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कर्नाटक का हिजाब विवाद:आज से 11वीं-12वीं के स्कूल-कॉलेज खुलेंगे, धार्मिक कपड़े पहनकर नहीं आ सकेंगे स्टूडेंट्स

8 महीने पहले
  • हाईकोर्ट में छात्राओं के वकील की दलील- मुद्दे को चुनाव में भुनाया जा रहा, मार्च में हो सुनवाई; कोर्ट का इनकार

हिजाब विवाद के बीच 16 फरवरी यानी बुधवार से कर्नाटक के स्कूल-कॉलेज खोले जाएंगे। हालांकि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के मुताबिक, स्टूडेंट्स फिलहाल धार्मिक कपड़े पहनकर शिक्षण संस्थानों में नहीं आ सकेंगे।

तुमकुरु के डिप्टी कमिश्नर वाईएस पाटिल ने बताया कि प्रशासन ने जिले में 16 फरवरी की सुबह 6 बजे से अगले आदेश तक पीयू कॉलेजों, डिग्री और अन्य कॉलेजों में धारा 144 लागू कर दिया है। इसके तहत कॉलेज परिसर के 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की भीड़ और प्रदर्शन पर रोक रहेगी।

इधर, कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को देखते हुए उडुपी के उपायुक्त एम कुर्मा राव ने बताया कि अदालत के आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की है। हाईकोर्ट के आदेश को हर स्तर पर पहुंचाने और इसे लागू करने में उनका सहयोग लेने का प्रयास किया जा रहा है। कॉलेज स्तर पर, प्राचार्यों और समितियों ने प्रयास किए हैं। कोर्ट के आदेश के पालन के लिए हमने सभी धार्मिक नेताओं और हितधारकों के साथ बैठक की है।

हाईकोर्ट में सुनवाई जारी
कर्नाटक हिजाब मामले में मंगलवार को भी हाईकोर्ट से कोई फैसला नहीं हो पाया। बेंच ने सुनवाई 16 फरवरी तक बढ़ा दी है। हालांकि इससे पहले देवदत्त कामत ने कहा था कि सुनवाई मार्च के बाद करें, क्योंकि इस हिजाब विवाद का चुनाव में फायदा लेने की कोशिश हो रही है। इस पर बेंच ने कहा कि ये चुनाव आयोग से जुड़ा मामला है हमसे जुड़ा नहीं।

संविधान का कन्नड़ अनुवाद बेंच के सामने रखा
याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने भारत के संविधान का कन्नड़ में आधिकारिक अनुवाद बेंच के सामने रखा। कामत ने कहा संविधान का कन्नड़ अनुवाद हर प्रावधान में सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उसी शब्द का उपयोग करता है जैसा कि सरकारी आदेश में किया जाता है। इस पर बेंच ने कहा कि हम सरकारी आदेश की व्याख्या कर रहे हैं, उसके लिए इस्तेमाल किए शब्दों की नहीं।

दक्षिण अफ्रीका के नोज पिन केस का हवाला दिया
कामत ने दक्षिण अफ्रीका में 2004 के सुनाली पिल्ले बनाम डरबन गर्ल्स हाई स्कूल केस का जिक्र किया। जहां स्कूल ने लड़कियों को नाक में नथ पहनने की अनुमति नहीं दी थी। स्कूल का तर्क था कि यह स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है।

हिजाब न उतारने की जिद पर अड़े पेरेंट्स बच्ची को वापस ले गए।
हिजाब न उतारने की जिद पर अड़े पेरेंट्स बच्ची को वापस ले गए।

परीक्षा का बायकॉट किया
लेकिन इससे पहले शिवमोगा के एक स्कूल में मंगलवार को हिजाब पहने एक लड़की ने परीक्षा में बैठने से इनकार कर दिया। इससे पहले स्कूल के अधिकारियों ने उससे हिजाब हटाने के लिए कहा था। लड़की ने मीडिया से कहा कि हम बचपन से ही हिजाब पहनकर बड़े हुए हैं और हम इसे छोड़ नहीं सकते। मैं परीक्षा नहीं दूंगी, मैं घर वापस जा रही हूं।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते निर्देश दिया था कि स्टूडेंट्स को क्लास में भगवा शॉल, स्कार्फ, हिजाब या कोई भी धार्मिक प्रतीक पहनने से रोक दिया था। उधर चिक्कमंगलूर के इंदावरा गांव के सरकारी स्कूल में मुस्लिम लड़कियों को स्कूल में एंट्री नहीं दी गई। बाद में उनके पेरेंट्स स्कूल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

उन्होंने परिसर में घुसकर नारेबाजी की और मांग की कि उन्हें लिखित में आदेश दिया जाए। विरोध तेज होने पर एक स्टूडेंट ने बैग से भगवा गमछा निकाला। बाद में टीचर्स ने उसे वापस रखवा दिया। हालात बिगड़ते देख स्कूल को दिनभर के लिए बंद कर दिया गया है। कुछ ऐसा ही मामला तुमकुर के SVS स्कूल में भी सामने आया है।

बड़ी बेंच को ट्रांसफर किया मामला
इससे पहले जस्टिस कृष्णा दीक्षित की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई की थी, जिसमें कोई फैसला नहीं हो सका। इसके बाद कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस दीक्षित ने इस मामले को तीन जजों की बड़ी बेंच के पास भेज दिया। जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। उम्मीद है कि धार्मिक ड्रेस कोड को लेकर कोर्ट आज अपना फैसला सुना सकती है।

जस्टिस दीक्षित ने स्कूलों में हिजाब पर बैन लगाने वाले सरकारी ऑर्डर को गैर जिम्मेदाराना बताया। कोर्ट के मुताबिक, सरकार का आदेश संविधान के आर्टिकल 25 के खिलाफ है और यह कानूनन वैध नहीं है। आर्टिकल 25 में धार्मिक मान्यताओं के पालन की आजादी दी गई है। इसलिए हिजाब पर बैन को लेकर कानून नहीं है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में उठाए सवाल
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील देवदत्त कामत ने CJI की बेंच के सामने जारी सुनवाई में सवाल उठाया कि जब सेंट्रल स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत है, तो राज्य सरकार के स्कूलों में क्यों नहीं?

कामत ने कोर्ट को बताया कि सरकारी आदेश में कहा गया है कि हेड स्कार्फ यानी हिजाब पहनने का मुद्दा आर्टिकल 25 में कवर नहीं होता है। इसे यूनिफॉर्म में शामिल मानने या न मानने का फैसला कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी पर छोड़ा जाना चाहिए।

मीडिया से समझदारी दिखाने की अपील
कामत ने कहा था कि हिजाब के बारे में फैसला लेने का अधिकार कॉलेज कमेटी को सौंपना पूरी तरह गैरकानूनी है। इधर, इस मामले के मीडिया कवरेज को लेकर कोर्ट ने कहा था कि हम मीडिया से रिक्वेस्ट करते हैं कि वह इस मुद्दे पर समझदारी दिखाए।

जस्टिस दीक्षित ने कहा कि हमने मीडिया से अपील की है। अगर आप सब कहें तो हम लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर सकते हैं, वही हमारे हाथ में है। हम मीडिया को नहीं रोक सकते। जहां तक चुनाव की बात है, आप उन राज्यों के मतदाता नहीं हैं। न्यायमूर्ति दीक्षित ने कहा था कि चुनाव के मुद्दे पर फैसला करने का अधिकार चुनाव आयोग का है।

16 फरवरी से खुलेंगे 11-12वीं के स्कूल-कॉलेज
कर्नाटक हाईकोर्ट में जहां एक तरफ मामले की सुनवाई हो रही थी। वहीं, दूसरी तरफ राज्य सरकार ने 16 जनवरी से 11-12वीं के स्कूल-कॉलेज फिर खोले जाने का ऐलान कर दिया। 10वीं तक के स्कूल सोमवार से पहले ही खुल चुके हैं।

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