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शिवसेना पर SC में सुनवाई कल तक टली:साल्वे बोले- एक नेता पूरी पार्टी नहीं; CJI ने कहा-हमने सुनवाई टाली, आपने सरकार बना ली

नई दिल्ली4 महीने पहले

महाराष्ट्र के सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट की ओर से दाखिल 5 याचिकाओं पर दोनों पक्षों के वकीलों में गरमागरम बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे पक्ष के वकील से कहा- हमने 10 दिन के लिए सुनवाई टाली थी। आपने सरकार बना ली, स्पीकर बदल दिया। इस पर शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे ने कहा- उद्धव ठाकरे ने खुद ही CM पद से इस्तीफा दे दिया था। एक व्यक्ति या नेता पूरी पार्टी नहीं हो सकता है। CJI एनवी रमना ने कहा- हम कल (गुरुवार को) इस केस को सुबह साढ़े दस बजे सुनेंगे।

सिब्बल बोले- विधायक या तो किसी पार्टी में विलय करें या नई पार्टी बनाएं
सबसे पहले उद्धव कैंप के वकील कपिल सिब्बल ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- अगर 2 तिहाई विधायक शिवसेना से अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें किसी से विलय करना होगा या नई पार्टी बनानी होगी। वह नहीं कह सकते कि वह मूल पार्टी हैं। CJI ने पूछा कि मतलब आप कह रहे हैं कि उन्हें BJP में विलय करना चाहिए था या अलग पार्टी बनानी थी। सिब्बल बोले- कानूनन तो यही करना था।

उद्धव गुट के वकीलों की जिरह

सिब्बल बोले- जिस तरह से उन्होंने (शिंदे गुट) पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। वे मूल पार्टी होने का दावा नहीं कर सकते। 10वीं अनुसूची इसकी अनुमति नहीं देती है। पार्टी सिर्फ विधायकों का समूह नहीं होती है। इन लोगों को पार्टी की बैठक में बुलाया गया। वह नहीं आए। डिप्टी स्पीकर को चिट्ठी लिख दी। अपना व्हिप नियुक्त कर दिया। असल में उन्होंने पार्टी छोड़ी है। वह मूल पार्टी होने का दावा नहीं कर सकते। आज भी शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे हैं।

सिब्बल ने कहा- जब संविधान में 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी प्रावधान) को जोड़ा गया, तो उसका कुछ उद्देश्य था। अगर इस तरह के दुरुपयोग को अनुमति दी गई तो विधायकों का बहुमत सरकार को गिरा कर गलत तरीके से सत्ता पाता रहेगा और पार्टी पर भी दावा करेगा। पार्टी की सदस्यता छोड़ने वाले विधायक अयोग्य हैं। चुनाव आयोग जाकर पार्टी पर दावा कैसे कर सकते हैं?

उद्धव कैंप के दूसरे वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा इन लोगों को किसी पार्टी में विलय करना था। वह जानते हैं कि असली पार्टी नहीं हैं, लेकिन चुनाव आयोग से मान्यता पाने की कोशिश कर रहे हैं।

शिंदे गुट की दलीलें

शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे: जिस नेता को बहुमत का समर्थन न हो वह कैसे बना रह सकता है? जब पार्टी में अंदरूनी बंटवारा हो चुका हो तो दूसरे गुट की बैठक में न जाना अयोग्यता कैसे हो गया?

इस पर CJI ने पूछा: इस तरह से तो पार्टी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। विधायक चुने जाने के बाद कोई कुछ भी कर सकेगा।

साल्वे ने जवाब दिया: हमारे यहां एक भ्रम है कि किसी नेता को ही पूरी पार्टी मान लिया जाता है। हम अभी भी पार्टी में हैं। हमने पार्टी नहीं छोड़ी है। हमने नेता के खिलाफ आवाज उठाई है।

CJI ने फिर पूछा: आप चुनाव आयोग क्यों गए हैं?
साल्वे: CM के इस्तीफे के बाद स्थिति में बदलाव हुआ है। अब BMC चुनाव आने वाला है। यह तय होना जरूरी है कि पार्टी का चुनाव चिह्न कौन इस्तेमाल करेगा।

CJI: हमने 10 दिन के लिए सुनवाई टाली थी। इस बीच आपने सरकार बना ली। स्पीकर बदल गए। अब आप कह रहे हैं, सारी बातें निरर्थक हैं।
साल्वे: मैं ऐसा नहीं कह रहा कि इन बातों पर अब विचार ही नहीं होना चाहिए।

CJI: साल्वे आप अपने बिंदुओं को ठीक से ड्राफ्ट कर हमें सौंपिए। हम कल 10 से 15 मिनट विचार करेंगे।

शिंदे कैंप के वकील नीरज किशन कौल: दूसरा पक्ष कोशिश कर रहा है कि चुनाव आयोग को पार्टी चुनाव चिह्न पर कार्रवाई न करने दी जाए। लेकिन, यह अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है। सिंबल रूल्स में भी यही व्यवस्था है। उसे उसके काम से नहीं रोका जा सकता।

20 जुलाई को सुनवाई में शिंदे गुट ने कहा था कि उद्धव ने बहुमत नहीं होने पर इस्तीफा दिया था।
20 जुलाई को सुनवाई में शिंदे गुट ने कहा था कि उद्धव ने बहुमत नहीं होने पर इस्तीफा दिया था।

उद्धव गुट का हलफनामा- शिंदे और बागी विधायक अशुद्ध हाथ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। हलफनामे में कहा- महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार जहरीले पेड़ का फल है। इस जहरीले पेड़ के बीज बागी विधायकों ने बोए थे। शिंदे गुट के विधायकों ने संवैधानिक पाप किया है। शिंदे और बागी विधायक अशुद्ध हाथ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

शिंदे गुट बोला- याचिका खारिज हो
सोमवार को शिंदे गुट ने हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें कहा कि उद्धव गुट की याचिका को खारिज किया जाए। शिंदे गुट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में बहुमत खो दिया था। शिवसेना में लोकतांत्रिक तरीके से विभाजन हुआ, इसलिए कोर्ट इसमें हस्तक्षेप ना करे। शिंदे गुट ने कहा कि शिवसेना पर फैसला चुनाव आयोग को लेने दें। कोर्ट में यह तय नहीं होगा कि विभाजन सही है या नही?

उद्धव के पास सिर्फ 16 विधायक, हम बागी कैसे?
शिंदे गुट ने पिछले सुनवाई में तर्क दिया था कि उद्धव ठाकरे के पास सिर्फ 16 विधायक हैं, जबकि हमारे पास 39 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में हम बागी कैसे हो गए? उद्धव की याचिका पर सुनवाई करने का मतलब है कि बहुमत का अपमान।

फैसले के कारण मंत्रिमंडल विस्तार अटका
30 जून को महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे के साथ डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने शपथ ली थी। उनके शपथ ग्रहण के बाद से मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम अटका हुआ है। विधायकों की सदस्यता पर फैसला होने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावनाएं है।

सरकार बनने के बाद एकनाथ शिंदे 30 दिन में छह बार दिल्ली आ चुके हैं। मगर कैबिनेट विस्तार का मसला अब तक नहीं सुलझा है।
सरकार बनने के बाद एकनाथ शिंदे 30 दिन में छह बार दिल्ली आ चुके हैं। मगर कैबिनेट विस्तार का मसला अब तक नहीं सुलझा है।

महाराष्ट्र सियासी संकट का पूरा घटनाक्रम जानिए

  • 20 जून को शिवसेना के 15 विधायक 10 निर्दलीय विधायकों के साथ पहले सूरत और फिर गुवाहाटी के लिए निकल गए।
  • 23 जून को शिंदे ने दावा किया कि उनके पास शिवसेना के 35 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। लेटर जारी किया गया।
  • 25 जून को डिप्टी स्पीकर ने 16 बागी विधायकों को सदस्यता रद्द करने का नोटिस भेजा। बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
  • 26 जून को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना, केंद्र, महाराष्ट्र पुलिस और डिप्टी स्पीकर को नोटिस भेजा। बागी विधायकों को राहत कोर्ट से राहत मिली।
  • 28 जून को राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को बहुमत साबित करने के लिए कहा। देवेंद्र फडणवीस ने मांग की थी।
  • 29 जून को सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
  • 30 जून को एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री बनाए गए।
  • 3 जुलाई को विधानसभा के नए स्पीकर ने शिंदे गुट को सदन में मान्यता दे दी। अगले दिन शिंदे ने विश्वास मत हासिल कर लिया।
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