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लंच और डिनर ब्रेक के बिना रात 12 बजे तक चला सदन; रेल बजट और अनुदान मांगों पर चर्चा हुई

एक वर्ष पहले
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संसद भवन। (फाइल) - Dainik Bhaskar
संसद भवन। (फाइल)
  • आमतौर पर संसद के दोनों सदन सुबह 11 से शाम 6 बजे तक यानी 7 घंटे काम करते हैं
  • गुरुवार को रेल बजट पर दोपहर 1:15 बजे चर्चा शुरू हुई, ये रात 11:57 बजे खत्म हुई

नई दिल्ली. 17वीं लोकसभा ने गुरुवार को कामकाज के मामले में नई मिसाल पेश की। निचले सदन के सांसदों ने गुरुवार दोपहर 1:15 बजे रेल बजट पर चर्चा शुरू की। यह क्रम रात 11:57 बजे तक चला। खास बात ये है कि इस दौरान सांसदों ने लंच और डिनर ब्रेक भी नहीं लिया। सदन में रेल बजट 2020-21 के प्रावधानों और अनुदान मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। आमतौर पर संसद के दोनों सदन यानी लोकसभा और राज्यसभा सुबह 11 से शाम 6 बजे यानी 7 घंटे तक ही काम करते हैं।

तय वक्त से 6 घंटे ज्यादा चला सदन
लोकसभा में रेल बजट और अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सांसदों ने लंच और डिनर ब्रेक भी नहीं लिया। गुरुवार को अमूमन 7 घंटे चलने वाले संसद के निचले सदन में करीब 6 घंटे ज्यादा कामकाज हुआ। साल 2020 में यह सबसे लंबी चर्चा है। हालांकि, इसके पहले सदन ने कई बार इससे ज्यादा समय तक अहम मुद्दों पर चर्चा की है।

90 सांसदों ने चर्चा में हिस्सा लिया
भारत में रेलवे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे अहम जरिया है। करोड़ों लोग ट्रेन में यात्रा करते हैं। इसके साथ ही माल ढुलाई का भी यह बड़ा स्रोत है। लोकसभा में चर्चा के दौरान अनमैन्ड और मैन्ड (मानवरहित और गार्ड वाली) क्रॉसिंग पर विस्तार से चर्चा हुई। सुरक्षा संबंधी कुछ अन्य मुद्दे भी उठे। इसके अलावा रेलवे स्टेशन्स और ट्रेनों के देरी से चलने से संबंधित शिकायतों पर भी सांसदों ने विचार किया। कई सांसदों ने अपने क्षेत्रों की मांगें सामने रखीं। सत्तापक्ष के साथ ही विपक्षी सांसदों ने भी बहस में हिस्सा लिया।

पिछले साल रात 11:58 बजे तक चली थी कार्यवाही
11 जुलाई 2019 को भी गुरुवार था। इस दिन भी रेलवे से संबंधित मुद्दों पर लोकसभा में चर्चा हुई थी। यह दोपहर में शुरू होकर रात 11:58 बजे तक चली थी। तब संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि लोकसभा में बीते 18 साल में पहली बार इतनी देर तक कार्यवाही हुई। इस दौरान 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के लिए अनुदानों की मांगों पर चर्चा हुई थी। कांग्रेस, तृणमूल और अन्य विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर रेलवे को निजी हाथों में बेचने का आरोप लगाया।