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ममता कैबिनेट में फेरबदल बुधवार को:दीदी बोलीं- चार मंत्रियों का काम अकेले संभालना संभव नहीं, 4-5 नए चेहरे शामिल होंगे

कोलकाता4 महीने पहले
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को कैबिनेट में फेरबदल करेंगी। सोमवार को मीटिंग के बाद उन्होंने कहा कि कई मंत्रियों के पद खाली हैं। वो खुद सभी विभागों का काम नहीं कर सकती हैं, इसलिए 4 से 5 नए चेहरे शामिल होंगे।

उन्होंने सात नए जिले बनाने का भी ऐलान किया है। अब राज्य में 30 जिले हो जाएंगे। ममता बनर्जी ने इससे पहले 28 जुलाई को मंत्रिमंडल की बैठक की थी।

सूत्रों के हवाले से पहले ही खबर आ रही थी कि ममता तृणमूल कांग्रेस में कामराज प्लान लागू कर सकती हैं। दरअसल, ये प्लान 1963 में नेहरू के वक्त कांग्रेस ने लागू किया था।

ममता ने पिछले 4 दिन में दूसरी बार कैबिनेट बैठक बुलाई है। 28 जुलाई को कैबिनेट मीटिंग के बाद ममता ने शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी पार्थ चटर्जी को हटाने की घोषणा की थी।

साधन-सुब्रत का निधन, पार्थ जेल में
ममता कैबिनेट के टॉप-5 में से 4 का पद रिक्त हो गया है। कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी और साधन पांडे का इसी साल निधन हो चुका है, जबकि पार्थ जेल जाने की वजह से मंत्री पद गंवा चुके हैं। वहीं वित्त मंत्री रहे अमित मित्रा भी मंत्री पद छोड़ सलाहकार बन चुके हैं।

वन पोस्ट-वन पर्सन का फॉर्मूला लागू हो सकता है
तृणमूल सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट फेरबदल में वन पोस्ट-वन पर्सन का फॉर्मूला लागू हो सकता है। वर्तमान में परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम समेत कुछ मंत्रियों के पास दो या उससे अधिक जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में विस्तार में उनसे पद लिया जा सकता है।

इसी साल फरवरी में अभिषेक बनर्जी और उनकी टीम ने वन पोस्ट-वन पर्सन फॉर्मूला लागू करने की मांग की थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

बाबुल-निर्मल रेस में; सांसद भी बनाए जा सकते हैं मंत्री
सूत्रों के मुताबिक नए मंत्री बनने के रेस में भाजपा से आए बाबुल सुप्रियो, निर्मल माझी भी रेस में हैं। इसके अलावा, पार्टी कुछ सांसदों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। वहीं कुछ मंत्रियों का कद भी बढ़ाया जा सकता है। पार्टी का पूरा फोकस 2023 के पंचायत और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव है।

जानिए कामराज प्लान के बारे में...
1962 में चीन से युद्ध में हार और महंगाई के मुद्दे पर जनता में कांग्रेस की लोकप्रियता कम होने लगी थी, जिसके बाद 1963 में तत्कालीन मद्रास के मुख्यमंत्री के कामराज ने पंडित नेहरू को एक फॉर्मूला समझाया। फॉर्मूले के तहत सभी मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को संगठन के काम में लगाने के लिए कहा गया।

कामराज के इस प्लान को नेहरू ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी से पास करा दिया। कांग्रेस में कामराज प्लान लागू होते ही नेहरू कैबिनेट के सभी मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। इनमें जगजीवन राम, लाल बहादुर शास्त्री और मोरारजी देसाई जैसे दिग्गज नेता शामिल थे।