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कर्नाटक हिजाब विवाद पर कल फिर होगी सुनवाई:मुस्लिम छात्राओं ने कहा- हिंदू लड़कियां चूड़ी पहनती हैं और क्रिश्चियन क्रॉस, हिजाब पर सवाल क्यों?

बेंगलुरु5 महीने पहले

कर्नाटक में हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान वकीलों की जोरदार जिरह हुई। मुस्लिम छात्राओं की ओर से पेश हुए एडवोकेट कुमार ने बेंच के सामने कई दलीलें दी। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आता कि सरकार हिजाब का मुद्दा उठाकर मुस्लिमों महिलाओं से दुश्मनों जैसा व्यवहार क्यों कर रही है।

जब हिंदू लड़कियां चूड़ी पहनती हैं और क्रिश्चियन क्रॉस पहनते हैं क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं हैं। ऐसे में आप इन बेचारी मुस्लिम लड़कियों को क्यों चुन रहे हैं। बुधवार को भी कर्नाटक हाईकोर्ट में इस मामले पर कोई फैसला नहीं हो सका। सीनियर एडवोकेट आदिश अग्रवाल ने इंटरवेंशन एप्लिकेशन के बारे में बताया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि केस में किसी भी इंटरवेंशन की सुनवाई तब तक नहीं होगी जब तक कि जरूरी न हो। मामले में आगे की सुनवाई गुरुवार दोपहर को भी जारी रहेगी।

हिजाब पर जिरह के मोमेंट्स

एडवोकेट कुमार : अधिनियम (कर्नाटक शिक्षा अधिनियम) या हिजाब पहनने पर रोक लगाने वाले नियमों में कोई प्रावधान नहीं हैं।

जस्टिस दीक्षित: यह सही सवाल नहीं हो सकता है। अगर इसे ऐसे ही देखा जाए तो कोई भी कह सकता है कि क्लास में हथियार ले जाने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोई रोक नहीं है। मैं तार्किक रूप से विश्लेषण कर रहा हूं कि आपका प्रस्ताव हमें किस ओर ले जा सकता है।

यदि ऐसा नहीं होता है तो कृपाण ले जाने पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, नियम 9 के तहत इसे निर्धारित करने की शक्ति है। इस पर अलग से बहस करने की जरूरत है।

एडवोकेट कुमार : सर, जब सौ चिन्ह हैं तो सरकार हिजाब को ही क्यों उठा रही है। चूड़ियां भी पहनी जाती हैं...

जस्टिस दीक्षित : हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब तक कागज की प्रामाणिकता स्थापित नहीं हो जाती, हम उसके कहे अनुसार नहीं चल सकते।

एडवोकेट कुमार : मैं समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विशाल विविधता को ही दिखा रहा हूं। सरकार अकेले हिजाब को क्यों उठा रही है और यह शत्रुतापूर्ण भेदभाव कर रही है? चूड़ियां पहनी जाती हैं? क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं हैं? आप इन बेचारी मुस्लिम लड़कियों को क्यों चुन रहे हैं?

एडवोकेट कुमार : मेरा कहना है कि अगर पगड़ी पहनने वाले लोग सेना में हो सकते हैं, तो धार्मिक चिन्ह वालों को क्लासेस में जाने की अनुमति क्यों नहीं है।

500 लोगों ने लिखा खुला खत
हिजाब मामले पर 500 से ज्यादा लॉ स्टूडेंट्स, लॉ एक्सपर्ट्स और वकीलों ने एक खुला पत्र लिखा है। जिसमें हिजाब पहनने के कारण मु‌स्लिम युवतियों को स्कूल-कॉलेज में एंट्री से रोकने की कड़ी निंदा की गई है। इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि
मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं की यह अवहेलना सार्वजनिक दृष्टि से अमानवीय है, यह संविधान और पूरे समुदाय के अपमान के बराबर है। सम्मान के साथ जीवन जीने के उनके मूल अधिकार की रक्षा करने में विफल होने के कारण हमार सिर शर्म से झुक गया है।

बजरंग दल ने कहा ये हिजाब जिहाद है
10वीं तक के स्कूल सोमवार से खुल चुके हैं। बुधवार से स्कूल कॉलेज दोबारा खुले, लेकिन जब शिवमोगा के कॉलेज में स्टूडेंट्स से हिजाब हटाकर क्लास में बैठने कहा गया तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। 30 स्टूडेंट्स कॉलेज से बाहर निकल आए। कॉलेज ने इन छात्राओं से कोर्ट के आदेश के अनुसार फैसला आने तक हिजाब न पहनने की बात कही थी।

दूसरी तरफ कर्नाटक के बजरंग दल संयोजक सुनील केआर ने हिजाब विवाद को हिजाब जिहाद नाम दिया है।

लड़कियों की लगाई आग से पूरा राज्य जल रहा
विश्व हिंदू परिषद की पूर्णिमा सुरेश ने कहा है कि हिजाब पहनकर लड़कियां यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि हम अलग हैं। वे फूट पैदा कर रही हैं। यह जिहाद है। हिंदू और मुस्लिम लड़कियां जो एक साथ खाती थीं, अब एक-दूसरे को अंतर की नजर से देख रही हैं। उन्होंने कहा-हम अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन वे नहीं कर रहे हैं। कुछ जगहों पर हिजाब की अनुमति दी गई थी, लेकिन इन लड़कियों ने आग लगा दी जिसने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया। हम NIA जांच की मांग करते हैं।

उधर तुमकुर में भी छात्राओं ने स्कूल में हिजाब पहनकर जाना चाहा, लेकिन मैनेजमेंट ने उन्हें मना कर दिया। नाराज छात्राओं ने विरोध शुरू कर दिया और वे अल्लाह हू अकबर और वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाते हुए बाहर निकल गईं। हालांकि बागलकोट, बैंगलोर, चिक्काबल्लापुरा, गडग, शिमोगा, तुमकुर, मैसूर, उडुपी और दक्षिण कन्नड़ में धारा 144 लागू है।

मंगलवार को हाईकोर्ट में क्या हुआ?
कर्नाटक हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने भारत के संविधान का कन्नड़ में आधिकारिक अनुवाद बेंच के सामने रखा। कामत ने कहा कि संविधान का कन्नड़ अनुवाद हर प्रावधान में सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उसी शब्द का उपयोग करता है जैसा कि सरकारी आदेश में किया जाता है। इस पर बेंच ने कहा कि हम सरकारी आदेश की व्याख्या कर रहे हैं, उसके लिए इस्तेमाल किए शब्दों की नहीं।

कर्नाटक हाईकोर्ट में लगातार तीसरे दिन बड़ी बेंच के सामने हिजाब विवाद पर सुनवाई होगी।
कर्नाटक हाईकोर्ट में लगातार तीसरे दिन बड़ी बेंच के सामने हिजाब विवाद पर सुनवाई होगी।

कामत ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि यह मामला मार्च के बाद सुना जाए, नहीं तो इससे चुनाव में पॉलिटिकल पार्टी फायदा लेने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी बात को खारिज करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग से जुड़ा मामला है हमसे जुड़ा नहीं।

अधिकारी जबर्दस्ती उतरवा रहे हिजाब
हाईकोर्ट में सुनावाई के दौरान वकील मोहम्मद ताहिर ने कहा कि आपके अंतरिम आदेश के बाद अधिकारी जबर्दस्ती हिजाब उतरवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुलबर्गा में सरकारी अधिकारी एक उर्दू स्कूल में गए और शिक्षकों और छात्रों को हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को देखेंगे।

उडुपी से शुरू हुआ था हिजाब का विवाद
हिजाब को लेकर विवाद सबसे पहले कर्नाटक के उडुपी जिले में शुरू हुआ था। 31 दिसंबर को उडुपी के सरकारी कॉलेज, गवर्नमेंट गर्ल्स प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज (सीनियर सेकेंड्री स्कूल) की 6 मुस्लिम छात्राओं ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें हिजाब पहने हुए छात्राएं क्लास के बाहर बेंच पर बैठकर पढ़ रही थीं। ये तस्वीर तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया, जिसके बाद वहां प्रोटेस्ट होने लगा।