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ममता संसद में करेंगी मोर्चाबंदी:बिना सांसद बने तृणमूल संसदीय दल की नेता बनीं बंगाल की CM, 2024 की रणनीति के लिए बड़ा कदम

नई दिल्ली3 महीने पहले

तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की मुख्यमंत्री और पार्टी प्रेसिडेंट ममता बनर्जी को पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया है। पार्टी के राज्य सभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। ममता 25 जुलाई को दिल्ली जाने वाली हैं। इस दौरे से पहले इस अहम फैसले के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए तृणमूल सांसद ब्रायन ने कहा कि ममता इस पद के लिए उपयुक्त हैं और उनके मार्गदर्शन और दिशानिर्देश में पार्टी और मजबूत होगी। दीदी 7 बार की सांसद रही हैं। उनके पास विजन है। ऐसे में उनके लीडरशिप में पार्टी मजबूत होगी।

बिना सांसद हुए पार्टी पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष बनने के क्या मायने हैं, 5 पॉइंट में समझें...

  1. कोई भी दल अपने वरिष्ठ सांसद को पार्टी पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष चुनता है। हालांकि ये पार्टी का अंदरूनी मामला होता है, जिसका नियमों से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन बंगाल में मोदी और शाह की जोड़ी को पटखनी देने के बाद ममता का कद बढ़ गया है। ऐसे में खुद ममता और उनकी पार्टी TMC चाहती है कि दीदी देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठें।
  2. ममता अभी बतौर मुख्यमंत्री ही विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरती रही हैं, लेकिन TMC पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद वे सीधे तौर पर अपनी पार्टी का चेहरा बन गई हैं। यानी अगर दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी किसी मुद्दे पर विपक्षी दलों के पार्लियामेंट्री बोर्ड के लीडर्स की बैठक बुलाते हैं तो इसमें TMC की तरफ से सीधे तौर पर ममता की एंट्री होगी।
  3. बंगाल में भाजपा को हराने के बाद लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी ममता ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इमेज को चैलेंज किया है। इस जीत के बाद कई बड़े नेताओं ने ममता को मोदी का तोड़ तक बताया। ममता की बेबाक और तेजतर्रार छवि भी उन्हें मोदी के सामने विपक्ष के बड़े नेता के तौर पर पेश करती है।
  4. ममता कोरोना मैनेजमेंट, पेगासस जासूसी मामला और हाल ही में मीडिया हाउसेज पर रेड को लेकर खुले तौर पर केंद्र सरकार की आलोचना कर चुकी हैं। ममता कोलकाता में भले बैठी हों, लेकिन CM बनने के बाद वे हमेशा विपक्ष के एक नेता की तरह केंद्र सरकार पर हमलावर रहती हैं।
  5. हाल ही में पार्टी के उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा की विपक्ष के कई बड़े दलों के नेताओं के साथ घंटों बैठक का मामला हो या फिर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का शरद पवार से तीन बार मिलने का मामला हो। ममता की इस रणनीति को आगामी लोकसभा चुनाव से पहले खुद को विपक्ष के नेता के तौर पर पेश करने की तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है।

25 जुलाई को मोदी से मिलेंगी ममता
ममता बनर्जी 25 जुलाई से 2 से 3 दिन के दिल्ली प्रवास पर रहेंगी। वे इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने वाली हैं। ममता ने गुरुवार को खुद यह जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलने का वक्त मिल गया है। मैं 2-3 दिन के लिए दिल्ली जाऊंगी। अगर राष्ट्रपति से वक्त मिला तो उनसे भी मुलाकात करूंगी।

बता दें कि मार्च-अप्रैल में हुए बंगाल चुनाव के बाद ममता और मोदी का पहली बार आमना-सामना होगा। ममता की मोदी से मुलाकात ऐसे समय होने जा रही है जब ममता पेगासस जासूसी विवाद और मीडिया हाउसेज पर रेड जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हैं।

सोनिया समेत विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से भी मिलेंगीं
ममता अपने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध विपक्ष को एक मंच पर लाने की भी कोशिश करेंगी। बताया जा रहा है कि वे सोनिया गांधी समेत विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से भी मिल सकती हैं। ममता संसद भवन भी जा सकती हैं, जहां वे कई नेताओं से मिलेंगीं।

ममता ने कहा था- भाजपा को देश से साफ करने का खेला होगा
ममता बनर्जी ने बुधवार को शहीद दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात समेत कई राज्यों में मेगा वर्चुअल रैली की थी। इस रैली से ममता ने जाहिर कर दिया है कि बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी नजर अब दिल्ली पर है। ममता ने कहा कि जब तक भाजपा पूरे देश से साफ नहीं हो जाती है, तब तक सभी राज्यों में खेला होगा।

उन्होंने कहा कि हम 16 अगस्त से खेला दिवस की शुरुआत करेंगे और गरीब बच्चों को फुटबॉल बांटेंगे। वर्चुअल प्रसारण को सुनने दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, सपा नेता रामगोपाल यादव, जया बच्चन, पी चिदंबरम सहित प्रमुख बीजेपी विरोधी नेता एकजुट हुए थे।

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