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जस्टिस सीकरी ने कॉमनवेल्थ ट्रिब्यूनल में नियुक्ति के सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया

4 वर्ष पहले
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  • मोदी सरकार ने दिसंबर में जस्टिस सीकरी को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटरिएट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल में भेजे जाने का प्रस्ताव रखा था
  • सीकरी ने पहले प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, रविवार को उन्होंने इससे नाम वापस ले लिया
  • जस्टिस सीकरी, आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ पद से हटाने वाली 3 सदस्यीय समिति में शामिल थे, मोदी इस समिति के अध्यक्ष थे

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी ने रविवार को सरकार की ओर से लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटरिएट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल (सीएसएटी) में भेजे जाने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जस्टिस सीकरी को ट्रिब्यूनल को अध्यक्ष या सदस्य बनाने का प्रस्ताव था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सीकरी इसी साल 6 मार्च को रिटायर होने वाले हैं और पद पर उनकी नियुक्ति के लिए कानून मंत्रालय में प्रक्रिया भी चल रही थी। उधर, कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार से मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है। 

1) पिछले महीने सरकार ने जस्टिस सीकरी से संपर्क किया था

सूत्रों के मुताबिक- दिसंबर 2018 में सरकार ने जस्टिस सीकरी से ट्रिब्यूनल में पद दिए जाने को लेकर संपर्क किया था। इस पर सीकरी ने मौखिक रूप से सहमति भी जताई थी। ट्रिब्यूनल में उन्हें साल में दो या तीन सुनवाई करनी होतीं। उन्हें कोई वेतन भी नहीं मिलता। जस्टिस सीकरी ने रविवार शाम कानून मंत्रालय को प्रस्ताव के नामंजूर करने की लिखित रूप से जानकारी दी।

सूत्रों ने यह भी कहा कि जस्टिस सीकरी ने दिसंबर के पहले हफ्ते में ही सहमति दे दी थी। लिहाजा इसका सीबीआई मामले से कोई संबंध नहीं है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जनवरी 2019 में ही आलोक वर्मा पर फैसला करने वाली कमेटी के लिए नॉमिनेट किया था। इस पर विवाद को कतई सही नहीं कहा जा सकता।

जस्टिस सीकरी सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाद सबसे वरिष्ठ जज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली जिस समिति ने आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ पद से हटाया था, जस्टिस सीकरी उसमें शामिल थे। उन्होंने वर्मा को हटाए जाने का समर्थन किया था। जबकि समिति में तीसरे सदस्य कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इसके विरोध में थे।

इससे पहले सरकारी सूत्रों की ओर से यह कहा जा रहा था कि जस्टिस एके सीकरी को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सीक्रेट्रियाट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल के सदस्य के लिए मनोनीत किया गया है। हालांकि इस पर विवाद छिड़ गया था और कांग्रेस ने सीबीआई डायरेक्टर को हटाए जाने पर उनकी सहमति से इसे जोड़ा था और सरकार से जवाब मांगा था। वर्मा को 2:1 के वोट से हटा दिया गया था।

सूत्रों के मुताबिक- विदेश मंत्रालय ने भारत की तरफ से नियुक्ति के लिए ट्रिब्यूनल में बात भी की थी। हालांकि अब इस मामले में विदेश या कानून मंत्रालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

1965 में कॉमनवेल्थ सेक्रेटरिएट का गठन किया गया था। इसमें 53 मेंबर देशों के मामलों का निपटारा होता है। ट्रिब्यूनल में कुल 8 सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल 4 साल होता है। 

7 मार्च 1954 को जन्मे एके सीकरी 12 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। इससे पहले वह पंजाब और हरियाणा कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। 

राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि जब न्याय के तराजू से छेड़छाड़ की जाती है, तब अराजकता होती है। ये पीएम राफेल घोटाला छिपाने के लिए सब नष्ट कर देंगे। प्रधानमंत्री डरे हुए हैं, इसलिए भ्रष्ट हो गए हैं। वह प्रमुख संस्थानों को नष्ट कर रहे हैं। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने भी कहा कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए।

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