महाभारत-2019 / कर्नाटक में भाजपा जीती थी 17 सीटें, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन बढ़ाएगा मुश्किल

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2018, 01:47 AM IST



mahabharat 2019 karnataka ground report
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mahabharat 2019 karnataka ground report

  • दक्षिण के 5 राज्यों और पश्चिम बंगाल को मिलाकर भाजपा के पास लोकसभा की 171 में से महज 22 सीटें, इनमें सबसे ज्यादा कर्नाटक में हैं
  • लेकिन, विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनने और फिर उपचुनावों में गठबंधन की जीत ने भाजपा के लिए हालात चिंताजनक बना दिए हैं

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, बेंगलुरु. यहां केके मार्केट में छोटी-सी दुकान चलाने वाले शिवकुमार कहते हैं कि भले ही राज्य में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार बहुत अच्छा काम नहीं कर रही, लेकिन दोनों के एक होने के बाद भाजपा को नुकसान जरूर होगा। इधर, 6 नवंबर को आए तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों के परिणाम भी इसी ओर इशारा करते हैं। इनमें चार सीटें कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन द्वारा जीते जाने के बाद यहां दो ही चर्चा आम हैं। पहली-2019 में भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी और दूसरी- कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों दलों के गठबंधन ने असर दिखाया तो यह राज्य में 20 से 23 सीटें जीत सकता है। ऐसे में भाजपा के पास पांच से आठ सीटें ही आ पाएंगी। उपचुनाव में खनन कारोबारी रेड्‌डी बंधुओं के मजबूत किले बेल्लारी में भी 14 साल बाद कांग्रेस उम्मीदवार जीता है। 

 

जेडीएस के सेक्रेटरी जनरल कुंवर दानिश अली कहते हैं कि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर 2019 में गठबंधन के साथ ही उतरेेंगे। पहले कहा जाता था कि गठबंधन से कार्यकर्ता-आम जनता नहीं जुटेगी। लेकिन सब एक साथ आए। यह बात उपचुनावों ने साबित कर दी है। सीटों के संबंध में उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस का संगठन बड़ा है, इसलिए वह अधिक सीटों पर लड़ेगी। वैसे माना जा रहा है कि जेडीएस राज्य में 10 से 12 लोकसभा सीटों पर और कांग्रेस 16 से 18 सीटों पर लड़ सकती है।

 

राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव उपचुनाव परिणाम के बाद लोकसभा चुनाव जेडीएस से मिलकर लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषक श्रीनिवास शास्त्री के मुताबिक भाजपा को एक अन्य नुकसान अनंतकुमार के निधन से भी होगा, विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक में। अनंत कुमार बेंगलुरू दक्षिण से सांसद रहे। इसके अलावा दक्षिण व मैसूर कर्नाटक में गठबंधन के बाद जेडीएस और मजबूत हो जाएगी।

 

भाजपा से राज्यसभा सदस्य रहे बासवराज पाटिल कहते हैं कि राज्य और केंद्र के चुनाव अलग-अलग होते हैं, उपचुनाव का भी लोकसभा चुनाव पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि प्रजावाणी के पॉलिटिकल एडिटर जगदीश कहते हैं कि राज्य में भाजपा की स्थिति थोड़ी खराब है। एकमात्र बड़े नेता येदियुरप्पा हैं, लेकिन 75 वर्ष से अधिक उम्र के कारण वे प्रचार के लिए भाग-दौड़ नहीं कर पाएंगे, जिससे नुकसान हो सकता है।
 

2014 के लोकसभा चुनाव में यह थी सीटों की स्थिति

 

पार्टी  सीट
भाजपा 17
कांग्रेस 09
जेडीएस 02

 

हाल ही में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से 14 साल बाद बेल्लारी लोकसभा सीट जीत ली।

 

राज्य में ये हैं अहम मुद्दे

 

  • किसानों की बदहाल स्थिति : राज्य में किसानों की आत्महत्या और खस्ता हालत लगातार मुद्दा बना हुआ है। उत्तर कर्नाटक में बाढ़ और गन्ना किसानों की बदहाल स्थिति बड़ा चुनावी मुद्दा है। राज्य सरकार द्वारा दो लाख तक के कृषि लोन माफ करने की घोषणा भी बड़ा मुद्दा है। क्योंकि ऋण माफी पूरी तरह से अमलीजामा नहीं पहन पाई है।
  • बेरोजगारी : बेरोजगारी की समस्या राज्य में बड़ा मुद्दा है, रोजगार के अवसर बेंगलुरू और उसके आस-पास ही सीमित हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बड़ा मुद्दा है।
  • लिंगायत : कांग्रेस ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी थी। अभी तक लिंगायत के बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है। लिंगायत राज्य में भाजपा का बड़ा वोट बैंक है।

 

इसलिए सीटें गंवा सकती है भाजपा
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 40.80%, वहीं जेडीएस को कुल 11% वोट मिले थे। यानी कुल 51.8%। गठबंधन होता है तो वोक्कालिगा वोट लगभग पूरी तरह से इनके साथ आ सकता है। एचडी देवेगौड़ा व कांग्रेस के वीके शिवकुमार भी इसी समुदाय के हैं। वोक्कालिगा वोट राज्य में करीब 16% है। वहीं दलित-मुस्लिम का बड़ा तबका गठबंधन के साथ आ सकता है। जी. परमेश्वर, मल्लिकार्जुन खडगे और सिद्दारमैया बड़े दलित नेता कांग्रेस में हैं। भाजपा को लिंगायत वोट बड़ी संख्या में मिलते हैं। लिंगायत करीब 17% हैं। कांग्रेस ने अलग धर्म का मुद्दा छेड़कर इस समुदाय में पैठ बनाने की कोशिश की है। 

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