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केरल / दो शहरों के बीच बनेगा सेमी-हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, 532 किमी की दूरी 4 घंटे में होगी पूरी



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • केरल सरकार ने दी सेमी-हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी
  • 2024 में बनकर तैयार होगा 532 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट
  • प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे करीब 66 हजार करोड़ रुपए

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2019, 11:26 AM IST

तिरुवनंतपुरम. भारत की पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की शुरुआत फरवरी 2019 में दिल्ली और वाराणसी के बीच हुई थी। इसके बाद अब जल्द ही दूसरी 'वंदे भारत एक्सप्रेस' ट्रेन दिल्ली और श्री माता वैष्णोदेवी कटरा के बीच शुरू होगी। इसी बीच केरल सरकार ने हाल ही में 532 किलोमीटर लंबे SHSR (सेमी-हाईस्पीड रेल) कॉरिडोर के निर्माण की मंजूरी दे दी है। इस कॉरिडोर में चलने वाली ट्रेन की अधिकतम स्पीड भी वंदे भारत एक्सप्रेस (अधिकतम 200 kmph) के बराबर होगी। ये कॉरिडोर केरल के उत्तरी शहर कासरगोड से लेकर दक्षिणी शहर तिरुवनंतपुरम तक बनेगा और साल 2024 तक बनकर तैयार होगा। 

 

  • इस कॉरिडोर के बनने के बाद कासरगोड और तिरुवनंतपुरम के बीच की दूरी सिर्फ 4 घंटे में पूरी हो सकेगी, जिसके लिए अबतक 12 घंटे लगते थे। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 66 हजार करोड़ रुपए होगी। राज्य सरकार के मुताबिक यात्री सुरक्षा को बढ़ावा देने, यातायात के सुगम साधनों को बढ़ावा देने, भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने तथा पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करने के मकसद से वो इसे बनवा रही है। इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण KRDCL (केरल रेल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) करेगा, जो कि भारतीय रेलवे और केरल सरकार का संयुक्त उपक्रम है।
  • ये सेमी-हाई स्पीड रेल कॉरिडोर केरल के 14 में से 11 जिलों से होकर गुजरेगा और इस पर अधिकतम 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल सकेंगी। राजधानी तिरुवनंतपुरम से लेकर कासरगोड तक बनने वाले इस कॉरिडोर में कुल 10 स्टेशन होंगे। जिनमें  कोल्लम, चेंगानुर, कोट्टायम, एर्नाकुलम (कोच्चि), थ्रिसुर, तिरुर,  कोझीकोड और कन्नूर शामिल है। इस कॉरिडोर के बनने के बाद कोच्चि और तिरुवनंतपुरम सिर्फ 90 मिनट की दूरी रह जाएगी।

 

पर्यावरण के अनुकूल होगा प्रोजेक्ट

 

इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि SHSR कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होगा और 100 प्रतिशत ग्रीन प्रोजेक्ट होगा। प्रोजेक्ट की लागत फिलहाल करीब 66079 करोड़ रुपए है, जिसमें से 34,454 करोड़ रुपए लोन से आएंगे। जमीन अधिग्रहण पर राज्य सरकार 8656 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए करीब 1200 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इसके निर्माण के दौरान जहां करीब 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं इसके बनने के बाद करीब 11 हजार नौकरियां तैयार होंगी।

 

पहले साल करीब 70 हजार यात्री आएंगे रोज

 

KRDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर वी अजित कुमार का कहना है कि इस रूट पर यात्रा व्यय करीब 2.75 रुपए प्रति किलोमीटर पड़ेगा, जिसमें सालाना 7.5% की बढ़ोतरी होगी। शुरुआत में इस रूट पर रोजाना करीब 67740 यात्री आने का अनुमान है, वहीं व्यस्त समय के दौरान एक तरफ से आने वाले यात्रियों की संख्या 1330 होगी। साल 2028 तक इस कॉरिडोर से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 82266, साल 2040 तक 1 लाख से ऊपर और 2051 में 1.47 लाख रोजाना होने का अनुमान है। इस कॉरिडोर पर चलने वाली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन में नौ कोच होंगे, जिसे जरूरत पड़ने पर 12 किया जा सकेगा।

 

सेमी-हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का रूट।

 

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