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भोपाल. ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और उनके गुट के विधायकों के विधानसभा सदस्यता से इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसे में अब मध्यप्रदेश की सियासत में 5 समीकरण बन रहे हैं। हर समीकरण में भाजपा को फायदा और कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है। सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति पर रहेगी। तकरीबन हर समीकरण में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा। अगर बहुमत परीक्षण से पहले कमलनाथ इस्तीफा दे देते हैं तो फ्लोर टेस्ट की संभावना कम होगी। इन समीकरणों से जुड़े के सवालों के जवाब दिए संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने।
सरकार किस स्थिति में गिर सकती है?
विधायकों के इस्तीफे से कमलनाथ सरकार अपने आप नहीं गिरेगी। कमलनाथ खुद इस्तीफा दें या फ्लोर टेस्ट होने की स्थिति में वे बहुमत साबित न कर पाएं, तभी सरकार गिरेगी।
पहला समीकरण: अगर विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो जाएं
मध्यप्रदेश के 2 विधायकों के निधन के बाद कुल सीटें = 228
इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधायक = 22
ये इस्तीफे स्पीकर ने मंजूर किए तो सदन में सीटें (228-22) = 206
इस स्थिति में बहुमत के लिए जरूरी = 104
भाजपा = 107 (बहुमत से 3 ज्यादा)
*कांग्रेस+ = 99 (बहुमत से 5 कम)
दूसरा समीकरण: अगर निर्दलीय विधायकों ने पाला बदला और विधायकों के इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुए तो?
तीसरा समीकरण: बसपा के 2 और सपा के 1 विधायक भी भाजपा के साथ आ जाएं तो?
चौथा समीकरण: अगर सभी विधायकों को स्पीकर अयोग्य करार दे दें तो?
इस स्थिति में ऊपर की स्थितियां ही लागू होंगी। सिर्फ अयोग्य करार दिए गए विधायक उपचुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
पांचवां समीकरण: अगर कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस्तीफे दे दिए तो?
इस स्थिति में राज्यपाल तय करेंगे कि मध्यावधि चुनाव कराने हैं या उपचुनाव। उपचुनाव होने की स्थिति में भाजपा फायदे में रहेगी और राज्यपाल उसे सरकार बनाने का मौका देंगे।
क्या स्पीकर इन विधायकों को अयोग्य करार दे सकते हैं?
स्पीकर इन विधायकों को बुलाकर पूछेंगे कि क्या ये इस्तीफे उन्होंने अपनी मर्जी से दिए हैं। अगर ऐसा है तो इस्तीफा स्वीकार करने के अलावा स्पीकर के पास कोई विकल्प नहीं रहेगा। हालांकि, कर्नाटक में विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था और उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा था।
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