- कहा- सरकार को सतर्क होकर ज्यादा कदम उठाने चाहिए, अर्थव्यवस्था ठहराव की स्थिति में पहुंची
- "28% जीएसटी से ऑटो सेक्टर बुरी तरह प्रभावित, इसलिए रोजगार पर भी असर पड़ रहा"
- किरण ने बैंकों के विलय के फैसले का स्वागत किया, कहा- सरकार अब इंडस्ट्री की ज्यादा सुन रही
- अप्रैल-जून में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5% रह गई, यह 6 साल में सबसे निचला स्तर
Dainik Bhaskar
Aug 31, 2019, 11:04 AM ISTबेंगलुरु. बायो फार्मा कंपनी बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ का कहना है कि 5% जीडीपी ग्रोथ आर्थिक आपात काल (इकोनॉमिक इमरजेंसी) को दर्शाती है। सरकार को सतर्क हो जाना चाहिए और ग्रोथ में तेजी के लिए ज्यादा कदम उठाने चाहिए। एक कॉन्क्लेव में बोलते हुए शॉ ने शुक्रवार को ऐसा कहा। सरकार ने शुक्रवार को जीडीपी ग्रोथ के आंकडे जारी किए। अप्रैल-जून में ग्रोथ घटकर 5% रह गई। यह 6 साल में सबसे कम है। इस साल जनवरी-मार्च में 5.8% थी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस की जरूरत: किरण
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शॉ ने कहा कि जीडीपी में इतनी गिरावट की किसी ने उम्मीद नहीं की थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा- आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि अर्थव्यवस्था में न सिर्फ धीमापन है बल्कि यह ठहराव की स्थिति में पहुंच चुकी है।
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किरण ने कहा कि 28% जीएसटी का स्लैब हटा देना चाहिए। इससे ऑटो और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इससे रोजगार पर असर पड़ रहा है। टैक्स घटाकर सरकार मांग बढ़ाने में मदद कर सकती है। खरीद बढ़ेगी तो राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा।
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शॉ ने कहा कि आर्थिक विकास दर को पटरी पर लाने के लिए सरकार को सबसे पहले सेंटीमेंट पर ध्यान देने की जरूरत है। इसमें निवेश भी शामिल है। किरण ने बैंकों के विलय के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इंडस्ट्री के लोगों से वित्त मंत्री की मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार अब ज्यादा ध्यान देने लगी है।
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उन्होंने कहा कि ग्रोथ में सुधार के लिए सरकार अब तक आशावादी थी लेकिन, खराब स्थिति को समझ भी रही थी। वह इनकार नहीं कर सकती। शॉ के मुताबिक दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भी विकास दर में धीमापन आएगा।
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किरण ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के आखिर तक हम 3 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की उम्मीद कर रहे थे लेकिन, समझ नहीं आता कि 5% ग्रोथ के साथ यह कैसे संभव होगा।
