पत्र: मोदी को लिखा था- '4 साल में आपने गंगा के लिए कुछ नहीं किया', गंगा के लिए जान दे देने वाले जीडी अग्रवाल के आखिरी खत की 5 बड़ी बातें, जिनमें पीएम को सुनाई खरी-खरी / पत्र: मोदी को लिखा था- '4 साल में आपने गंगा के लिए कुछ नहीं किया', गंगा के लिए जान दे देने वाले जीडी अग्रवाल के आखिरी खत की 5 बड़ी बातें, जिनमें पीएम को सुनाई खरी-खरी

dainikbhaskar.com

Oct 12, 2018, 11:50 AM IST

मोदी को लिखा वो आखिरी खत जिसके जवाब के इंतजार में चली गई 'गंगापुत्र' की जान

last letter of environmentalist gd agarwal to modi

नेशनल डेस्क/ ऋषिकेश: गंगा की सफाई के लिए जान देने वाले पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल का आखिरी पत्र सामने आया है, जो उन्होंने पीएम मोदी को लिखा था। Dainikbhaskar.com के पास उस पत्र की कॉपी है। जीडी अग्रवाल लंबे समय से गंगा की अविरलता बनाए रखने के लिए विशेष कानून बनाने की मांग कर रहे थे। 111 दिन के अनशन के बाद उनका निधन हो गया था।

उन्होंने पीएम मोदी को तीन चिट्ठियां लिखीं थीं। हालांकि उनको इनके जवाब नहीं मिले।

पीएम मोदी को लिखी आखिरी चिट्ठी की 5 बड़ी बातें

  1. 'गंगाजी से संबंधित मामलों का उल्लेख करते हुए मैंने अतीत में आपको कुछ पत्र लिखे थे, लेकिन आपकी तरफ से अब तक मुझे इस संबंध कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। मुझे काफी भरोसा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद आप गंगाजी के बारे गंभीरता से सोचेंगे, क्योंकि आपने 2014 चुनावों के दौरान बनारस में स्वयं कहा था कि आप वहां इसलिए आए हैं क्योंकि आपको मां गंगाजी ने बुलाया है- उस पल मुझे विश्वास हो गया कि शायद गंगाजी के लिए कुछ सार्थक करेंगे, इस विश्वास के चलते मैं पिछले साढ़े चार साल से शांति से इंतजार कर रहा था।'
  2. 'मुझे आपसे उम्मीद थी कि आप गंगाजी के लिए दो कदम आगे बढ़ते हुए विशेष प्रयास करेंगे, क्योंकि आपने आगे आते हुए गंगा पर अलग से मंत्रालय बनाया था, लेकिन पिछले चार वर्षों में आपकी सरकार द्वारा किए गए सभी कार्य गंगाजी के लिए तो लाभकारी नहीं रहे, लेकिन उनके स्थान पर केवल कॉरपोरेट क्षेत्र और व्यावसायिक घरानों का लाभ देखने को मिला, अब तक आपने केवल गंगाजी से लाभ अर्जित करने के मुद्दे पर सोचा है, गंगाजी के संबंध में आपकी सभी परियोजनाओं से धारणा बनती है कि आप गंगाजी को कुछ भी नहीं दे रहे हैं, यहां तक कि महज बयान के तौर पर आप कह सकते हैं कि गंगाजी से कुछ लेना नहीं है लेकिन उन्हें हमारी तरफ से कुछ देना है।'
  3. '3.08.2018 को केंद्रीय मंत्री साधवी उमा भारती जी मुझसे मिलने आई थीं, उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी जी से मेरी बात कराई, लेकिन प्रतिक्रिया की उम्मीद आपसे है, इसीलिए मैने सुश्री उमा भारती जी को कोई जवाब नहीं दिया। मेरा यह अनुरोध है कि आप निम्नलिखित चार वांछित आवश्यकताओं को स्वीकार करें जो मेरे 13 जून 2018 को आपको लिखे गए पत्र में सूचीबद्ध है। यदि आप असफल रहें तो मैं अनशन जारी रखते हुए अपना जीवन त्याग दूंगा।'
  4. 'मुझे अपनी जान दे देने में कोई चिंता नहीं है, क्योंकि गंगाजी का काम मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। मैं आईआईटी का प्रोफेसर रहा हूं तथा मैं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं गंगाजी से जुड़ी हुई सरकारी संस्थाओं में रहा हूं, उसी के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आपकी सरकार ने इन चार सालों में कोई भी सार्थक प्रयत्न गंगाजी को बचाने की दिशा में नहीं किया है।'
  5. 'चूंकि मुझे 13 जून 2018 को आपको भेजे गए पत्र का उत्तर नहीं मिला, इसलिए मैं 22 जून 2018 से अपना अनशन शुरू किया है जैसा कि मैने इस पत्र में लिखा है, इस प्रकाश में यह पत्र आपकी जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की उम्मीद के साथ आपका धन्यवाद।'

आखिर क्या चाहते थे साइंटिस्ट से संन्यासी बने जीडी अग्रवाल?
गंगा की सफाई के लिए कानून बनाने को लेकर जीडी अग्रवाल ने केंद्र सरकार को एक मसौदा भेजा था, उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कानून में गंगा की पूरी सफाई का जिम्मा सरकारी अधिकारियों को दिया गया है, लेकिन सिर्फ उनके बूते गंगा साफ नहीं हो पाएगी। जीडी अग्रवाल चाहते थे कि गंगा को लेकर जो भी समिति बने उसमें जन सहभागिता हो, लेकिन कहीं ना कहीं केंद्र सरकार और उनके बीच उन मुद्दों पर सहमति नहीं बनी।

2014 में मोदी के आने पर अनशन रोका
2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक 'नमामि गंगे' परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया था।

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