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हिमाचल में गिरा मुसीबतों का पहाड़:किन्नौर लैंडस्लाइड हादसे में अब तक 14 की मौत, 16 अब भी लापता; 13 लोग रेस्क्यू किए गए

किन्नौर, हिमाचल प्रदेश5 महीने पहले

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में बुधवार को एक बार फिर लैंडस्लाइडिंग होने से बड़ा हादसा हो गया। शिमला-किन्नौर नेशनल हाईवे-5 पर ज्यूरी रोड के निगोसारी और चौरा के बीच अचानक एक पहाड़ दरक गया। जिससे चट्टानें एक बस और कुछ गाड़ियों पर जा गिरीं। मलबे से 4 शव और निकाले गए हैं।

इसके बाद मरने वालों की संख्या 14 हो गई है। वहीं 13 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। 16 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और NDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं। वहीं ITBP को भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया है।

मलबे में दबी बस हिमाचल रोडवेज की है, जो मूरंग से हरिद्वार जा रही थी। इसके अलावा एक ट्रक, बोलेरो और 3 टैक्सी भी चट्टानें गिरने से दब गई थीं। हिमाचल सरकार ने रेस्क्यू के लिए उत्तराखंड और हरियाणा सरकार से हेलिकॉप्टर मांगे हैं। आर्मी ने भी अपने दो हेलिकॉप्टर भेजे हैं।

इस हादसे में बस के कंडक्टर मोहेंद्र पाल और ड्राइवर गुलाब सिंह सुरक्षित हैं। ये दोनों सड़क पर पहले से गिरे पत्थर देखने के लिए बस से बाहर निकले थे। इसी दौरान पहाड़ से मलबा गिर गया और बस दब गई। दोनों ने भागकर अपनी जान बचा ली। कंडक्टर का कहना है कि बस में 25 सवारियां थीं।

हादसे के बाद बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने ही अफसरों को सूचना दी थी, जिसके बाद रेस्क्यू शुरू किया गया।
हादसे के बाद बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने ही अफसरों को सूचना दी थी, जिसके बाद रेस्क्यू शुरू किया गया।
चट्टानें गिरने से कई वाहन मलबे में दब गए तो कुछ पहाड़ी पर लटक गए। मलबे में दबी बस का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बस में 25 लोग सवार थे।
चट्टानें गिरने से कई वाहन मलबे में दब गए तो कुछ पहाड़ी पर लटक गए। मलबे में दबी बस का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बस में 25 लोग सवार थे।

ड्राइवर-कंडक्टर ने सुनाई हादसे की आंखों देखी
बस कंडक्टर महेंद्र पाल ने बताया, 'बस में करीब 25 यात्री सवार थे। जैसे ही हम निगुलसेरी पहुंचे, तो देखा कि सामने पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। हमने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर कार और ट्रक समेत दूसरी गाड़ियां भी रुक गईं। इसके बाद अचानक पहाड़ी चट्टानें सभी गाड़ियों पर गिर गईं।'

जिस जगह लैंडस्लाइड हुआ वहां ITBP के जवान मलबा हटाकर लोगों को तलाश रहे हैं।
जिस जगह लैंडस्लाइड हुआ वहां ITBP के जवान मलबा हटाकर लोगों को तलाश रहे हैं।
मलबे में मिले शव को ले जाते हुए NDRF के जवान। देर रात बचाव कार्य में दिक्कतें आई थीं, लेकिन सुबह करीब 3.30 बजे से रेस्क्यू फिर तेज कर दिया गया।
मलबे में मिले शव को ले जाते हुए NDRF के जवान। देर रात बचाव कार्य में दिक्कतें आई थीं, लेकिन सुबह करीब 3.30 बजे से रेस्क्यू फिर तेज कर दिया गया।

ड्राइवर गुलाब सिंह ने बताया, 'यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि बस यहां से गुजर पाएगी या नहीं। ऐसे में मैं और कंडक्टर बस से उतर कर पैदल सड़क पर चल पड़े। जैसे ही थोड़े आगे निकले, चट्टानें गिरनी शुरू हो गईं। हम दोनों पीछे की तरफ भागे और सड़क किनारे एक जगह पर छिप गए। इसके बाद भारी भरकम चट्टानें और मलबा बस समेत दूसरे वाहनों पर गिर गए। वो माहौल बेहद डरावना था।'

मलबे में दबी एक कार की ये हालत हो गई। रेस्क्यू में जुटी टीम ने 25 लोगों को अस्पताल पहुंचाया। इनमें से 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 15 की हालत नाजुक है।
मलबे में दबी एक कार की ये हालत हो गई। रेस्क्यू में जुटी टीम ने 25 लोगों को अस्पताल पहुंचाया। इनमें से 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 15 की हालत नाजुक है।

किन्नौर में पिछले महीने भी हुआ था भूस्खलन
25 जुलाई को किन्नौर में भूस्खलन के बाद पहाड़ी से चट्‌टानें इतनी तेजी से नीचे गिरीं कि बस्पा नदी का पुल टूट गया था। इस हादसे में 9 टूरिस्ट्स की मौत हो गई थी। मरने वालों में 4 राजस्थान के, 2 छत्तीसगढ़ के और एक-एक महाराष्ट्र और वेस्ट दिल्ली के थे। पर्यटक ट्रैवलर गाड़ी में छितकुल से सांगला की ओर जा रहे थे, तभी बटसेरी के गुंसा के पास चट्‌टानें गिरने से पुल टूट गया और पर्यटकों की गाड़ी भी चपेट में आ गई।

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