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पाकिस्तान / कुलभूषण को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के 12 दिन बाद मिलेगा कॉन्स्युलर एक्सेस



पाक ने पिछले साल कुलभूषण को मां-पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। (फाइल) पाक ने पिछले साल कुलभूषण को मां-पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। (फाइल)
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पाक ने पिछले साल कुलभूषण को मां-पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। (फाइल)पाक ने पिछले साल कुलभूषण को मां-पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। (फाइल)

  • अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 21 जुलाई को कुलभूषण मामले में भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था
  • कॉन्स्युलर एक्सेस मिलने के बाद अब भारतीय राजनायिक कुलभूषण से मिल सकेंगे

Dainik Bhaskar

Aug 01, 2019, 08:53 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के पूर्व नेवी कमांडर कुलभूषण जाधव को कॉन्स्युलर एक्सेस उपलब्ध कराएगी। पाक ने यह फैसला अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) के फैसले के 11 दिन बाद लिया। अब भारतीय राजनयिक शुक्रवार से जाधव से मिल सकेंगे। आईसीजे ने 21 जुलाई को भारत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुलभूषण की फांसी पर रोक लगा दी थी। साथ ही पाक से उसे कॉन्स्युलर एक्सेस देने की मांग की थी।

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘‘हमें पाकिस्तान के कॉउन्सलर एक्सेस के प्रस्ताव मिला है। हम विचार करने के बाद जवाब देंगे। हम इस प्रस्ताव का मुल्यांकन आईसीजे के फैसले के मुताबिक करेंगे। साथ ही इस मामले पर पाकिस्तान से कूटनीतिक तरीके से बात करेंगे।’’

 

भारत ने फैसले के बाद ही जताई थी कॉन्स्युलर एक्सेस मिलने की उम्मीद

आईसीजे के फैसले के अगले दिन को पाक विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था, “आईसीजे के फैसले के तहत कमांडर कुलभूषण जाधव को विएना कन्वेंशन के आर्टिकल-36 के तहत कॉन्स्युलर एक्सेस से जुड़े उनके अधिकार समझा दिए गए हैं। एक जिम्मेदार देश के तौर पर पाक अपने कानून के मुताबिक ही कुलभूषण को कॉन्स्युलर एक्सेस मुहैया कराएगा। इसके लिए शर्तें तैयार की जा रही हैं।”

 

आईसीजे के 16 जजों ने 15-1 के बहुमत से कुलभूषण की फांसी की सजा निलंबित कर दी थी। कोर्ट के अध्यक्ष जस्टिस अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान प्रभावी ढंग से फैसले की समीक्षा और उस पर पुनर्विचार नहीं कर लेता, फांसी पर रोक जारी रहेगी।

 

पाक ने विएना संधि का उल्लंघन किया- आईसीजे


1. कोर्ट के अध्यक्ष सोमालिया के जस्टिस अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने फैसला पढ़ा। उन्होंने 42 पन्नों के फैसले में कहा कि पाकिस्तान जब तक पाकिस्तान प्रभावी ढंग से अपने फैसले की समीक्षा और पुनर्विचार नहीं कर लेता है, तब तक कुलभूषण की फांसी पर रोक रहेगी।


2. आईसीजे ने कहा- पाकिस्तान ने कुलभूषण के साथ भारत की बातचीत और कॉन्स्यूलर एक्सेस के अधिकार को दरकिनार किया। पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण के लिए कानूनी प्रतिनिधि मुहैया कराने का मौका नहीं दिया। पाक ने विएना संधि के तहत कॉन्स्यूलर रिलेशन नियमों का उल्लंघन किया।


3. जजों ने कहा- पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण जाधव के साथ बातचीत और मुलाकात के अधिकार से वंचित रखा। भारत ने कई बार कॉन्स्यूलर एक्सेस के लिए अपील की, जिस पाकिस्तान ने ठुकरा दिया। यह एक निर्विवाद तथ्य है कि पाकिस्तान ने भारत की अपील नहीं मानी।


4. "पाकिस्तान विएना संधि के तहत कुलभूषण की गिरफ्तारी और उसके कारावास के संबंध में भारत को जानकारी देने के लिए बाध्य था। पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी की जानकारी देने में तीन हफ्ते की देरी कर दी, यह भी विएना संधि की शर्तों का उल्लंघन है। पाकिस्तान यह नहीं स्पष्ट कर पाया कि कथित तौर पर भारत की किसी गड़बड़ी की वजह से उसने खुद को संधि की शर्तों को पूरा करने से खुद को रोक लिया।'


5. अंतरराष्ट्रीय कानूनी सलाहकार रीमा ओमेर ने कहा- कोर्ट ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आर्टिकल 36(1) यानी कॉन्स्यूलर एक्सेस दिए जाने के उल्लंघन के संदर्भ में अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।

 

20 साल में दूसरा मौका जब इंटरनेशनल कोर्ट में भारत से हारा पाकिस्तान
10 अगस्त 1999 को वायुसेना ने गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान नेवी के एयरक्राफ्ट एटलांटिक को मार गिराया था। इसमें सवार सभी 16 सैनिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का दावा था कि एयरक्राफ्ट को उसके एयरस्पेस में गिराया गया। उसने इस मामले में भारत से 6 करोड़ डाॅलर मुआवजा मांगा था। आईसीजे की 16 जजों की बेंच ने 21 जून 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद यह दूसरा मौका है, जब पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय अदालत में हार हुई है और कोर्ट ने उससे जाधव की फांसी की सजा पर पुनर्विचार करने को कहा है।

 

पाक का दावा कोर्ट के सामने गलत साबित हुआ- साल्वे
भारत का पक्ष आईसीजे में रखने वाले हरीश साल्वे ने कहा- आईसीजे ने इस मामले में जिस तरह से हस्तक्षेप किया, मैं अपने देश की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कुलभूषण जाधव को बचाया। पाकिस्तान लगातार कोर्ट के सामने यह दावा कर रहा था कि जाधव की राष्ट्रीयता निश्चित नहीं थी। उसका यह दावा भी कोर्ट के सामने गलत साबित हुआ।

 

जाधव के खिलाफ पाक सेना के ट्रायल को भारत ने चुनौती दी
भारत ने मई 2017 में आईसीजे के सामने यह मामला उठाया था। पाकिस्तान पर जाधव को काउंसलर न मुहैया करवाने का आरोप लगाया। भारत ने जाधव (48) के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के ट्रायल को भी चुनौती दी। आईसीजे ने 18 मई 2017 को पाकिस्तान पर जाधव के खिलाफ फैसला आने तक किसी भी तरह की कार्रवाई किए जाने को लेकर रोक लगाई।

फरवरी में अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने इस मामले में चार दिन सुनवाई की थी। इस दौरान भारत-पाकिस्तान ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। भारत ने अपने केस का आधार दो बड़ी बातों को बनाया। इनमें वियना संधि के अंतर्गत काउंसलर एक्सेस और मामले को हल करने की प्रक्रिया शामिल है।

 

पाक ने कहा- जाधव बिजनेसमैन नहीं, बल्कि जासूस
भारत ने कहा- जाधव की मौत की सजा रद्द की जाए। उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए जाएं। पाकिस्तानी सेना के द्वारा सुनाया गया फैसला पूरी तरह से हास्यास्पद है। इस पर पाक ने कहा था कि भारतीय नौसेना अधिकारी जाधव एक बिजनेसमैन नहीं बल्कि एक जासूस है। पाक ने दावा कि हमारी सेना ने 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान से जाधव को गिरफ्तार किया था। वह ईरान से पाकिस्तान में दाखिल हुआ था।

 

भारत ने कहा- जाधव को ईरान से किडनैप किया गया
भारत के मुताबिक, जाधव को ईरान से किडनैप किया गया। जाधव वहां नौसेना से रिटायर होने के बाद बिजनेस करने की कोशिश में थे। पाकिस्तान ने आईसीजे के समक्ष की गई भारत की याचिका को नकार दिया। इसमें भारत ने जाधव के लिए काउंसलर एक्सेस की मांग की थी।

 

पाक ने जाधव के कथित कबूलनामे के वीडियो जारी किए थे
पाकिस्तान ने जाधव के कथित कबूलनामे के दो वीडियो जारी किए थे। इन वीडियो में कट नजर आए थे। इसमें कोई सवाल-जवाब नहीं था। सिर्फ बयान था।

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