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मुंबई / सुरबहार वादक अन्नपूर्णा देवी का 91 साल की उम्र में निधन, पंडित रविशंकर की पहली पत्नी थीं



Legendary classical musician Annapurna Devi dies in Mumbai hospital
पिता उस्ताद अलाउद्दीन खां के साथ अन्नपूर्णा देवी पिता उस्ताद अलाउद्दीन खां के साथ अन्नपूर्णा देवी
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Legendary classical musician Annapurna Devi dies in Mumbai hospital
पिता उस्ताद अलाउद्दीन खां के साथ अन्नपूर्णा देवीपिता उस्ताद अलाउद्दीन खां के साथ अन्नपूर्णा देवी
  • अन्नपूर्णा देवी को शास्त्रीय संगीत के लिए 1977 में पद्मभूषण मिला था
  • 1941 में पंडित रविशंकर से शादी हुई, 21 साल बाद तलाक हो गया
  • पंडित रविशंकर का निधन दिसंबर 2012 में हुआ

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 07:32 PM IST

मुंबई. मशहूर सुरबहार वादक अन्नपूर्णा देवी का मुंबई में निधन हो गया। वे 91 वर्ष की थीं। अन्नपूर्णा देवी वृद्धावस्था की वजह से कई बीमारियों से जूझ रही थीं और अस्पताल में भर्ती थीं। शनिवार तड़के 3 बजकर 51 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। अन्नपूर्णा देवी देश के जाने-माने सितार वादक पंडित रविशंकर की पूर्व पत्नी थीं। उनका जन्म मध्यप्रदेश के मैहर में 1927 में हुआ था। 1977 में उन्हें पद्मभूषण मिल चुका था। मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया अन्नपूर्णा देवी के प्रमुख शिष्यों में शामिल थे।

 

मुस्लिम परिवार में जन्मी थीं अन्नपूर्णा देवी

अन्नपूर्णा देवी का मूल नाम रोशनआरा खां था। वे मैहर घराने के उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां की बेटी थीं। अलाउद्दीन खां महाराजा बृजनाथ सिंह के दरबारी संगीतकार थे। उन्होंने जब बेटी के जन्म के बारे में दरबार में बताया तो महाराजा ने नवजात बच्ची का नाम अन्नपूर्णा रख दिया।

 

 

शादी से पहले हिंदू धर्म स्वीकार किया

अन्नपूर्णा देवी को शास्त्रीय संगीत और सुरबहार की शिक्षा अपने पिता उस्ताद अलाउद्दीन खां से मिली। पंडित रविशंकर भी खां साहब के शिष्य थे। पंडित रविशंकर से विवाह से पहले अन्नपूर्णा देवी ने 1941 में हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। 21 साल बाद दोनों का तलाक हो गया। पंडित रविशंकर से शादी टूटने के बाद अन्नपूर्णा देवी मुंबई चली गईं। 1982 में उन्होंने अपने शिष्य रूशिकुमार पंड्या से शादी कर ली। 2013 में पंड्या का निधन हो गया।

 

Annapurna

 

पत्नी की ज्यादा तारीफ पंडित रविशंकर को पसंद नहीं थी
अन्नपूर्णा देवी ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में पंडित रविशंकर से अपने रिश्तों के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था- हम दोनों 1950 के दशक में जब भी किसी शो में एक साथ कार्यक्रम पेश करते तो समीक्षक मेरी ज्यादा तारीफ करते। पंडितजी को यह अच्छा नहीं लगता था। वैवाहिक जिंदगी पर इसका नकारात्मक असर पड़ने लगा। रविशंकर ने मुझे कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने से नहीं रोका लेकिन वे यह जता देते थे कि पत्नी को ज्यादा तारीफ मिलने से वे खुश नहीं हैं।

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