सोनिया की पसंद खड़गे:राहुल ने दिग्गी को भेजा, पर 6 वजहों से भारी पड़े खड़गे; कास्ट, लोकेशन और लैंग्वेज में सबसे फिट

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: अविनीश मिश्रा

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की आखिरी तारीख खत्म हो चुकी है। 9 दिन की सियासी उठापटक के बाद हाईकमान के संकेत पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने नामांकन दाखिल किया। पार्टी के 30 दिग्गज नेता उनके प्रस्तावक बने, जिसमें राजस्थान के CM अशोक गहलोत, एके एंटोनी, पवन बंसल और दिग्विजय सिंह शामिल हैं। ऐसे में खड़गे की जीत तय मानी जा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 30 सितंबर को AICC ऑफिस में मल्लिकार्जुन खड़गे ने नामांकन दाखिल किया।
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 30 सितंबर को AICC ऑफिस में मल्लिकार्जुन खड़गे ने नामांकन दाखिल किया।

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खड़गे की वाइल्ड कार्ड एंट्री ने सबको चौंका दिया है। 24 अकबर रोड से 10 जनपथ तक एक ही चर्चा है कि खड़गे को ही हाईकमान से हरी झंडी क्यों मिली? नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से पहले उनका नाम कहीं चर्चा में तक नहीं था। खड़गे का नाम सामने आने से पहले का घटनाक्रम सिलसिलेवार तरीके से देखें, तो तस्वीर कुछ साफ हो सकती है...

  • 28 सितंबर को जयपुर में गहलोत गुट के हंगामे के बाद टीम राहुल ने केरल से दिग्विजय सिंह को नामांकन के लिए दिल्ली भेजा। दिग्गी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ दिल्ली आए और फिर कांग्रेस ऑफिस जाकर नामांकन पत्र लिया।
  • सूत्रों के मुताबिक खड़गे के नाम पर सहमति सोनिया और प्रियंका के बीच 29 सितंबर की रात मीटिंग में बनी थी। सोनिया पहले पुराने वफादार अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाना चाहती थी, लेकिन जयपुर में गहलोत गुट के विधायकों ने जो बवाल किया, उसके बाद से ही हाईकमान उनसे नाराज चल रहा था। आखिर में गहलोत ने भी अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया।
  • इसी बीच दिग्विजय सिंह का नाम सामने आने के बाद सोनिया सक्रिय हुईं और 29 सितंबर की रात 10 बजे अचानक प्रियंका के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इसके बाद अगली सुबह मल्लिकार्जुन खड़गे को 10 जनपथ से नामांकन फाइल करने का संदेश भेजा गया।
  • खड़गे के नामांकन दाखिल करने की खबर जैसे ही दिग्विजय को लगी, वे तुरंत उनके सरकारी आवास 10 राजाजी मार्ग पहुंचे, जहां पहली बार खड़गे ने नामांकन दाखिल करने की पुष्टि कर दी। खड़गे के चुनाव लड़ने की जानकारी मिलने के बाद दिग्विजय ने पर्चा नहीं भरने की घोषणा कर दी।

अब जान लेते हैं कि अध्यक्ष पद के कैंडिडेट के तौर पर खड़गे के सिलेक्शन के लिए जरूरी फैक्टर क्या रहे...

1. खड़गे की उम्र भी वजह, उनसे राहुल को खतरा नहीं
खड़गे के सिलेक्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी उम्र है। खड़गे अभी 80 साल के हैं और 2024 लोकसभा चुनाव तक 82 साल के हो जाएंगे। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि खड़गे की बजाय कोई और अध्यक्ष बनता, तो राहुल के लिए भविष्य में चैलेंजर हो सकता था, लेकिन खड़गे के केस में ऐसा नहीं है।

2. कास्ट, लोकेशन और लैंग्वेज में भी फिट हैं खड़गे
खड़गे की जाति भी उनके सिलेक्शन की बड़ी वजह मानी जा रही है। खड़गे दलित हैं, जो वोटों के लिहाज से काफी प्रभावी हैं। लोकसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए तो देश की कुल 543 में से 131 सीटें SC-ST के लिए आरक्षित हैं। जाति के साथ ही लोकेशन मामलों में भी खड़गे फिट हैं। खड़गे दक्षिण भारत से आते हैं, जहां भाजपा उत्तर भारत के मुकाबले ज्यादा मजबूत नहीं है। साथ ही दक्षिण भारतीय होने के बावजूद खड़गे फर्राटेदार हिंदी बोलते हैं। सिलेक्शन के लिए ये भी उनके लिए प्लस पॉइंट रहा।

3. G-23 नेताओं का सपोर्ट, गुटबाजी खत्म हो सकती है
पिछले दो साल से कांग्रेस के भीतर पनपे G-23 के नेताओं का भी खड़गे को समर्थन मिला है। नॉमिनेशन के वक्त G-23 के आनंद शर्मा, पृथ्वीराज चव्हाण, मनीष तिवारी और भूपिंदर हुड्डा प्रस्तावक बने। खड़गे अगर अध्यक्ष बनते हैं, तो G-23 गुट पूरी तरह खत्म हो सकता है।

4. कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर भी फोकस
फरवरी 2023 में कर्नाटक में विधानसभा का चुनाव होना है, जहां कांग्रेस पांच साल से सत्ता से बाहर है। पिछली बार प्रधानमंत्री मोदी ने खड़गे को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने का मुद्दा एक रैली में उठाया था। कांग्रेस हाईकमान इस बार कर्नाटक का किला मजबूत करने की तैयारी में है। खड़गे के सिलेक्शन के पीछे ये भी एक वजह बनी है।

5. सहयोगी दलों के नेताओं से बेहतर संबंध
53 सालों से पॉलिटिक्स में सक्रिय मल्लिकार्जुन खड़गे का सहयोगी दलों के नेताओं से बेहतर संपर्क है। कांग्रेस हाईकमान को अभी देश में भाजपा विरोध में एक मजबूत गठबंधन की जरूरत है। इसमें खड़गे का संपर्क काम आ सकता है। 2019 में जब महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन करना था, तो हाईकमान ने खड़गे को ही बातचीत के लिए मुंबई भेजा था। उस वक्त खड़गे महाराष्ट्र के प्रभारी महासचिव थे।

6. क्लीन इमेज, अब तक सिर्फ एक चुनाव हारे
9 बार विधायक और 2 बार सांसद के साथ ही राज्य सरकार में मंत्री और केंद्रीय मंत्री रहने वाले खड़गे पर विभागीय भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है। हालांकि भाजपा ने 2018 के चुनाव में उनकी संपत्ति को लेकर जरूर सवाल उठाए थे, लेकिन उस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा खड़गे पॉलिटिकल करियर में सिर्फ 2019 का लोकसभा चुनाव हारे हैं।

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खड़गे जीते तो कांग्रेस के दूसरे दलित अध्यक्ष होंगे, मोदी लहर में भी नहीं हारे

गांधी परिवार के बैकडोर सपोर्ट की वजह से खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। सब कुछ सही रहा तो मजदूर आंदोलन से करियर की शुरुआत करने वाले खड़गे कांग्रेस की कमान संभाल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो खड़गे बाबू जगजीवन राम के बाद दूसरे दलित अध्यक्ष बनेंगे। जगजीवन राम 1970-71 में कांग्रेस के अध्यक्ष थे।पढ़ें पूरी खबर...

गांधी परिवार का सपोर्ट नहीं मिला तो दिग्विजय ने नाम वापस लिया

30 सितंबर को नामांकन करने के लिए टाइम ले चुके दिग्विजय सिंह पर्चा दाखिल करने के वक्त कुछ मिनटों में रेस से बाहर हो गए। उम्मीदवारों में नया नाम जुड़ा मल्लिकार्जुन खड़गे का। दिग्विजय के अलावा शुरुआत में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार माने जा रहे अशोक गहलोत उनके प्रस्तावक बने। CSDS में प्रोफेसर अभय दुबे कहते हैं- खड़गे को अध्यक्ष बनाना मजबूरी का सौदा है, क्योंकि सोनिया गांधी शशि थरूर को अध्यक्ष नहीं बना सकतीं। दिग्विजय को लग गया था कि उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा, इसलिए उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली। पूरी खबर यहां पढ़ें...