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महाभारत-2019 / भाजपा की 3 महीनों में 6 मोर्चों की बैठक, जगह का चयन जाति और सीटों के समीकरण के मुताबिक



mahabharat 2019 exclusive report
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mahabharat 2019 exclusive report

  • भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के 7 मोर्चों के जरिए सोशल इंजीनियरिंग की बिसात बिछाई
  • अधिवेशनों में शामिल होंगे 10-10 हजार लाेग; महिला, युवा, किसान, एससी-एसटी, ओबीसी सभी को साधने की कोशिश

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 09:36 AM IST

नई दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के सात मोर्चों के जरिए सोशल इंजीनियरिंग की बिसात बिछा दी है। लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर भाजपा ने अपने सातों मोर्चों को एक्टिवेट करने और माइक्रो मैनेजमेंट की व्यापक रणनीति बनाई है। अब तक युवा और महिला मोर्चों को छोड़कर बाकी पांच मोर्चे महज नाम के लिए बनाए जाते थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनाव में मोर्चों के जरिए भाजपा ने सामाजिक समीकरण बैठाने में सफलता हासिल की। इसलिए शाह इसे देशभर में आजमाने जा रहे हैं।    

 

भाजपा मोर्चों के जरिए चार स्तरीय योजना को अंजाम देना चाहती है। पहली- चुनाव का माइक्रो प्रबंधन, दूसरी- संबंधित समाज के बीच जाना, तीसरी- मंडल तक की टीम को सक्रिय करना और चौथी- उस प्रदेश से चुनाव का आगाज करना।भाजपा के अभी महिला, युवा, किसान, एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक समेत सात मोर्चे हैं। इन सात में से छह मोर्चों के महाधिवेशन दिसंबर से फरवरी के बीच होने हैं।

 

अक्टूबर के आखिर में युवा मोर्चे का अधिवेशन हैदराबाद में तेलंगाना विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हो चुका है। बाकी छह मोर्चों के लिए बनी रणनीति के हिसाब से कम से कम 10 हजार लोग हर बैठक में होंगे और उसके बाद होने वाली रैली में 50 हजार की संख्या जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में मोर्चे के केंद्र से लेकर मंडल तक के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य शामिल होंगे। अधिवेशनों की रणनीतिक गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर मोर्चे की बैठक या रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह शामिल होंगे। 


अधिवेशनों के लिए स्थान का चयन भी रणनीतिक रूप से किया है। गुजरात में महिलाओं की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी को देखते हुए 21-22 दिसंबर को गुजरात में महिला मोर्चे का राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। दिसंबर के आखिर में मुंबई (महाराष्ट्र) में अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चे का अधिवेशन होगा। महाराष्ट्र में दलित आबादी ज्यादा है, इसलिए मुंबई का चयन किया है। जबकि अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चे का महाधिवेशन ओडिशा में होगा। ओडिशा 2019 के चुनाव के मद्देनजर भाजपा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि अभी 21 सीटों वाले इस राज्य से भाजपा के पास सिर्फ एक सीट है। 


भाजपा इस अधिवेशन के जरिए आदिवासियों में अपना संदेश देने के अलावा वहां की टीम को रिचार्ज करने की कोशिश कर रही है। इसी तरह शाह के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार भाजपा में बने ओबीसी मोर्चे का महाधिवेशन बिहार की राजधानी पटना में होगा। पिछड़ा-अति पिछड़ा पर आधारित बिहार की राजनीति के लिहाज से ही भाजपा ने पटना को चुना है। जबकि 2019 में अहम मुद्दा बनने जा रहे किसानों को लेकर चिंतित भाजपा ने किसान मोर्चा अधिवेशन के लिए सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश का चयन किया है।

 

अल्पसंख्यक मोर्चे का अधिवेशन देश की राजधानी दिल्ली में होगा। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का कहना है कि सभी मोर्चाें के अधिवेशनों में सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। अधिवेशनों का उद्देश्य उस वर्ग में संगठन की गतिविधियों को तेज करना और आगे बढ़ाना है। साथ ही केंद्र सरकार की उपलब्धियों को उस वर्ग के बीच पहुंचाने की रणनीति है।

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