीर के भीतर अपनी कॉपीज नहीं बनाएगा। इसलिए वह लोगों को बीमार नहीं करती। जब ये एंटीबॉडीज बनाती है, तो असल वायरस को पहचान लेती हैं और उससे लड़ती हैं।

यह कितनी असरदार है?
भारत में इसे 84% असरदार बताया गया है। अमेरिकी ट्रायल्स में ये 72% और दक्षिण अफ्रीका में 64% प्रभावी मिली। इसके पहले चरण के ट्रायल अमेरिका, जापान, नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए थे। हर फेज में ट्रायल का दायरा बढ़ाया गया। तीसरे फेज में 17 देशों में 40 हजार से ज्यादा लोगों पर ट्रायल किए गए। उसमें एफिकेसी 66% रही थी।

अभी कहां लगाई जा रही है?
इसे डब्ल्यूएचओ मंजूरी दे चुका है। अभी यूरोपीय यूनियन, अमेरिका समेत 59 देशों में इस्तेमाल हो रही है।

क्या भारत में ट्रायल हुए?
नहीं। कंपनी ने अप्रैल में भारत में ट्रायल्स का आवेदन किया था। लेकिन केंद्र सरकार ने अमेरिका, यूरोप, डब्ल्यूएचओ द्वारा अप्रूव और प्रतिष्ठित वैक्सीन निर्माता की वैक्सीन को भारत में ट्रायल से छूट दी है। आगे इसे 100 लोगों को लगाया जाएगा और 7 दिन तक निगरानी की जाएगी।

क्या यह डेल्टा पर कारगर है?
जी हां। दक्षिण अफ्रीका में एक ट्रायल हुआ, जिसे सिसोंके कहा जाता है। उसमें सामने आया है कि ये डेल्टा वैरिएंट पर भी असरदार है। इसका डोज लगने पर डेल्टा और बीटा वैरिएंट से पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती होने की नौबत 71% और 67% कम हुई। मौत की आशंका भी 96% घट गई। हालांकि इस शोध के परिणाम किसी साइंस जर्नल में प्रकाशित नहीं हुए हैं। करीब 4.8 लाख हेल्थकेयर वर्कर्स पर हुए सर्वे में डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ यह असरदार पाई गई।

दूसरे टीकों से यह वैक्सीन कितनी अलग है?
इसे 2 से 8 डिग्री के बीच स्टोर कर सकते हैं। खुल चुके वायल्स 9 से 25 डिग्री तापमान के बीच 12 घंटे तक रखे जा सकते हैं। इसे दूरदराज तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। जबकि मॉडर्ना या फाइजर को माइनस 70 डिग्री पर स्टोर करना होता है।

1 डोज कितने रुपए की है?
अभी कीमत का खुलासा नहीं हुआ। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कीमत 2000 रुपए डोज हो सकती है।

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