इंस्पिरेशन / कई बार सप्ताह में दो बार तक एवरेस्ट पर चढ़ जाते हैं पर्वतारोही कामी रीता शेरपा



Kami Rita climbs Everest twice a week
X
Kami Rita climbs Everest twice a week

  • रिकॉर्ड चौबीसवीं बार एवरेस्ट की सर्वोच्च चोटी पर पहुंचने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने कामी रीता
  • कामी रीता का जन्म 1969 को नेपाल के सोलुखुम्बु के थेमा में हुआ था

Dainik Bhaskar

May 25, 2019, 09:28 AM IST

नई दिल्ली.  हाई एल्टीट्यूड वाली चढ़ाई में शेरपा कामी रीता हमेशा हाई डिमांड में होते हैं। ट्रैकिंग के लिए जा रहा कोई ग्रुप हो या कोई विदेशी क्लाइंबर, कामी रीता के अनुभवों को देखते हुए लोग उनके साथ जाना पसंद करते हैं। कामी रीता जब 12 साल के थे, तब से उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप तक पर्वतारोहियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाने का काम शुरू कर दिया था।

 

उन्होंने लगातार 11 साल तक यह काम किया। 1992 में उनके बड़े भाई ने कामी को एवरेस्ट चढ़ने का अवसर दिया। एवरेस्ट फतह करने से पहले कामी ने पहाड़ की नब्ज़ को समझा। एवरेस्ट चढ़ने के लिए उन्होंने पूरे दो साल का समय लिया और मई 1994 में पहली बार कामी हाई एल्टीट्यूड वर्कर के तौर पर एवरेस्ट के कैंप-4 (25,938 फुट) तक पहुंचे। उसके बाद से वेे अब तक 24 बार यह कारनामा कर चुके हैं।

 

हर साल दो बार एवरेस्ट पर चढ़ जाते हैं कामी :  एवरेस्ट चढ़ने के लिए अनुकूल मौसम के हिसाब से एक सीजन में यानी हर साल कई बार कामी दो बार भी एवरेस्ट चढ़ जाते हैं। हाल ही में 15 मई को 8,488 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कामी 18 मई से दूसरी चढ़ाई पर फिर से निकल गए। शेरपा के तौर पर सेवन समिट्स (दुनिया के सात महाद्वीप स्थित सात सबसे ऊंची चोटियां) तक पहुंचने वाले पहले नेपाली व्यक्ति का रिकॉर्ड भी इनके नाम पर ही है।

 

पिता का सपना पूरा कर रहे हैं : एवरेस्ट के नज़दीक नेपाल के थेमु गांव में जन्मे कामी का परिवार पहाड़ों और इससे जुड़े पर्यटन पर निर्भर रहा है। हालांकि कामी के पिता फ्रॉस्टबाइट(बर्फीली उंचाइयों पर त्वचा व अन्य अंगों आदि को नुकसान) के कारण कभी एवरेस्ट नहीं चढ़ पाए। कामी के अनुसार अपने पिता का यही अधूरा सपना पूरा करने के लिए उन्होंने एवरेस्ट चढ़ने की ठानी। कामी के बड़े भाई लाकपा रीता भी 17 बार एवरेस्ट के पीक पर पहुंच चुके हैं।

 

 

पहाड़ पर आस्था है, इसलिए कामयाबी मिली 

 

  • एक इंटरव्यू में कामी ने बताया कि पहली बार एवरेस्ट चढ़ने में बहुत मुश्किल हुई थी, लेकिन अब ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ जाने में दिक्कत नहीं होती। कामी के अनुसार पहाड़ में उनकी आस्था के कारण वह एेसा कर पाने में सफल हुए हैं। कामी कहते हैं कि अक्सर लोग एक बार ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तस्वीरें खिंचाते हैं और वापस आ जाते हैं, लेकिन उन्हें बार-बार इस पहाड़ पर आना है। इसलिए हर बार वे पहाड़ों की देवी से इसके लिए माफी मांगते हैं। कामी कहते हैं कि वे अभी स्वस्थ हैं और 60 साल की उम्र तक आसानी से बर्फीली चोटियां चढ़ सकते हैं। 
  • कामी कहते हैं कि भले ही वह सालों से एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन पहाड़ों पर खतरा हमेशा रहता है। 2014 में एवरेस्ट पर हुए हिमस्खलन में एक साथ 16 शेरपा की मौत हो गई थी। 2015 में नेपाल में आए भूकंप और उससे हुए हिमस्खलन में भी एवरेस्ट के बेस कैंप में 20 लोगों की मौत हो गई थी। कामी चाहते हैं कि उनके बेटे शेरपा न बनें।
COMMENT