बाढ़ / केरल की त्रासदी बताती 4 कहानियां, कैसे पलभर में खत्म हुईं जिंदगियां

Kerala floods: More than 110 people died in 12 days, many homeless
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Kerala floods: More than 110 people died in 12 days, many homeless

  • लगातार दूसरे साल केरल बाढ़ की चपेट में; 12 दिन में 110 से ज्यादा की मौत, 3 लाख लोग बेघर

  • पिछले वर्ष केरल में आई बाढ़ ने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान किया था
  • राज्य पूरी तरह दोबारा खड़ा भी नहीं हो पाया था कि एक बार फिर स्थिति खराब हो गई, भास्कर ने इसकी पड़ताल की

दैनिक भास्कर

Aug 18, 2019, 12:56 PM IST

कोच्चि. केरल लगातार दूसरे साल भीषण बाढ़ की चपेट में है। बीते 12 दिन में 110 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ की विभीषिका ऐसी है कि करीब 3 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। ये लोग अलग-अलग राहत शिविरों में जीवन गुजार रहे हैं। पिछले वर्ष केरल में आई बाढ़ ने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान किया था। अभी केरल पूरी तरह दोबारा खड़ा भी नहीं हो पाया था कि एक बार फिर बाढ़ ने स्थिति बेहद खराब कर दी है। यहां केरल की चार प्रतिनिधि कहानियां बताती हैं कि बर्बादी किस हद तक हुई है। केरल से जेसी शिबु की रिपोर्ट...

 

1) मां मेरे सामने बह गई, मैं कुछ नहीं कर पाया

‘उस दिन 9 अगस्त था। दोपहर का समय था। भीषण बाढ़ के बीच हम खाने की तैयारी कर रहे थे। फिर अचानक बारिश तेज हो गई। हम बाहर निकले ताकि घर में घुसने वाले पानी का रास्ता बदल सकें। पत्नी गीतू डेढ़ साल के बच्चे के रोने के कारण घर के अंदर ही थी। मैं मां से कुछ बात कर ही रहा था कि अचानक जोरदार आवाज हुई। कुछ समझ पाता इससे पहले ही सेकंडों में घर बह गया। चारों तरफ पानी, कीचड़, पत्थर और पेड़ नजर आ रहे थे। मेरी आंखों के सामने पत्नी और बेटे की मौत हो गई।’ ये कहानी बताते हुए कोट्‌टाकुन्नु में रहने वाले सरथ की आंखे भर आईं। वे बताते हैं कि-‘मैं मां सरोजनी का हाथ पकड़कर तेजी से भागा था लेकिन उनका हाथ छूट गया और उनकी भी मौत हो गई थी। मैं कुछ नहीं कर सका। मेरा परिवार पलभर में तबाह हो गया। इस सदमे से मैं कभी नहीं निकल पाऊंगा। रह रहकर सब याद आता है।’

 

2) बेटे के अंतिम शब्द- मां मुझे गले लगाकर सुला दो

‘मां मुझे नींद आ रही है, लेकिन मैं सो नहीं पा रहा हूं। आओ और मुझे गले लगाकर सुला दो।’ तीन साल के मिस्तह ने अपनी मां मुनीरा से कहा। मुनीरा उस समय खाना बना रही थी। पिता शौकत पास ही में कैंटीन में थे। मुनीरा ने मिस्तह को सुलाया और दोबारा किचन में चली गईं। शौकत बताते हैं कि ‘कैंटीन में ग्राहकों की भीड़ थी। मैं घर नहीं जा पा रहा था। हादसे वाले दिन से एक दिन पहले भी भूस्खलन हुआ था, हम मकान बदलने की सोच रहे थे। इससे पहले कि किसी सुरक्षित स्थान पर जा पाते तूफान के बीच बिल्डिंग गिर गई। मिस्तह सो ही रहा था। जोरदार धमाका हुआ तो हम घर के अंदर भागे लेकिन तब तक सब तबाह हो चुका था।’ शौकत और मुनीरा को करीब 13 साल के इंतजार के बाद मिस्तह हुआ था। वायनाड में रहने वाले शौकत ने दो माह पहले ही कैंटीन शुरू की थी।

 

3) पत्नी आधार लेने गई फिर कभी नहीं लौटी

‘हम रिलीफ कैंप में जा रहे हैं तो हमें आधार कार्ड की जरूरत पड़ेगी। इसलिए मैं घर वापस जाती हूं और आधार कार्ड लेकर आती हूं।’ पुथुमाला में रहने वाली अजीता ने कहा। अभी वो अाधार लेकर लौटी भी नहीं थी कि जंगल से जोरदार सैलाब उठा। कीचड़ के पानी में घर बह गया। अजीता का भी उस समय कहीं पता नहीं चला। बाद में उनका मृत शरीर बचाव दल को मिला। अजीता के पति चंद्रन भरी आवाज में बताते हैं कि- ‘उस दिन हमारे क्षेत्र में भारी वर्षा और भूस्खलन को लेकर अनाउंसमेंट हो रहे थे। लोग अपने घर छोड़कर कैंप में जा रहे थे। मैंने कुछ लोगों से घर का सामान भी शिफ्ट करने की बात कर ली थी। लेकिन आधार भूलने के कारण पत्नी को लौटना पड़ा। मैं अपने बेटे के साथ अजीता के वापस आने का इंतजार कर रहा था। लेकिन वो कभी नहीं लौटी।’

 

4) इधर डॉग को मालिक का इंतजार

केरल में जिस तरह लोग अपने परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं, उसी तरह यह डॉग भी अपने मालिक के लिए परेशान है। दरअसल कवालप्पारा में कुछ दिनों पहले डॉग के मालिक सिवान पल्लाथ अपने परिवार के साथ कीचड़ और मलबे में दब गए थे। तब से यह अपने मालिक के इंतजार में घटनास्थल के पास बैठा रहता है। कई दिनों तक तो लोगों ने ध्यान नहीं दिया लेकिन बाद में लोगों ने उसे पहचान लिया कि ये सिवान का डॉग है। कई लोगों ने उसे हटाने की कोशिश की लेकिन वो वहीं बैठा रहा।

 

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