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  • 'Karunashray' of Bengaluru fulfills every wish of cancer patients frustrated from everywhere, from rolling in the plane to Aamir Khan

कर्नाटक / कैंसर मरीजों की हर इच्छा पूरी करता है ‘करुणाश्रय’, प्लेन में घुमाने से लेकर आमिर खान तक से मिलवाने तक

पांच एकड़ परिसर में बने अस्पताल भवन में यहां 73 बेड हैं और सालाना खर्च करीब साढ़े छह करोड़ रुपए पांच एकड़ परिसर में बने अस्पताल भवन में यहां 73 बेड हैं और सालाना खर्च करीब साढ़े छह करोड़ रुपए
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पांच एकड़ परिसर में बने अस्पताल भवन में यहां 73 बेड हैं और सालाना खर्च करीब साढ़े छह करोड़ रुपएपांच एकड़ परिसर में बने अस्पताल भवन में यहां 73 बेड हैं और सालाना खर्च करीब साढ़े छह करोड़ रुपए

  • 73 बेड वाला अस्पताल 19 हजार कैंसर मरीजों की पूरी तरह मुफ्त सेवा कर चुका है
  • बीते 25 साल में 19 हजार मरीज यहां जीवन के अंतिम दिन सुकून से बिताने आ चुके हैं

अमित कुमार निरंजन

अमित कुमार निरंजन

Feb 10, 2020, 11:24 AM IST

बेंगलुरु . बेंगलुरु का करुणाश्रय हॉस्पिस ट्रस्ट अस्पताल हर तरफ से निराश हाे चुके कैंसर मरीजाें की सेवा कर रहा है। बीते 25 वर्षों में 19 हजार मरीज यहां जीवन के अंतिम दिन सुकून से बिताने आ चुके हैं। यहां मरीजों की हर चिंता दूर करने पूरी कोशिश की जाती है। सभी सुविधाएं मुफ्त हैं। यहां तक कि कोई बिलिंग काउंटर भी नहीं है। अस्पताल पेलिएटिव केयर कॉन्सेप्ट पर चल रहा है। पेलिएटिव केयर ग्रीक भाषा के पेलियम शब्द से बना है, जिसका मतलब है दर्द से मुक्ति देने वाली देखभाल।

 
पांच एकड़ परिसर में बने अस्पताल भवन में 73 बेड हैं और सालाना खर्च करीब साढ़े छह करोड़ रुपए। हर मरीज पर औसतन रोजाना  2424 रुपए खर्च होते हैं। संस्था के सीईओ मैथ्यू चैंडी कहते हैं कि ‘अस्पताल में मरीज को भर्ती करने के पहले रिपोर्ट चेक की जाती है, जिसमें लिखा होना चाहिए कि अब इलाज नहीं हो सकता। यहां वे लोग आते हैं, जो इलाज में पहले ही सबकुछ गंवा चुके होते हैं। 

मकसद- मरीज शांति से दुनिया से अलविदा हो
ऐसे में हम उनसे पैसे कैसे ले सकते हैं। हमारी कोशिश होती है कि मरीज शांति से दुनिया से अलविदा हो और उनके परिवार को इसके लिए तैयार किया जाए।’ संस्था के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एसएन सिम्हा बताते हैं कि करुणाश्रय, इंडियन कैंसर सोसायटी और रोटरी बेंगलुरु इंदिरा नगर के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यहां हर महीने 60-70 मरीज आखिरी सांसें लेते हैं। इन आखिरी दिनों में हम उनका दुख-दर्द कम करने की कोशिश करते हैं। यहां 140 लोगों का वैतनिक स्टाफ है। इनमें 6 डॉक्टर, 80 नर्स, 6 काउंसलर और 1 फिजियोथेरेपिस्ट है। कभी किसी मरीज को बेड फुल होने की वजह से लौटाया नहीं गया है।

उनके लिए अलग से बेड की व्यवस्था की जाती है। ट्रस्ट के चेयरमैन किशोर राव बताते हैं कि मेरी मां का 52 साल की उम्र में कैंसर से देहांत हो गया था। तब मैं 26 साल का था। वह असहनीय पीड़ा से गुजरी थीं। तब मैं टेक्सटाइल कंपनी मदुराकोट में नौकरी कर रहा था। इस घटना के काफी समय बाद 1987 के आसपास मेरी मुलाकात एक ऐसे कैंसर रोगी से हुई जिसे इलाज न हो पाने की वजह से डिस्चार्ज कर दिया गया था। उसी समय मैंने कैंसर मरीजों के लिए कुछ करने की ठानी और रिटायरमेंट के बाद होम केयर की शुरुआत की।

मरीज की हर छोटी-बड़ी इच्छा का यहां ख्याल रखा जाता है

संस्था मरीजों की हर छोटी-बड़ी इच्छा का ख्याल रखती है। एक मरीज को चिंता थी कि उसकी बकरी को कोई घास खिला रहा है या नहीं, तो बकरी को अस्पताल लाया गया। एक मरीज प्लेन में उड़ना चाहता था तो उसे छोटे प्लेन में घुमाया गया। एक 12 साल का मरीज आमिर खान का फैन था। जब आमिर बेंगलुरु में शूटिंग के लिए आए, तो वे अस्पताल आकर उससे मिले थे।   

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