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मुंबई:कोरोना पेशेंट्स के लिए कार्डबोर्ड का बेड; सूटकेस की तरह किया जा सकता है फोल्ड, 300 किलो वजन उठाने में सक्षम, कीमत 1 हजार से भी कम

मुंबई4 महीने पहले
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6x4"के इस बेड पर एक व्यक्ति आसानी से हो सकता है।
  • कार्डबोर्ड से बने इन बेड को मुंबई के जायना पैकेजिंग नाम की कंपनी ने तैयार किया है
  • 6’x3’x1.5’ के इस बेड को एक सूटकेस की तरह फोल्ड करके कहीं भी ले जाया जा सकता है
  • वजन में बेहद हल्के इस बेड को एक व्यक्ति आसानी से किसी भी कोने में शिफ्ट कर सकता है

गुरुवार शाम तक महाराष्ट्र में 40 हजार और मुंबई में 30 हजार से ज्यादा संक्रमित मरीज कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। यही नहीं, सरकार ने 4 लाख से ज्यादा लोगों को क्वारैंटाइन किया है। इससे मुंबई में कोविड अस्पतालों में मरीजों के लिए तैयार किए गए सभी 3500 बेड भर गए हैं। मजबूरन अस्पतालों को सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर दो बेड के बीच में एक बेड और लगाना पड़ रहा है।

बीएमसी ने विकल्प के रूप में सभी बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल के आईसीयू को अपने कब्जे में ले लिया है। वानखेड़े स्टेडियम, जिमखाना क्लब और बड़े क्लब हाउसों को भी कोविड पेशेंट के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां हजारों की संख्या में बेड लगाए जाएंगे।

हरेश मेहता की कंपनी हर महीने 50 हजार से ज्यादा बेड का निर्माण करती है।
हरेश मेहता की कंपनी हर महीने 50 हजार से ज्यादा बेड का निर्माण करती है।

300 किलोग्राम का भार सह सकते हैं ये बेड

एक साथ इतने ज्यादा बेड की डिमांड को पूरा करने के लिए बीएमसी अब कार्डबोर्ड से बने सॉलिड बेड बड़े-बड़े क्वारैंटाइन सेंटर और आइसोलेशन वार्ड में लगा रही है। कार्डबोर्ड से बने इन बेड को मुंबई के जायना पैकेजिंग नाम की कंपनी ने तैयार किया है। 30 साल से पैकिंग और फर्नीचर के निर्माण से जुड़ी इस कंपनी के ओनर हरेश मेहता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कार्डबोर्ड से बने होने के बावजूद ये बेड बहुत सॉलिड हैं। ये 300 किलोग्राम तक का वजन आसानी से सहन कर सकते हैं।

हरेश का कहना है कि इस बेड पर एक साथ दो से तीन लोग आसानी से खड़े हो सकते हैं।
हरेश का कहना है कि इस बेड पर एक साथ दो से तीन लोग आसानी से खड़े हो सकते हैं।

बेड की खासियत

  • 6’x3’x1.5’ साइज के इस बेड को एक सूटकेस की तरह फोल्ड करके कहीं भी ले जाया जा सकता है।
  • इसे सिर्फ 3 मिनट में इंस्टाॅल किया जा सकता है।
  • कम्प्रेस कार्डबोर्ड से बने होने के कारण इसपर 300 किलोग्राम का वजन रखा जा सकता है।
  • वजन में बेहद हलके इस बेड को एक व्यक्ति आसानी से किसी भी कोने में शिफ्ट कर सकता है।
  • सूखे कपड़े से इसे आसानी से साफ किया जा सकता है। इस पर कीटाणु सिर्फ 24 घंटे तक रह सकते हैं।
  • कोविड पेशेंट के इस्तेमाल के बाद इसे सैनिटाइज और रीसाइकिल किया जा सकता है।
  • खास यह है कि इसमें कोई भी मेटल पिन और स्टेपल्स इस्तेमाल नहीं किए गए हैं।
  • कंपनी की ओर से फिलहाल एक बेड की कीमत करीब 1 हजार रुपए के अन्दर रखी गई है।
इस बेड को सिर्फ दो दिन की रिसर्च में तैयार किया गया है। हरेश पहले से इससे मिलता-जुलता बेड इस्तेमाल कर रहे थे।
इस बेड को सिर्फ दो दिन की रिसर्च में तैयार किया गया है। हरेश पहले से इससे मिलता-जुलता बेड इस्तेमाल कर रहे थे।

बेड के इस्तेमाल के दौरान रखनी होंगी यह सावधानी

हरेश मेहता ने बताया,"यह बेड कार्डबोर्ड से बना है, इसलिए इसे ज्यादा पानी से बचाना होगा। पानी की बूंदें या कम पानी यह आसानी से झेल सकता है।" उन्होंने बताया कि कार्डबोर्ड का बना होने और सस्ता होने के कारण हॉस्पिटल इसे एक बार के इस्तेमाल के बाद नष्ट भी कर सकते हैं।  

ऐसे आया कार्डबोर्ड बेड बनाने का आइडिया
हरेश मेहता ने आगे बताया- "हम कार्डबोर्ड के मटेरियल के निर्माण में 30 साल से जुड़े हुए हैं। पहले से इससे बनी कुर्सी और टेबल बनाते रहे हैं। हम अपने घर में इससे बने बेड इस्तेमाल कर रहे थे। मार्च में जब कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे तो मैंने अपनी रिसर्च टीम से इस पर चर्चा की और उन्होंने सिर्फ 2 दिन के प्रयास में यह शानदार बेड तैयार कर लिया। शुरू में इसका प्रोडक्शन कम था, लेकिन अब बीएमसी समेत कई प्राइवेट हॉस्पिटल की ओर से मिले ऑर्डर के बाद हमने इसके निर्माण में तेजी ला दी है।" मेहता ने बताया कि बेड बनाने का आइडिया पूरी तरह से उनका और मेड इन इंडिया है।

हरेश की कंपनी ने डॉक्टरों और नर्सों के लिए टेबल, कुर्सी और अलमारी भी कार्डबोर्ड से तैयार की है।
हरेश की कंपनी ने डॉक्टरों और नर्सों के लिए टेबल, कुर्सी और अलमारी भी कार्डबोर्ड से तैयार की है।

डॉक्टरों के लिए तैयार की कुर्सी, टेबल और अलमारी

मेहता ने आगे बताया कि दुनिया के कुछ देशों में इस तरह के बेड जरुर इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन वे लाइट वेट नहीं है। न ही उन्हें पैक करके एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। बेड के बाद अब हरेश मेहता की कंपनी ने डॉक्टरों और नर्सों के लिए कार्डबोर्ड से बनी कुर्सी, टेबल और अलमारी तैयार की है। उन्होंने एक आराम कुर्सी भी स्टाफ के लिए तैयार की है, जिसपर स्वास्थ्यकर्मी लेटकर अपनी थकान मिटा सकते हैं।

विदेशों से भी मिले कई ऑर्डर
बेड की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। हरेश मेहता को दुनिया के कई देशों से इसके ऑर्डर मिले हैं। लेकिन उनका कहना है कि वे पहले देश की जरुरत पूरा करेंगे और फिर दुनिया के किसी अन्य देश में इसकी सप्लाई करेंगे। बीएमसी के साथ एक बड़ा ऑर्डर अभी पाइपलाइन में हैं। हरेश की कंपनी हर महीने 50 हजार बेड का निर्माण कर रही है। 

बना सकते हैं कार्डबोर्ड की डिस्पेंसरी और वार्ड
हरेश ने बताया कि कार्डबोर्ड से बने एक रेस्टोरेंट का निर्माण भी उनकी कंपनी कर चुकी है। अगर जरुरत पड़ी तो वे इस कार्डबोर्ड से एक छोटी डिस्पेंसरी और वार्ड तैयार कर देंगे।    

गुजरात में भी बना इसी तरह का एक बेड

हार्वर्ड विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर चुकी गुजरात की रिया शाह ने वापी (गुजरात) में भी इसी तरह के एक बेड का निर्माण किया है। हालांकि, हरेश मेहता और रिया के बेड में अंतर है कि रिया के बेड को कॉम्पेक्ट या सूटकेस की तरह फोल्ड नहीं किया जा सकता।  

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