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शिंदे के मंच पर बालासाहेब के बेटे-बहू:एकनाथ बोले हमने गद्दारी नहीं गदर किया, उद्धव बोले- शिवसैनिक कटप्पा को माफ नहीं करेंगे

मुंबई2 महीने पहले

शिवसेना के इतिहास में पहली बार दो जगह दशहरा रैली हुईं। शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे की रैली हुई, उन्होंने कहा- शिवसैनिक कटप्पा को माफ नहीं करेंगे। वहीं BKC ग्राउंड पर सीएम एकनाथ शिंदे की रैली में ठाकरे परिवार के कई लोग शामिल हुए। शिंदे ने कहा- हमने गद्दारी नहीं, गदर (क्रांति) की। क्योंकि, वे जनता और हिंदुत्व के साथ गद्दारी कर रहे थे।

शिंदे बोले- गर्व से कहो हम हिंदू हैं
एकनाथ शिंदे ने छत्रपति शिवाजी महाराज, बाला साहेब ठाकरे के जयघोष के साथ अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले कहा- गर्व से कहो हम हिंदू है। मीडिया के मन में सवाल था कि असली शिवसेना कहा है। यहां मौजूद भीड़ को देखकर आप समझ गए होंगे कि बाला साहेब के विचारों के असली वारिस कहां हैं।

आप न्यायालय जाकर शिवाजी पार्क ले सकते हैं। मैं राज्य का मुख्यमंत्री हूं, इसलिए मैदान देने के मामले में हस्तक्षेप नहीं करूंगा। मैंने सबसे पहले आवेदन किया था। हमें मैदान मिल सकता था। कानून-व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी हमारी है। मैदान भले ही हमें नहीं मिला, लेकिन शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के विचार हमारे साथ हैं।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा- हम बाला साहेब ठाकरे के विचारों के उत्तराधिकारी हैं।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा- हम बाला साहेब ठाकरे के विचारों के उत्तराधिकारी हैं।

हमारा रिमोट एनसीपी को सौंपा
हजारों शिवसैनिकों ने अपना खून-पसीना जिस पार्टी के लिए बहाया, उस पार्टी को आपने कांग्रेस और एनसीपी के आगे गिरवी रख दिया। बाला साहेब रिमोट से सरकारें चलाते थे। आपने अपना रिमोट राष्ट्रवादी और कांग्रेस के हाथ में दिया। बाला साहेब ने जिन्हें हरामखोर कहा, उनके हाथ आपने शिवसेना को बांध दिया। इसलिए हमने शिवसेना के सम्मान के लिए यह कदम उठाया। खुलेआम उठाया। मुझे सबका समर्थन मिल रहा है।

हम बाला साहेब के विचारों के वारिस
शिवसेना न उद्धव ठाकरे की है, न एकनाथ शिंदे की है। यह सिर्फ बाला साहेब ठाकरे के विचारों की और तमाम शिवसैनिकों की शिवसेना है। हम बाला साहेब के विचारों को कभी नहीं छोड़ेंगे। हम सब बाला साहेब के निष्ठावान शिवसैनिक हैं। बाला साहेब के विचारों के असली विरासतदार उनके शिवसैनिक है।

हमें गद्दार और खोकासुर कहा गया। हां, गद्दारी हुई है। वो गद्दारी 2019 में हुई है। जो गठबंधन बनाया, वो बाला साहेब के विचारों से गद्दारी हुई, हिंदुत्व से गद्दारी हुई। महाराष्ट्र की जनता से गद्दारी हुई। चुनाव में बाला साहेब और नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाकर वोट मांगे थे। इसलिए लोगों ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन के लिए वोट दिए। लेकिन, आपने उसे नकार कर महाराष्ट्र की जनता के साथ गद्दारी की थी। हमने जो किया गद्दारी नहीं गदर किया है। गदर यानी क्रांति। हम गद्दार नहीं बाला साहेब के सैनिक हैं।

एकनाथ शिंदे के मंच पर बीचोंबीच एक प्रमुख कुर्सी लगाई गई। इस पर भगवा अंग वस्त्र रखा गया। यह कुर्सी बाला साहेब के सम्मान में खाली छोड़ी गई।
एकनाथ शिंदे के मंच पर बीचोंबीच एक प्रमुख कुर्सी लगाई गई। इस पर भगवा अंग वस्त्र रखा गया। यह कुर्सी बाला साहेब के सम्मान में खाली छोड़ी गई।

आतंकी के समर्थक को मंत्री बनाया
हमें बाप चुराने वाली टोली कहा। आपने तो बाला साहेब के विवारों को बेच दिया। मुंबई ब्लास्ट के दोषी आतंकी याकूब मेमन को फांसी की सजा दी गई थी। जो व्यक्ति उस सजा का विरोध कर रहा था, उसे आपने मंत्री बनाया। महाराष्ट्र की जनता आपको माफ नहीं करेगी। आपने जो गलती की है, आप बाला साहेब की समाधि पर जाकर घुटने टेको और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगो। कोरोना काल में आपने कोरोना-कोरोना करके सबको घर में बैठाया। ढाई साल में आप ढाई घंटे ही कार्यालय गए।

उद्धव ठाकरे बोले- इस बार का रावण खोकासुर

उद्धव ठाकरे ने कहा- हमने बीजेपी को छोड़ा है, हिंदुत्व को नहीं।
उद्धव ठाकरे ने कहा- हमने बीजेपी को छोड़ा है, हिंदुत्व को नहीं।

मुंबई के शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे ने कहा- जिसने शिवसेना से गद्दारी की, उन्हें गद्दार ही बोलूंगा। मंत्री पद उनके पास कुछ समय के लिए होगा, लेकिन इस जन्म से गद्दारी का दाग नहीं हटेगा। हर साल की परम्परा के तौर पर रावण दहन होगा। इस बार का रावण अलग है। इस बार का रावण अलग है। इस बार पचास खोके (करोड़) का खोकासुर है।

मैं बीमार था, उस समय जिसे जिम्मेदारी दी, उस कटप्पा ने धोखा दिया। उन्हें लगा उद्धव उठ नहीं पाएगा। वे नहीं जानते थे कि ये उद्धव नहीं उद्धव बाला साहेब ठाकरे है। विचित्र बात ये है, हमने सब दिया। मंत्री पद दिया। विधायक बनाया, मंत्री बनाया। जिन्हें दिया, वे नाराज होकर चले गए। जिन्हें दे नहीं पाया, वे निष्ठा से मेरे साथ खड़े हैं।

मैंने हिंदुत्व नहीं छोड़ा
भाजपा ने पीठ में खंजर भौंका था, इसलिए महाराष्ट्र विकास अघाड़ी बनाई। मैंने हिंदुत्व नहीं छोड़ा। जब मैं मुख्यमंत्री बना, तब ये भी थे। अमित शाह ने कहा हमारे बीच कुछ तय नहीं हुआ था। मैं शिवाजी महाराज के सामने अपने माता-पिता की शपथ लेकर कहता हूं। ढाई-ढाई साल के सीएम बनाने का तय हुआ था। अब जो किया, वो तब क्यों नहीं किया। तुम्हें शिवसेना खत्म करनी थी।

मैं शांत हूं, इसलिए मेरे कार्यकर्ता शांत हैं
मेरे कार्यकर्ता इसलिए शांत हैं क्योंकि मैं शांत हूं। अगर मैंने शांति छोड़ी तो आपका कानून आपके पास रह जाएगा। शिवसेना किस तरह चलानी है, ये तुम्हें सिखाने की जरूरत नहीं है। तुम मुझे हिन्दुत्व न सिखाए। मैंने बीजेपी को छोड़ा है, हिंदुत्व को नहीं। पाकिस्तान जाकर जिन्ना की कब्र पर घुटने टेकने वाले हमें हिंदुत्व सिखाओगे। नवाज शरीफ के घर खाना खाने वाले हमें हिंदुत्व सिखाओगे। आतंकवादियों से संबंध रखने वाले हमें हिंदुत्व सिखाएंगे।

शिंदे के मंच पर ठाकरे का परिवार
BKC ग्राउंड में एकनाथ शिंदे की दशहरा रैली में शिंदे को 15 फीट लंबी तलवार भेंट की गई। BKC ग्राउंड में शिंदे की रैली में भाग लेने उद्धव के भाई जयदेव ठाकरे भाभी स्मिता ठाकरे, भतीजे निहार ठाकरे और भाभी स्मिता ठाकरे भी हैं। निहार, उद्धव के सगे भाई बिंदू माधव ठाकरे का बेटा है। वे उद्धव से अलग रहते हैं। बिंदू माधव का अप्रैल 1996 में निधन हो गया था।

BKC ग्राउंड पर एकनाथ शिंदे के साथ उनके बगल में उद्धव के भाई जयदेव ठाकरे भी पहुंचे। जयदेव बाल ठाकरे के बेटे हैं।
BKC ग्राउंड पर एकनाथ शिंदे के साथ उनके बगल में उद्धव के भाई जयदेव ठाकरे भी पहुंचे। जयदेव बाल ठाकरे के बेटे हैं।
बाल ठाकरे की बहू और जयदेव ठाकरे की पत्नी स्मिता ठाकरे का पुष्प गुच्छ देकर एकनाथ शिंदे ने स्वागत किया।
बाल ठाकरे की बहू और जयदेव ठाकरे की पत्नी स्मिता ठाकरे का पुष्प गुच्छ देकर एकनाथ शिंदे ने स्वागत किया।
BKC ग्राउंड में हो रही शिंदे गुट की रैली में शाम छह बजे ही इतने लोग पहुंच गए थे कि वहां लोगों की एंट्री बंद कर दी गई।
BKC ग्राउंड में हो रही शिंदे गुट की रैली में शाम छह बजे ही इतने लोग पहुंच गए थे कि वहां लोगों की एंट्री बंद कर दी गई।
शिवाजी पार्क में होने वाली उद्धव गुट की दशहरा रैली में भगवा ध्वज लेकर कार्यकर्ता पहुंचे।
शिवाजी पार्क में होने वाली उद्धव गुट की दशहरा रैली में भगवा ध्वज लेकर कार्यकर्ता पहुंचे।

हाईकोर्ट के आदेश पर उद्धव को मिला शिवाजी पार्क
शिवसेना साल 1966 से यहां दशहरा रैली कर रही है, लेकिन इस बार की रैली खास है। इस बार शिवसेना के अधिकार की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के बीच चल रही है। शिवाजी पार्क में रैली की लड़ाई भी हाईकोर्ट पहुंची थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उद्धव ठाकरे गुट को शिवाजी पार्क में रैली की इजाजत मिली थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव गुट को परमिशन देते हुए कुछ हिदायतें भी दी थीं। कोर्ट ने कहा था- उद्धव गुट को रैली की तैयारियों के लिए 2 से 6 अक्टूबर तक शिवाजी मैदान BMC (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) देगा। आयोजन की वीडियो रिकॉडिंग की जाएगी। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसकी जिम्मेदारी याचिकाकर्ता (उद्धव गुट) की होगी। अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए आयोजक जिम्मेदार होंगे।

शिंदे गुट की याचिका खारिज की थी
शिंदे गुट ने भी शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करने की इजाजत मांगी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। शिंदे गुट के पास BKC मैदान पर दशहरा रैली करने की इजाजत पहले से है। उद्धव गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे HC ने कहा था- BMC ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर निर्णय लेने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।

BMC ने अनुमति मांगने पर नहीं दिया था जवाब
मुंबई के शिवाजी पार्क में हर साल होने वाली दशहरा रैली को लेकर उद्धव गुट के लोगों ने BMC से अनुमति मांगी थी। BMC की ओर से जवाब नहीं मिला। इस पर उद्धव गुट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

शिवसेना 1966 से हर साल शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करती आ रही है।
शिवसेना 1966 से हर साल शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करती आ रही है।

शिवसेना किसकी? सुप्रीम कोर्ट में चल रहा उद्धव और शिंदे के बीच केस
उद्धव की लीडरशिप में बनी महाविकास अघाड़ी ( MVA) सरकार में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस शामिल थीं। शिवसेना का विवाद 20 जून से शुरू हुआ था, जब शिंदे के नेतृत्व में 20 विधायक सूरत होते हुए गुवाहाटी चले गए थे। इसके बाद शिंदे गुट ने शिवसेना के 55 में से 39 विधायक के अपने साथ होने का दावा किया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया था। बाद में एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और भाजपा के देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री बने। सरकार गिरने के बाद उद्धव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

26 जून को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना, केंद्र, महाराष्ट्र पुलिस और डिप्टी स्पीकर को नोटिस भेजा। बागी विधायकों को कोर्ट से राहत मिली। मामला 3 महीने तक कोर्ट में चला जिसके बाद 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में मामला संविधान पीठ को ट्रांसफर कर दिया गया।

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